टीम इंडिया से 5 साल से बाहर पृथ्वी शॉ ने बताया अपना वापसी प्लान। जानिए रणजी ट्रॉफी 2026-27 में उनका प्रदर्शन, महाराष्ट्र के साथ नया सफर, शमी का ज़िक्र और उनके करियर की पूरी कहानी।

पृथ्वी शॉ का वापसी प्लान
कभी “अगला सचिन तेंदुलकर” कहे जाने वाले पृथ्वी शॉ आज एक बिल्कुल अलग मोड़ पर खड़े हैं। 26 साल की उम्र में उनके नाम टेस्ट डेब्यू पर शतक और अंडर-19 वर्ल्ड कप जीतने वाली कप्तानी जैसी उपलब्धियाँ दर्ज हैं, लेकिन भारतीय टीम की जर्सी पहने उन्हें पाँच साल से ज़्यादा हो चुके हैं। अब रणजी ट्रॉफी 2026-27 के बीच शॉ ने अपनी वापसी की योजना पर खुलकर बात की है, और उनकी बातों में एक साफ संदेश है: बड़ी पारी का इंतजार है, लेकिन ध्यान सिर्फ आज पर है।
दिमाग के किसी कोने में हमेशा यह विचार रहता है, शॉ ने बताया वापसी का प्लान
द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में पृथ्वी शॉ ने साफ कहा कि भारतीय टीम में वापसी का ख्याल उनके मन में हमेशा रहता है। उन्होंने कहा कि दिमाग के किसी कोने में यह विचार हमेशा बना रहता है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि वे बहुत आगे की योजना बनाकर नहीं चलते।
उनका फॉर्मूला बेहद सीधा है। शॉ के मुताबिक उनका ध्यान तीन चीज़ों पर है: मैच जीतते रहना, अच्छी ट्रेनिंग करना और अच्छा खाना। यानी वापसी का कोई जटिल रोडमैप नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की मेहनत और अनुशासन पर भरोसा। उनका मानना है कि एक अच्छी पारी उनकी स्थिति बदल सकती है, और वे भविष्य की चिंता करने की बजाय वर्तमान पर ध्यान लगाए हुए हैं।
अक्टूबर में आजतक पर छपे उनके एक इंटरव्यू (इंडिया टुडे से बातचीत का हवाला देते हुए) में शॉ ने अपनी सोच के और पहलू खोले:
- खुद से लड़ाई: उन्होंने कहा कि भारतीय टीम में वापसी उनका मुख्य लक्ष्य है, लेकिन यह किसी को कुछ साबित करने के बारे में नहीं है, बल्कि खुद से उनकी एक निजी लड़ाई है। उनके मुताबिक अगर यह लक्ष्य न हो तो वे क्रिकेट खेल ही नहीं रहे होते।
- सोशल मीडिया से दूरी: वे सोशल मीडिया से दूर रह रहे हैं। उन्हें अपनी निजी ज़िंदगी में कैमरे और पैपराज़ी पसंद नहीं, इसलिए वे बाहर जाने से बचते हैं और खाली समय निजी तौर पर बिताना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि यह आलोचना से आहत होने की बात नहीं, बल्कि निजी स्पेस की बात है।
- बाहरी राय: बाहर की टिप्पणियाँ उनके लिए ज़्यादा मायने नहीं रखतीं। उनके लिए ज़रूरी यह है कि उनका परिवार क्या सोचता है और वे एक इंसान के तौर पर कैसा व्यवहार करते हैं। उन्होंने माना कि हर कोई गलतियाँ करता है और वे पीछे देखने की बजाय आगे बढ़ना पसंद करते हैं।
- टीम को प्राथमिकता: उन्होंने स्वीकार किया कि ओपनिंग की जगहों के लिए मुकाबला बहुत कड़ा है और सिर्फ प्रतिभा नहीं, लगातार प्रदर्शन भी उतना ही ज़रूरी है। उनके अनुसार वे टीम की ज़रूरतों को निजी महत्वाकांक्षा से ऊपर रखने की कोशिश करते हैं।
- आराम का तरीका: खाली समय में वे होटल के कमरे में नेटफ्लिक्स देखते हैं या वीडियो गेम खेलते हैं।
इन बातों से एक बदली हुई सोच झलकती है। कभी मैदान के बाहर की चर्चाओं में घिरे रहने वाले शॉ अब ज़्यादा शांत और केंद्रित नज़र आते हैं, जो अपनी बातों में बार-बार “खुद पर ध्यान”, “परिवार” और “क्रिकेट” का ज़िक्र करते हैं।
रणजी ट्रॉफी 2026-27 में शॉ का प्रदर्शन: सात पारियाँ, दो अर्धशतक
अब बात मैदान की, जहाँ किसी भी वापसी की असली परीक्षा होती है। इस रणजी सीजन में शॉ महाराष्ट्र के लिए खेल रहे हैं और अब तक सात पारियों में उनके नाम दो अर्धशतक हैं।
उनके स्कोर इस क्रम में रहे: 70, 7, 21, 0, 17, 12 और 53 नाबाद। सीजन के पहले मैच में उन्होंने 70 रन बनाए, जो अब तक उनका सबसे बड़ा स्कोर है। उसके बाद की पारियों में वे बड़ा स्कोर नहीं कर पाए। एक रिपोर्ट के अनुसार झारखंड के खिलाफ उन्होंने 21 रन बनाए और गुजरात के खिलाफ दो पारियों में 17 और 0 रन उनके बल्ले से आए। सातवीं पारी में बंगाल के खिलाफ 53 रन की नाबाद पारी खेलकर उन्होंने फिर अपनी लय दिखाई।
इन आंकड़ों पर शॉ का नज़रिया सधा हुआ है। उन्होंने कहा कि मैचों में कुछ पारियाँ खराब जाती हैं और कुछ अच्छी, और वे आउट होने के बारे में ज़्यादा नहीं सोचते। उनके शब्दों में, “यह बस एक पारी की बात है।” यानी वे मानते हैं कि फॉर्म का पूरा चक्र एक बड़ी पारी से पलट सकता है।
तुलना के लिए पिछला सीजन देखना ज़रूरी है। 2025-26 रणजी सीजन में शॉ ने 7 मैचों में 537 रन बनाए थे, जिनमें चंडीगढ़ के खिलाफ 156 गेंदों में खेली गई 222 रन की पारी शामिल थी। यानी उनके बल्ले में बड़ी पारियाँ खेलने की क्षमता मौजूद है। इस सीजन अभी तक वह बड़ी पारी नहीं आई है, और यही उस “इंतजार” का मतलब है जिसकी चर्चा हेडलाइन में है।
कोलकाता में बंगाल पर 10 विकेट की जीत, शमी के सामने शॉ की आतिशी फिफ्टी
महाराष्ट्र बनाम बंगाल का रणजी ट्रॉफी एलीट ग्रुप सी का मैच कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेला गया। इस मुकाबले में महाराष्ट्र ने बंगाल को 10 विकेट से हराकर उसकी तीन मैचों की जीत की लय तोड़ दी। इस जीत के साथ महाराष्ट्र 19 अंकों के साथ ग्रुप सी की तालिका में शीर्ष पर पहुँच गया।
मैच का पूरा सार कुछ इस तरह है:
- बंगाल की पहली पारी: 143 रन पर ऑल आउट। मोहम्मद शमी ने 37 रन देकर 4 विकेट लिए और शाहबाज़ अहमद को 3 विकेट मिले।
- महाराष्ट्र की पहली पारी: 218 रन पर ऑल आउट। तनय सांघवी ने नाबाद 60 रन बनाए, जिससे टीम को 75 रन की बढ़त मिली।
- बंगाल की दूसरी पारी: 186 रन पर ऑल आउट। अभिषेक पोरेल ने 65 और सुमंत गुप्ता ने 59 रन बनाए। महाराष्ट्र के प्रदीप दाधे और हितेश वालुंज ने 4-4 विकेट लिए।
- चेज़: महाराष्ट्र को 112 रन का लक्ष्य मिला, जिसे टीम ने बिना कोई विकेट गंवाए सिर्फ 19.4 ओवर में 114 रन बनाकर हासिल कर लिया।
इस चेज़ में शॉ की भूमिका अहम रही। उन्होंने दूसरी पारी में 50 गेंदों पर नाबाद 53 रन बनाए, जिसमें 3 चौके और 4 छक्के शामिल थे। पहली पारी में वे 12 रन बनाकर मोहम्मद शमी की गेंद पर आउट हुए थे, लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने जमकर हाथ खोले। उनके साथ सचिन धास ने 68 गेंदों में 10 चौकों की मदद से नाबाद 61 रन बनाए।
शमी का ज़िक्र शॉ ने खुद भी किया। उन्होंने कहा कि शमी अब भी उसी रफ्तार और अंदाज़ में गेंदबाज़ी कर रहे हैं। उनके अनुसार ऐसी पिच पर शमी का सामना करना बहुत मुश्किल है, और शमी बंगाल के सबसे अहम गेंदबाज़ थे। उनके शब्द थे, “शमी भाई अब भी उसी तरह गेंदबाजी कर रहे हैं।” शमी जैसे अनुभवी गेंदबाज़ के सामने अर्धशतक बनाना शॉ के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला क्षण माना जा सकता है।
पिच के बारे में शॉ ने बताया कि वह तेज़ गेंदबाज़ों की मददगार थी और पहली पारी में मुकाबला बराबरी का रहा। बंगाल की दूसरी पारी में 25 रन पर तीन विकेट गिरने के बाद महाराष्ट्र का भरोसा बढ़ा। उन्होंने महाराष्ट्र के गेंदबाज़ों के योगदान की भी तारीफ की।
मुंबई से महाराष्ट्र तक: उतार-चढ़ाव भरा सफर और आगे की राह
शॉ का करियर समझने के लिए पीछे लौटना होगा। मुंबई में स्कूल क्रिकेट के हैरिस शील्ड मैच में 546 रन की पारी से वे सुर्खियों में आए। 2018 में उन्होंने भारत को अंडर-19 वर्ल्ड कप जिताने वाली टीम की कप्तानी की। उसी साल वेस्टइंडीज़ के खिलाफ टेस्ट डेब्यू पर शतक जड़कर उन्होंने सबको चौंका दिया।
लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका सफर छोटा रहा। उन्होंने भारत के लिए 5 टेस्ट, 6 वनडे और 1 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच जुलाई 2021 में श्रीलंका के खिलाफ था, यानी वे करीब पाँच साल से टीम इंडिया से बाहर हैं।
इस दौरान चोटों, फिटनेस और अनुशासन को लेकर चिंताएँ और खराब फॉर्म जैसी चुनौतियाँ उनके सामने आईं। 2024 में उन्हें मुंबई की रणजी टीम से बाहर कर दिया गया। दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें रिलीज़ कर दिया और वे आईपीएल 2025 की मेगा नीलामी में अनसोल्ड रह गए। उसी दौर में पूर्व भारतीय कोच ग्रेग चैपल ने उन्हें प्रोत्साहन भरा पत्र भी लिखा था।
2025 में शॉ ने मुंबई छोड़कर महाराष्ट्र की टीम का दामन थामा। इस बदलाव पर उनका रुख सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि मुंबई और पुणे के बीच सिर्फ डेढ़ से दो घंटे की दूरी है और वे नए माहौल में सहज महसूस कर रहे हैं। उनके शब्दों में, “मैं बहुत सहज हूँ और मुझे यहाँ बहुत मज़ा आया।” ऋतुराज गायकवाड़ और अंकित बावने जैसे खिलाड़ियों को वे पहले से जानते हैं, और कई साथियों के साथ उनकी अच्छी ट्यूनिंग है।
आईपीएल में भी उनकी राह आसान नहीं रही। आजतक की एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें आईपीएल 2026 के लिए दोबारा अपने साथ जोड़ा, लेकिन उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला। इसी बीच पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा की यह राय भी चर्चा में रही कि दिल्ली को आईपीएल 2027 की नीलामी से पहले उन्हें रिलीज़ कर देना चाहिए, क्योंकि “आप उनका समय बर्बाद कर रहे हैं” (क्रिकट्रैकर पर छपी हेडलाइन के अनुसार)। यह एक विशेषज्ञ की राय है, कोई आधिकारिक फैसला नहीं।
अब सवाल यह है कि आगे क्या? शॉ के सामने रास्ता साफ है: रणजी में लगातार रन बनाना, महाराष्ट्र को जीत दिलाना और चयनकर्ताओं का ध्यान खींचना। भारतीय टीम में ओपनिंग की जगहों के लिए मुकाबला बेहद कड़ा है, इसलिए सिर्फ एक या दो पारियाँ काफी नहीं होंगी। शॉ ने खुद माना है कि प्रतिभा के साथ निरंतरता भी उतनी ही ज़रूरी है।
रणजी सीजन अभी लंबा है और महाराष्ट्र शीर्ष पर है। बंगाल के खिलाफ मिली लय अगर शॉ आगे बढ़ा पाए तो एक बड़ी पारी, जिसका वे इंतजार कर रहे हैं, किसी भी मैच में आ सकती है। 2025-26 सीजन की 222 रन की पारी बताती है कि जब शॉ लय में आते हैं तो रन बड़े होते हैं।
पृथ्वी शॉ के मुख्य आंकड़े और तथ्य
वापसी की इस चर्चा को ठीक से समझने के लिए कुछ अहम तथ्य एक जगह देखना मददगार रहेगा:
- उम्र: 26 साल।
- अंतरराष्ट्रीय करियर: 5 टेस्ट, 6 वनडे और 1 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच।
- आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच: जुलाई 2021, श्रीलंका के खिलाफ।
- सबसे बड़ी उपलब्धियाँ: 2018 अंडर-19 वर्ल्ड कप में कप्तानी और उसी साल वेस्टइंडीज़ के खिलाफ टेस्ट डेब्यू पर शतक।
- रणजी 2025-26: 7 मैचों में 537 रन, जिसमें चंडीगढ़ के खिलाफ 156 गेंदों में 222 रन की पारी।
- रणजी 2026-27 (अब तक): 7 पारियों में 70, 7, 21, 0, 17, 12 और 53 नाबाद, यानी दो अर्धशतक।
- टीम: मुंबई छोड़कर 2025 में महाराष्ट्र से जुड़े।
- बंगाल के खिलाफ: पहली पारी में 12 रन (शमी का शिकार), दूसरी पारी में 50 गेंदों पर नाबाद 53 रन (3 चौके, 4 छक्के)।
इन आंकड़ों को एक साथ देखने पर तस्वीर कुछ ऐसी बनती है: शॉ के पास क्षमता और अतीत की बड़ी पारियाँ हैं, लेकिन इस सीजन निरंतरता की कमी दिखी है। सात में से सिर्फ दो पारियों में उन्होंने 50 का आंकड़ा पार किया है, और बाकी पाँच पारियों में उनका स्कोर 21 से कम रहा।
वापसी की राह में क्या चुनौतियाँ हैं?
शॉ की राह आसान नहीं है, और इसकी कुछ वजहें साफ हैं।
पहली चुनौती: निरंतरता। शॉ ने खुद माना है कि सिर्फ प्रतिभा काफी नहीं, लगातार प्रदर्शन भी उतना ही ज़रूरी है। रणजी में एक सीजन में 537 रन बनाना बड़ी बात है, लेकिन चयनकर्ताओं को यह भरोसा चाहिए कि वह लय बार-बार दोहराई जा सकती है।
दूसरी चुनौती: ओपनिंग की भीड़। शॉ मूल रूप से ओपनर हैं, और उन्होंने खुद कहा है कि ओपनिंग की जगहों के लिए मुकाबला बहुत कड़ा है। ऐसे में चयनकर्ताओं को चुनने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं।
तीसरी चुनौती: आईपीएल का मंच। आईपीएल भारतीय क्रिकेट में चयन के लिए एक बड़ा शोकेस माना जाता है। आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक आईपीएल 2026 में उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला, जिससे इस मंच पर प्रदर्शन दिखाने का एक अवसर हाथ से निकल गया।
चौथी चुनौती: पुरानी छवि। चोटों, फिटनेस और अनुशासन को लेकर उठे सवालों की छाया करियर पर रही है। शॉ अब सोशल मीडिया से दूरी, परिवार और सिर्फ क्रिकेट पर फोकस जैसी बातों से यह संदेश देना चाहते हैं कि वे बदल चुके हैं। लेकिन यह बदलाव मैदान पर निरंतर रनों के रूप में दिखना ज़रूरी है।
दूसरी तरफ, कुछ बातें शॉ के पक्ष में भी जाती हैं। वे सिर्फ 26 साल के हैं, उनके पास अनुभव है, वे नई टीम में सहज हैं और महाराष्ट्र इस समय अपने ग्रुप में शीर्ष पर है। एक अच्छी टीम के साथ लगातार जीत और उसमें योगदान, चयनकर्ताओं का ध्यान खींचने का सबसे आसान तरीका है।
वापसी की राह लंबी, लेकिन इरादे साफ
पृथ्वी शॉ की कहानी एक ऐसे खिलाड़ी की कहानी है जिसने बहुत कम उम्र में बहुत कुछ पा लिया, फिर कठिन दौर देखा और अब दोबारा शुरुआत कर रहा है। पाँच साल का वनवास छोटा नहीं होता, लेकिन 26 साल की उम्र में उनके पास समय भी है और अनुभव भी। नया शहर, नई टीम, सोशल मीडिया से दूरी और सिर्फ क्रिकेट पर ध्यान, यह सब बताता है कि वे इस बार कोई जल्दबाज़ी नहीं करना चाहते।
सच यह भी है कि इस सीजन के सात पारियों के आंकड़े अभी उतने चमकदार नहीं हैं कि चयनकर्ताओं को मजबूर कर दें। दो अर्धशतक अच्छे हैं, लेकिन वापसी के लिए एक या दो बड़ी पारियाँ चाहिए। शॉ भी यही कहते हैं कि एक पारी स्थिति बदल सकती है। अब देखना यह है कि वह पारी कब आती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख नवंबर 2026 तक की रिपोर्टों पर आधारित है। रणजी सीजन जारी है और आंकड़े बदल सकते हैं। कुछ रिपोर्टों में पहले मैच के विपक्षी (दिल्ली या सर्विसेज़) को लेकर अलग-अलग जानकारी है, इसलिए ब्लॉग में विपक्षी का नाम नहीं दिया गया है।
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