Jagannath Puri Rath Yatra History in Hindi,जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 कब है? जानें पुरी रथ यात्रा की तिथि, इतिहास, धार्मिक महत्व, तीनों रथों की जानकारी, प्रमुख अनुष्ठान, यात्रा गाइड

Table of Contents
Table of Contents
जगन्नाथ रथ यात्रा 2026
“जय जगन्नाथ” के जयकारों, शंख की आवाज़ और भक्तों की भारी भीड़ के बीच, गुरुवार को ओडिशा के पुरी में सालाना जगन्नाथ रथ यात्रा शुरू हुई। भारत के सबसे बड़े और सबसे पवित्र धार्मिक त्योहारों में से एक को देखने के लिए लाखों श्रद्धालु जुटे।
इस भव्य जुलूस में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक की अपनी पवित्र यात्रा के लिए विशाल लकड़ी के रथों पर सवार होकर निकले।
भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में जगन्नाथ रथ यात्रा का विशेष स्थान है। हर वर्ष ओडिशा के पवित्र शहर पुरी में आयोजित होने वाली यह यात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। वर्ष 2026 में जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई (गुरुवार) को आयोजित होगी। इस दिन लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए पुरी पहुंचेंगे, जबकि करोड़ों लोग टीवी और ऑनलाइन माध्यमों से इस ऐतिहासिक यात्रा का साक्षी बनेंगे।
जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भक्ति, समानता, सेवा, भाईचारे और भारतीय संस्कृति की जीवंत पहचान भी है। इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच रथ पर सवार होकर निकलते हैं, जिससे हर व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के उनके दर्शन कर सकता है।
सदियों पुराने इस त्योहार के दौरान साल में एक बार ऐसा मौका आता है जब भाई-बहन देवता जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकलकर भक्तों के बीच आते हैं, जिससे हर वर्ग के लोग उनका आशीर्वाद ले सकते हैं। हज़ारों भक्तों ने भक्ति गीतों, ढोल की थाप और धार्मिक उत्साह के बीच भव्य रूप से सजाए गए रथों को ‘ग्रैंड रोड’ पर खींचा।
त्योहार के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद को देखते हुए, अधिकारियों ने पूरे पुरी में सुरक्षा और भीड़-भाड़ को संभालने के लिए व्यापक इंतज़ाम किए हैं। सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस (CAPF) की मदद से 13,000 से ज़्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है, जबकि AI-इनेबल्ड CCTV कैमरे, ड्रोन और सैकड़ों सर्विलांस कैमरे जुलूस के रास्ते पर नज़र रख रहे हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा क्या है?
Jagannath Temple Puri Information
जगन्नाथ रथ यात्रा एक वार्षिक धार्मिक उत्सव है जिसमें भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा विशाल लकड़ी के रथों पर विराजमान होकर श्री जगन्नाथ मंदिर से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर तक यात्रा करते हैं।
इस यात्रा को संस्कृत में रथोत्सव भी कहा जाता है। यह उत्सव हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आयोजित किया जाता है। पुरी में आयोजित होने वाली यह यात्रा विश्व की सबसे प्रसिद्ध रथ यात्राओं में से एक है, जहां लाखों श्रद्धालु भगवान के रथ की रस्सी खींचकर स्वयं को धन्य मानते हैं।
जगन्नाथ भगवान कौन हैं?
भगवान जगन्नाथ को भगवान श्रीकृष्ण का ही एक विशेष स्वरूप माना जाता है।
पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर में मुख्य रूप से चार विग्रह स्थापित हैं—
- भगवान जगन्नाथ
- भगवान बलभद्र
- देवी सुभद्रा
- सुदर्शन चक्र
इनकी सबसे अनोखी बात यह है कि इनकी मूर्तियां पत्थर की नहीं बल्कि विशेष प्रकार की नीम की लकड़ी (दारु ब्रह्म) से बनाई जाती हैं। इन विग्रहों का स्वरूप भी सामान्य हिंदू मंदिरों से बिल्कुल अलग दिखाई देता है। भगवान जगन्नाथ की बड़ी-बड़ी गोल आंखें, छोटे हाथ और विशिष्ट आकृति पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।
जगन्नाथ रथ यात्रा का इतिहास
इतिहासकारों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार जगन्नाथ रथ यात्रा की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है। इसका उल्लेख स्कंद पुराण, ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण और नारद पुराण जैसे अनेक प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। वर्तमान श्री जगन्नाथ मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में पूर्वी गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने कराया था। इसके बाद से रथ यात्रा का आयोजन लगातार होता आ रहा है।
हालांकि विद्वानों का मानना है कि भगवान जगन्नाथ की पूजा और रथ यात्रा की परंपरा इससे भी कहीं अधिक प्राचीन है।

जगन्नाथ रथ यात्रा की पौराणिक कथा
जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। सबसे प्रसिद्ध कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण, उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा एक बार अपने जन्मस्थान और रिश्तेदारों से मिलने के लिए निकले थे। उसी परंपरा को आज जगन्नाथ रथ यात्रा के रूप में मनाया जाता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। इसलिए प्रत्येक वर्ष भगवान अपने भाई-बहन के साथ सात दिनों के लिए मौसी के घर जाते हैं।
यात्रा समाप्त होने के बाद भगवान पुनः श्री मंदिर लौट आते हैं। इस वापसी यात्रा को बहुदा यात्रा कहा जाता है।
रथ यात्रा क्यों निकाली जाती है?
बहुत से लोगों के मन में यह प्रश्न आता है कि आखिर भगवान मंदिर छोड़कर बाहर क्यों आते हैं? धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान यह संदेश देते हैं कि वे केवल मंदिरों तक सीमित नहीं हैं। जो भक्त किसी कारणवश मंदिर के गर्भगृह तक नहीं पहुंच सकते, भगवान स्वयं उनके दर्शन देने बाहर आते हैं। इसी कारण जगन्नाथ रथ यात्रा को भगवान का भक्तों के घर तक आने वाला उत्सव भी कहा जाता है। यह परंपरा समाज में समानता और समरसता का संदेश देती है।
जगन्नाथ रथ यात्रा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में इस यात्रा का अत्यंत विशेष महत्व माना गया है।
मान्यता है कि—
- भगवान के रथ की रस्सी खींचने से पुण्य प्राप्त होता है।
- भगवान जगन्नाथ के दर्शन से जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
- परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
- मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
- भगवान की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
हालांकि धार्मिक मान्यताएं व्यक्तिगत आस्था का विषय हैं, लेकिन करोड़ों श्रद्धालु इस विश्वास के साथ हर वर्ष यात्रा में भाग लेते हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 कब है?
साल 2026 में जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई, गुरुवार को आयोजित होगी। यह यात्रा सुबह विशेष पूजा-अर्चना के बाद शुरू होती है और भगवान तीनों भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। इस दौरान पुरी की सड़कें श्रद्धालुओं से पूरी तरह भर जाती हैं।
पुरी की रथ यात्रा क्यों है सबसे खास?
भारत के कई राज्यों में जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली जाती है, लेकिन पुरी की यात्रा सबसे विशेष मानी जाती है क्योंकि—
- यह भगवान जगन्नाथ की मूल रथ यात्रा है।
- श्री जगन्नाथ मंदिर चार धामों में से एक है।
- तीनों रथ हर वर्ष नई लकड़ी से बनाए जाते हैं।
- लाखों श्रद्धालु एक साथ रथ खींचते हैं।
- दुनिया भर से पर्यटक और श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होते हैं।
- UNESCO की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत से जुड़े सांस्कृतिक महत्व के कारण भी यह वैश्विक पहचान रखती है।
तीनों रथों का रहस्य, प्रमुख अनुष्ठान और धार्मिक परंपराएं
तीनों रथों का निर्माण कैसे होता है?
जगन्नाथ रथ यात्रा की सबसे अनोखी परंपराओं में से एक है कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ हर वर्ष नए बनाए जाते हैं। पुराने रथों का दोबारा उपयोग नहीं किया जाता।
रथ निर्माण का कार्य अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर शुरू होता है। इसके लिए विशेष प्रकार की लकड़ी ओडिशा के निर्धारित जंगलों से लाई जाती है। इस कार्य को पारंपरिक बढ़ई परिवार (महारण समुदाय) पीढ़ियों से निभाते आ रहे हैं।
रथों के निर्माण में सैकड़ों कारीगर कई सप्ताह तक लगातार काम करते हैं। हर रथ के आकार, रंग, पहियों की संख्या और सजावट का निर्धारण सदियों पुरानी परंपराओं के अनुसार किया जाता है।
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ
1. नंदीघोष रथ (भगवान जगन्नाथ)
यह तीनों रथों में सबसे बड़ा और सबसे आकर्षक होता है।
मुख्य विशेषताएं
- ऊंचाई लगभग 45 फीट
- 16 विशाल पहिए
- लाल और पीले रंग का आवरण
- सबसे आगे गरुड़ ध्वज
- चार सफेद घोड़े
- विशाल लकड़ी का मंच
नंदीघोष भगवान जगन्नाथ का दिव्य रथ माना जाता है और लाखों श्रद्धालु इसकी रस्सी खींचने के लिए उत्साहित रहते हैं।
2. तालध्वज रथ (भगवान बलभद्र)
यह भगवान बलभद्र का रथ होता है।
मुख्य विशेषताएं
- लगभग 44 फीट ऊंचा
- 14 पहिए
- लाल और हरे रंग का आवरण
- चार काले घोड़े
- विशाल ध्वज
बलभद्र शक्ति, साहस और धर्म के प्रतीक माने जाते हैं।
3. दर्पदलन (देवदलन) रथ (देवी सुभद्रा)
देवी सुभद्रा का रथ आकार में सबसे छोटा होता है लेकिन धार्मिक दृष्टि से इसका महत्व समान है।
मुख्य विशेषताएं
- लगभग 43 फीट ऊंचा
- 12 पहिए
- लाल और काले रंग की सजावट
- चार लाल घोड़े
इस रथ का नाम दर्पदलन अर्थात अहंकार का नाश करने वाला माना जाता है।

रथों की रस्सी क्यों खींची जाती है?
जगन्नाथ रथ यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण दृश्य वह होता है जब लाखों श्रद्धालु मिलकर भगवान के रथ को खींचते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार—
- भगवान स्वयं अपने भक्तों को सेवा का अवसर देते हैं।
- रथ खींचना ईश्वर के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
- इससे समाज में समानता का संदेश मिलता है।
- कोई व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं होता; सभी भगवान के सेवक हैं।
इसी कारण कई श्रद्धालु वर्षों पहले से पुरी आने की योजना बनाते हैं।
छेरा पहाड़ा क्या है?
रथ यात्रा का सबसे प्रसिद्ध अनुष्ठान छेरा पहाड़ा कहलाता है। इस परंपरा में पुरी के गजपति महाराज स्वर्ण जड़ित झाड़ू से तीनों रथों के आसपास सफाई करते हैं। इसके बाद वे चंदन मिश्रित जल और सुगंधित पदार्थों का छिड़काव करते हैं।
इस परंपरा का संदेश
यह अनुष्ठान बताता है कि—
- भगवान के सामने सभी समान हैं।
- राजा भी स्वयं को भगवान का सेवक मानता है।
- सत्ता और अहंकार से ऊपर सेवा का स्थान है।
यही कारण है कि छेरा पहाड़ा को जगन्नाथ संस्कृति की सबसे अनूठी परंपराओं में गिना जाता है।
स्नान पूर्णिमा का महत्व
रथ यात्रा से लगभग 15 दिन पहले स्नान पूर्णिमा मनाई जाती है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का 108 कलशों के पवित्र जल से महाअभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि इस विशेष स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं। इसी कारण वे कुछ दिनों तक सार्वजनिक दर्शन नहीं देते।
अनासरा काल क्या होता है?
स्नान पूर्णिमा के बाद लगभग 15 दिनों की अवधि को अनासरा कहा जाता है।
इस दौरान—
- मंदिर के कपाट सामान्य दर्शन के लिए बंद रहते हैं।
- भगवान विश्राम करते हैं।
- विशेष औषधीय भोग अर्पित किए जाते हैं।
- सेवायत भगवान की सेवा करते हैं।
श्रद्धालु इस अवधि के समाप्त होने का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
नेत्रोत्सव (नवयौवन दर्शन)
अनासरा समाप्त होने के बाद भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है।
इस अवसर को नेत्रोत्सव या नवयौवन दर्शन कहा जाता है।
मान्यता है कि भगवान इस दिन पूर्ण स्वस्थ होकर पहली बार भक्तों को दर्शन देते हैं।
इसके अगले दिन भव्य रथ यात्रा शुरू होती है।
गुंडिचा मंदिर का महत्व
गुंडिचा मंदिर को भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। रथ यात्रा के दौरान भगवान यहां लगभग सात दिन तक विराजमान रहते हैं। इस दौरान हजारों श्रद्धालु गुंडिचा मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन करते हैं। यह मंदिर पुरी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है।
बहुदा यात्रा क्या होती है?
गुंडिचा मंदिर में सात दिन प्रवास के बाद भगवान वापस श्री जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं। इस वापसी यात्रा को बहुदा यात्रा कहा जाता है। बहुदा यात्रा भी रथ यात्रा जितनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसमें भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
सुना बेष (स्वर्ण वेश)
बहुदा यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को सोने के आभूषणों से अलंकृत किया जाता है। इसे सुना बेष कहा जाता है। इस दिन भगवान स्वर्ण मुकुट, स्वर्ण हाथ, स्वर्ण चक्र और अन्य बहुमूल्य आभूषण धारण करते हैं। यह वर्ष के सबसे भव्य दर्शनों में से एक माना जाता है।
महाप्रसाद की विशेषता
पुरी जगन्नाथ मंदिर का महाप्रसाद पूरे भारत में प्रसिद्ध है।
इसे “अभड़ा” भी कहा जाता है।
महाप्रसाद की कुछ प्रमुख विशेषताएं—
- मिट्टी के बर्तनों में पारंपरिक विधि से पकाया जाता है।
- पहले भगवान को अर्पित किया जाता है।
- इसके बाद श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।
- इसे जाति, धर्म और वर्ग के भेदभाव के बिना सभी ग्रहण कर सकते हैं।
- यह समानता और सामूहिक भोजन की भारतीय परंपरा का प्रतीक माना जाता है।
यात्रा गाइड, रहस्यमयी तथ्य
जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 में पुरी कैसे पहुंचें?
यदि आप वर्ष 2026 की जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने की योजना बना रहे हैं, तो पहले से यात्रा और ठहरने की व्यवस्था करना बेहतर रहेगा। रथ यात्रा के दौरान पुरी में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, इसलिए भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक होती है।
✈️ हवाई मार्ग
पुरी का अपना एयरपोर्ट नहीं है। सबसे निकट बीजू पटनायक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, भुवनेश्वर है, जो पुरी से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है। एयरपोर्ट से टैक्सी, बस और ट्रेन के माध्यम से आसानी से पुरी पहुंचा जा सकता है।
🚆 रेल मार्ग
पुरी रेलवे स्टेशन भारत के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद, वाराणसी और भुवनेश्वर से सीधे जुड़ा हुआ है। रथ यात्रा के समय भारतीय रेलवे विशेष ट्रेनें भी चलाती है।
🚌 सड़क मार्ग
ओडिशा राज्य सड़क परिवहन तथा निजी बस सेवाओं के माध्यम से भुवनेश्वर, कटक, कोणार्क और अन्य शहरों से पुरी के लिए नियमित बसें उपलब्ध रहती हैं।
पहली बार रथ यात्रा में जाने वालों के लिए जरूरी सुझाव
यदि आप पहली बार जगन्नाथ रथ यात्रा में जा रहे हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें—
- यात्रा से कई सप्ताह पहले होटल बुक कर लें।
- हल्के और आरामदायक कपड़े पहनें।
- पीने का पानी साथ रखें।
- भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
- प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
- मोबाइल फोन पूरी तरह चार्ज रखें।
- आवश्यक दवाइयां साथ रखें।
- अधिक नकदी रखने की बजाय डिजिटल भुगतान का उपयोग करें।
- केवल अधिकृत पार्किंग और प्रवेश मार्गों का ही उपयोग करें।
रथ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था
जगन्नाथ रथ यात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है। इसलिए हर वर्ष व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की जाती है।
सुरक्षा के लिए सामान्यतः—
- हजारों पुलिसकर्मी तैनात किए जाते हैं।
- सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाती है।
- ड्रोन कैमरों की सहायता ली जाती है।
- मेडिकल कैंप और एम्बुलेंस की व्यवस्था रहती है।
- आपदा प्रबंधन एवं दमकल दल तैयार रहते हैं।
- ट्रैफिक को विशेष योजना के तहत संचालित किया जाता है।
जगन्नाथ मंदिर से जुड़े रहस्यमयी और रोचक तथ्य
1. हर वर्ष नए रथ बनाए जाते हैं
दुनिया में शायद ही कोई ऐसा धार्मिक उत्सव हो जहां भगवान के लिए हर वर्ष पूरी तरह नए रथ तैयार किए जाते हों।
2. भगवान की मूर्तियां भी लकड़ी की हैं
अधिकांश मंदिरों में पत्थर या धातु की मूर्तियां होती हैं, लेकिन पुरी में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाएं विशेष नीम की लकड़ी से निर्मित होती हैं।
3. नवकलेवर परंपरा
जब हिंदू पंचांग के अनुसार विशेष संयोग बनता है (आमतौर पर 12 से 19 वर्ष के अंतराल पर), तब भगवान की नई प्रतिमाएं बनाई जाती हैं। इस परंपरा को नवकलेवर कहा जाता है।
4. महाप्रसाद की परंपरा
मंदिर का महाप्रसाद मिट्टी के बर्तनों में तैयार किया जाता है और इसे सभी श्रद्धालुओं में बिना किसी भेदभाव के वितरित किया जाता है। यह सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है।
5. लाखों श्रद्धालुओं की आस्था
रथ यात्रा के दौरान भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, नेपाल, बांग्लादेश और अन्य देशों से भी श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।
जगन्नाथ रथ यात्रा का आध्यात्मिक संदेश
जगन्नाथ रथ यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह जीवन के कई महत्वपूर्ण संदेश भी देती है—
- ईश्वर सभी के लिए समान हैं।
- सेवा सबसे बड़ा धर्म है।
- अहंकार का त्याग ही सच्ची भक्ति है।
- समाज में समानता और भाईचारे का महत्व सर्वोपरि है।
- भगवान तक पहुंचने का मार्ग प्रेम, विश्वास और समर्पण से होकर गुजरता है।
2026 में रथ यात्रा देखने जा रहे हैं? इन बातों का रखें ध्यान
- यात्रा से पहले मौसम की जानकारी अवश्य लें।
- अधिक भीड़ वाले स्थानों पर धैर्य बनाए रखें।
- प्रशासन द्वारा निर्धारित बैरिकेड और सुरक्षा घेरों का पालन करें।
- अधिकृत स्वयंसेवकों और पुलिसकर्मियों के निर्देशों का सम्मान करें।
- किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें।
- आपातकालीन स्थिति में निकटतम सहायता केंद्र से संपर्क करें।
जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक समरसता का जीवंत उत्सव है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना से पुरी पहुंचते हैं।
रथ यात्रा हमें यह संदेश देती है कि ईश्वर किसी एक स्थान, जाति, वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं हैं। वे स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं और प्रेम, सेवा, समानता तथा मानवता का मार्ग दिखाते हैं। यही कारण है कि जगन्नाथ रथ यात्रा सदियों से करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है।
यदि आपको यह लेख “जगन्नाथ रथ यात्रा 2026” पसंद आया हो, तो इसे अपने परिवार और मित्रों के साथ साझा करें। धर्म, संस्कृति, यात्रा, त्योहार और ताज़ा समाचारों से जुड़ी ऐसी ही विश्वसनीय और विस्तृत जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर नियमित रूप से विजिट करें।
🙏 जय जगन्नाथ!