अप्रैल-जून 2026 में भारतीय परिवारों ने 50 टन सोना बेचा। जानिए गोल्ड प्राइस गिरने की आशंका, IBJA रिपोर्ट, गोल्ड रीसाइक्लिंग और निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है।

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भारतीय परिवारों ने 3 महीने में बेचा 50 टन सोना! जानिए क्यों कैश के लिए बढ़ी गोल्ड बिक्री
भारतीय परिवारों ने अपने पास मौजूद सोने को कैश में बदलने के लिए इस साल अप्रैल-जून तिमाही में लगभग 50 टन सोना बेचा। इसकी मुख्य वजह कीमतें गिरने का बढ़ता डर था।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए, रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल-जून की अवधि में घरेलू ग्राहकों द्वारा सोने की बिक्री में साल-दर-साल (y-o-y) 43% की बढ़ोतरी हुई है।भारत में सोना हमेशा से निवेश, सुरक्षा और पारिवारिक विरासत का प्रतीक रहा है। लेकिन वर्ष 2026 की अप्रैल-जून तिमाही में एक ऐसा ट्रेंड देखने को मिला जिसने गोल्ड मार्केट के साथ-साथ निवेशकों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा।
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय परिवारों ने इस दौरान लगभग 50 टन पुराना सोना बेच दिया। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह सोने की कीमतों में संभावित गिरावट का डर और मौजूदा ऊंचे भाव पर मुनाफा कमाने की इच्छा बताई जा रही है।
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा पुराने सोने की बिक्री में पिछले साल की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अब लोग सोने को केवल आभूषण नहीं बल्कि एक वित्तीय संपत्ति के रूप में भी देखने लगे हैं।
क्यों बढ़ी पुराने सोने की बिक्री?
Indian households selling old gold,हाल के महीनों में सोने की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एक समय सोना रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब पहुंच गया था, लेकिन बाद में कीमतों में गिरावट शुरू हो गई। इसी वजह से कई परिवारों ने यह फैसला लिया कि भविष्य में कीमतें और गिरने से पहले मौजूदा स्तर पर ही अपना पुराना सोना बेच देना बेहतर होगा।
29 जून को सुबह लगभग 9:13 बजे, MCX पर अगस्त फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के लिए सोने की कीमत 0.32% गिरकर ₹1,44,130 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रही थी। इस खबर को लिखते समय—29 जून को शाम 6 बजे—बुलियन डेटा के अनुसार 24-कैरेट सोने की कीमत ₹1,43,220 प्रति 10 ग्राम थी। रिपोर्ट के अनुसार, कीमतों के ₹1.2 लाख प्रति 10 ग्राम तक गिरने की उम्मीद है।
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मार्केट डेटा के मुताबिक 29 जून को एमसीएक्स पर अगस्त फ्यूचर के लिए सोना करीब ₹1.44 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि बुलियन मार्केट में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग ₹1.43 लाख प्रति 10 ग्राम रही। बाजार से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में कीमतें ₹1.20 लाख प्रति 10 ग्राम तक भी पहुंच सकती हैं। इसी संभावना ने कई निवेशकों और परिवारों को अभी लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
IBJA के अधिकारियों का कहना है कि ग्राहक पुराने आभूषण, सिक्के और गोल्ड बार बेचकर नकद राशि प्राप्त कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि आगे कीमतों में और गिरावट आती है तो अभी बेचना अधिक लाभदायक साबित हो सकता है।
इसके अलावा कई लोगों के लिए यह आर्थिक जरूरत का भी मामला है। शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार या अन्य घरेलू खर्चों के लिए लोग अपने निष्क्रिय पड़े सोने को नकदी में बदल रहे हैं। पहले जहां स्थानीय सर्राफा दुकानों पर ही अधिकतर बिक्री होती थी, वहीं अब संगठित कंपनियों के आने से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित हो गई है। डिजिटल भुगतान, सही मूल्यांकन और शुद्धता की जांच जैसी सुविधाओं ने ग्राहकों का भरोसा बढ़ाया है।
गोल्ड रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री को कैसे मिला फायदा?
पुराने सोने की बढ़ती बिक्री का सबसे बड़ा फायदा भारत की गोल्ड रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री को मिल रहा है। पहले जो सोना घरों की तिजोरियों में वर्षों तक पड़ा रहता था, वही अब दोबारा बाजार में लौट रहा है। रिफाइनिंग कंपनियां इस सोने को शुद्ध करके 24 कैरेट गोल्ड में बदलती हैं और फिर इसे ज्वेलरी निर्माताओं, सिक्का बनाने वाली कंपनियों तथा अन्य उद्योगों को उपलब्ध कराती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार कुछ प्रमुख कंपनियों ने अपने नेटवर्क में पुराने सोने की खरीद में लगभग 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की है। इससे देश के भीतर सोने की उपलब्धता बढ़ रही है और आयात पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड रीसाइक्लिंग केवल उद्योग के लिए ही नहीं बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी सकारात्मक कदम है। इससे नई खदानों से सोना निकालने की आवश्यकता कुछ हद तक कम होती है और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो पाता है।
2025 में भारत में लगभग 125 से 150 टन सोना रीसाइक्लिंग के जरिए बाजार में वापस आया था। मौजूदा रुझानों को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 200 से 250 टन तक पहुंच सकता है।

भारत के गोल्ड बाजार पर क्या पड़ेगा असर?
भारत अपनी अधिकांश सोने की जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है। वित्त वर्ष 2026 में देश ने लगभग 72.4 अरब डॉलर का सोना विदेशों से आयात किया। यदि घरेलू स्तर पर रीसाइक्लिंग लगातार बढ़ती रही तो आयात पर निर्भरता में धीरे-धीरे कमी आ सकती है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होने के साथ-साथ घरेलू गोल्ड सप्लाई चेन भी मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रेंड यह भी दर्शाता है कि भारतीय परिवारों की निवेश संबंधी सोच बदल रही है। पहले सोने को केवल सांस्कृतिक और पारिवारिक संपत्ति माना जाता था, लेकिन अब लोग जरूरत पड़ने पर इसे वित्तीय संसाधन के रूप में भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
हालांकि निवेशकों को केवल बाजार की अफवाहों या अल्पकालिक कीमतों के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए। यदि सोना लंबे समय के निवेश का हिस्सा है तो किसी भी निर्णय से पहले बाजार की स्थिति, व्यक्तिगत जरूरत और वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लेनी चाहिए।
अप्रैल-जून 2026 के दौरान भारतीय परिवारों द्वारा लगभग 50 टन सोना बेचना यह साबित करता है कि देश में गोल्ड निवेश का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऊंची कीमतों पर मुनाफा कमाने, नकदी की जरूरत और भविष्य में संभावित गिरावट की आशंका ने इस ट्रेंड को बढ़ावा दिया है। वहीं दूसरी ओर इससे गोल्ड रीसाइक्लिंग उद्योग को नई गति मिली है और घरेलू गोल्ड इकोसिस्टम भी मजबूत हो रहा है। आने वाले समय में यदि यह रुझान जारी रहता है तो भारत का गोल्ड बाजार पहले की तुलना में अधिक संगठित और संतुलित बन सकता है।
Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए तैयार किया गया है। किसी भी प्रकार का निवेश करने या सोना खरीदने-बेचने से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार की सलाह अवश्य लें।
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