Bumrah replacement for sri lanka series 2026: Breaking औकिब नबी को मिला पहला भारतीय टेस्ट कॉल-अप, बुमराह की जगह श्रीलंका सीरीज़ में मौका

Bumrah replacement for sri lanka series,जम्मू-कश्मीर के औकिब नबी को जसप्रीत बुमराह की चोट के चलते श्रीलंका टेस्ट सीरीज़ के लिए भारतीय टीम में पहला मौका मिला। जानें उनका पूरा करियर सफर।

Bumrah replacement for sri lanka series
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औकिब नबी को मिला भारतीय टीम में पहला मौका, जसप्रीत बुमराह की जगह श्रीलंका टेस्ट सीरीज़ के लिए चुने गए

भारतीय क्रिकेट में एक नया अध्याय लिखा जाने वाला है। जम्मू-कश्मीर के तेज़ गेंदबाज़ औकिब नबी को श्रीलंका के खिलाफ होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज़ के लिए भारतीय टीम में पहली बार बुलावा मिला है। यह मौका उन्हें भारत के सबसे बड़े गेंदबाज़ों में से एक, जसप्रीत बुमराह की गैर-मौजूदगी में मिला है, जो घुटने की चोट के चलते इस दौरे से बाहर हो गए हैं। यह खबर सिर्फ एक खिलाड़ी के करियर में मील का पत्थर नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्र के लिए भी एक ऐतिहासिक पल है, जहां से क्रिकेट के बड़े मंच तक पहुंचना हमेशा आसान नहीं रहा।

बीसीसीआई के एक सूत्र ने पीटीआई को बताया कि बुमराह पूरी तरह फिट नहीं हैं और औकिब नबी को उनके विकल्प के रूप में मंज़ूरी दे दी गई है। इस फैसले के साथ ही भारतीय क्रिकेट जगत में औकिब नबी का नाम अचानक हर तरफ चर्चा में आ गया है।

बुमराह क्यों बाहर हुए?

Bumrah injury,जसप्रीत बुमराह, जो भारतीय गेंदबाज़ी आक्रमण की रीढ़ माने जाते हैं, पिछले कुछ समय से घुटने की तकलीफ से जूझ रहे थे। यह चोट इंग्लैंड के खिलाफ हुई वनडे सीरीज़ के दौरान आई थी, जब कार्डिफ में दूसरे वनडे में फील्डिंग करते समय उनके बाएं घुटने पर असर पड़ा और वहां सूजन आ गई थी। इसी वजह से वे लॉर्ड्स में हुए सीरीज़ के निर्णायक मुकाबले से भी बाहर रहे थे।

शुरुआत में उम्मीद थी कि बुमराह फिटनेस टेस्ट पास करके श्रीलंका दौरे पर जा सकेंगे, और उन्हें शुभमन गिल की अगुवाई वाली टेस्ट टीम में सशर्त शामिल भी किया गया था। लेकिन बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में उनकी रिकवरी को लेकर सावधानी बरती गई। वहां के विशेषज्ञों ने तय किया कि आगे के व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को देखते हुए बुमराह को जल्दबाज़ी में मैदान पर उतारना जोखिम भरा होगा। नतीजतन, अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति ने उनके स्थान पर एक नए गेंदबाज़ को मौका देने का फैसला किया।

गौर करने वाली बात यह भी है कि यह पहली बार नहीं है जब बुमराह चोट के कारण किसी बड़ी सीरीज़ से बाहर हुए हों। इससे पहले भी पीठ की तकलीफ के चलते वे साउथ अफ्रीका टेस्ट सीरीज़ से बाहर हो चुके हैं, जब उमेश यादव को उनकी जगह टीम में शामिल किया गया था। इस बार घुटने की चोट ने एक बार फिर टीम मैनेजमेंट को विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया।

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औकिब नबी कौन हैं?

औकिब नबी डार का जन्म 4 नवंबर 1996 को जम्मू-कश्मीर के बारामूला ज़िले के शीरी गांव में हुआ था। उनके पिता ग़ुलाम नबी डार एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं, और उन्होंने ही अपने बेटे के करियर में हमेशा साथ दिया। बारामूला जैसे इलाके में क्रिकेट की सुविधाएं बेहद सीमित थीं—यहां तक कि सबसे नज़दीकी मैदान भी श्रीनगर में था, जो उनके घर से लगभग 50 किलोमीटर दूर था। बावजूद इसके, औकिब की तेज़ गेंदबाज़ी के प्रति दीवानगी ने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया।

दिलचस्प बात यह है कि औकिब की क्रिकेट यात्रा टेनिस बॉल क्रिकेट से शुरू हुई थी। बाद में एक दोस्त की प्रेरणा से उन्होंने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) में ऑडिशन दिया। शुरुआत में उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अगले साल अंडर-19 टीम में जगह बना ली। यहीं से उनके करियर का असली टर्निंग पॉइंट शुरू हुआ। धीरे-धीरे वे अंडर-19 कूच बिहार ट्रॉफी और अंडर-23 कर्नल सी.के. नायडू ट्रॉफी खेलते हुए आगे बढ़े।

उनका फर्स्ट-क्लास डेब्यू 2019-20 रणजी ट्रॉफी सीज़न में जम्मू-कश्मीर की तरफ से झारखंड के खिलाफ हुआ था। पहली पारी में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली थी, लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने 5/38 के आंकड़ों के साथ अपनी पहली फिफ्टी विकेट हॉल लेकर जम्मू-कश्मीर को पारी और 27 रन से जीत दिलाई। उनका लिस्ट-ए डेब्यू भी खास रहा—2018 विजय हज़ारे ट्रॉफी में उन्होंने हरियाणा के खिलाफ ऐसी टीम के सामने डेब्यू किया, जिसमें पूर्व भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान और परवेज़ रसूल जैसे दिग्गज शामिल थे।

29 साल के ‘बारामूला एक्सप्रेस’ के नाम से मशहूर औकिब नबी दायें हाथ के मध्यम-तेज़ गेंदबाज़ हैं, जिनकी सबसे बड़ी ताकत है गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की काबिलियत। साथ ही वे निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाज़ भी साबित हुए हैं।

करियर में आया धमाकेदार उभार

अगस्त 2025 में औकिब नबी पहली बार सुर्खियों में आए, जब उन्होंने डुलीप ट्रॉफी में एक अनोखा कारनामा कर दिखाया। नॉर्थ ज़ोन बनाम ईस्ट ज़ोन मुकाबले में उन्होंने लगातार चार गेंदों पर चार विकेट लेकर डबल हैट्रिक ली—यह डुलीप ट्रॉफी के इतिहास में ऐसा करने वाले पहले गेंदबाज़ बने। इस स्पेल की शुरुआत उन्होंने विराट सिंह का विकेट लेकर की थी।

लेकिन असली कमाल उन्होंने घरेलू क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट, रणजी ट्रॉफी में दिखाया। 2024-25 सीज़न में उन्होंने 44 विकेट लेकर सीज़न के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज़ का तमगा हासिल किया, जिसमें उनका औसत महज़ 13.93 और स्ट्राइक-रेट 30.47 का रहा। यह प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर के किसी भी गेंदबाज़ द्वारा एक सीज़न में लिए गए सबसे ज़्यादा विकेटों का नया रिकॉर्ड था, जिसने परवेज़ रसूल के पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।

इसके बाद 2025-26 का सीज़न तो मानो औकिब नबी के नाम ही रहा। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 60 विकेट झटके और रणजी ट्रॉफी के सबसे सफल गेंदबाज़ बने। यह आंकड़ा किसी भी रणजी सीज़न में सातवां सबसे बड़ा और तेज़ गेंदबाज़ों में तीसरा सबसे बड़ा है—इस मामले में सिर्फ जयदेव उनादकट (2019-20 में 67 विकेट) और डोड्डा गणेश (1998-99 में 62 विकेट) ही उनसे आगे हैं। लगातार दो सीज़न में उनके कुल 104 विकेट भी एक असाधारण उपलब्धि है,

जिसे केवल चार गेंदबाज़ों ने पीछे छोड़ा है, और उनमें से भी सिर्फ एक तेज़ गेंदबाज़—खुद जयदेव उनादकट, जिन्होंने 2018-19 और 2019-20 में मिलाकर 106 विकेट लिए थे। इन दो सीज़न में औकिब ने 18 मैचों में 13 बार पांच विकेट लिए, जो उन्हें अशुतोष अमन (14 फाइव-फॉर) के बाद इस मामले में दूसरे स्थान पर रखता है।

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बल्लेबाज़ी में भी उन्होंने अपनी काबिलियत दिखाई है। विजय हज़ारे ट्रॉफी में हैदराबाद के खिलाफ नंबर 8 पर बल्लेबाज़ी करते हुए उन्होंने करियर का पहला शतक—नाबाद 114 रन—जड़ा। यह लिस्ट-ए क्रिकेट में नंबर 8 या उससे नीचे बल्लेबाज़ी करते हुए बनाया गया छठा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है। इस पारी के दौरान वंशज शर्मा के साथ उनकी आठवें विकेट के लिए नाबाद 182 रनों की साझेदारी भी हुई, जो लिस्ट-ए क्रिकेट में आठवें विकेट या उससे नीचे की चौथी सबसे बड़ी साझेदारी और किसी भारतीय जोड़ी की सबसे बड़ी साझेदारी है।

जम्मू-कश्मीर की ऐतिहासिक रणजी ट्रॉफी जीत में अहम भूमिका

औकिब नबी का 2025-26 सीज़न सिर्फ व्यक्तिगत आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को उसके 67 साल के इतिहास में पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जिताने में केंद्रीय भूमिका निभाई। फाइनल मुकाबले में कर्नाटक के खिलाफ उन्होंने 5/54 का शानदार स्पेल फेंककर टीम को निर्णायक बढ़त दिलाई। इससे पहले क्वार्टर फाइनल में मध्य प्रदेश के खिलाफ उन्होंने मैच में कुल 12/110 के आंकड़ों के साथ अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। सेमीफाइनल में भी उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था।

पूरे सीज़न के दौरान शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें टूर्नामेंट का प्लेयर ऑफ द सीरीज़ भी घोषित किया गया। जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के दिग्गज परवेज़ रसूल ने भी माना कि औकिब नबी ने जम्मू-कश्मीर क्रिकेट को एक नई पहचान दी है। इरफान पठान, समीउल्लाह बेग और कोच अजय शर्मा जैसे नामों ने भी टीम की इस ऐतिहासिक जीत की सराहना की।

इसी शानदार फॉर्म का असर आईपीएल 2026 की नीलामी में भी देखने को मिला। जहां 2024-25 सीज़न में शानदार प्रदर्शन के बावजूद वे नीलामी में अनसोल्ड रह गए थे, वहीं 2025-26 सीज़न के दमदार आंकड़ों ने उनकी किस्मत पलट दी। दिल्ली कैपिटल्स, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, राजस्थान रॉयल्स और सनराइज़र्स हैदराबाद के बीच हुई खींचतान के बाद आखिरकार दिल्ली कैपिटल्स ने उन्हें 8.40 करोड़ रुपये में खरीदा। इसके अलावा जून-जुलाई में हुए इंडिया-ए के श्रीलंका दौरे पर भी उन्होंने दो मैचों में छह विकेट लेकर अच्छा प्रदर्शन किया था, और जून में अफगानिस्तान के खिलाफ न्यू चंडीगढ़ में हुए एकमात्र टेस्ट से पहले वे भारतीय टीम के साथ अभ्यास भी कर चुके थे।

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टेस्ट टीम में जगह बनाना क्यों है खास?

अगर औकिब नबी की भारतीय टीम में एंट्री की पुष्टि हो जाती है, तो वे जम्मू-कश्मीर से सीनियर भारतीय टीम में जगह बनाने वाले तीसरे क्रिकेटर बन जाएंगे। उनसे पहले यह उपलब्धि परवेज़ रसूल और उमरान मलिक हासिल कर चुके हैं। लेकिन खास बात यह है कि रसूल और मलिक दोनों को ही सफेद गेंद के फॉर्मेट यानी वनडे और टी20 में मौका मिला था। औकिब नबी अगर टेस्ट टीम का हिस्सा बनते हैं, तो वे इस क्षेत्र से टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले पहले खिलाड़ी होंगे—जो उनके घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन को देखते हुए एक तरह से स्वाभाविक भी लगता है।

यह भी दिलचस्प है कि चयनकर्ताओं के पास औकिब नबी के अलावा विदर्भ के यश ठाकुर का विकल्प भी था, लेकिन आखिरकार नबी की निरंतरता और हालिया फॉर्म को तरजीह दी गई।

टीम के लिए और भी झटके

बुमराह की गैर-मौजूदगी अकेली चिंता नहीं है। भारतीय टीम मैनेजमेंट के लिए यह दौरा वैसे भी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है, क्योंकि नितीश कुमार रेड्डी, हर्षित राणा और वॉशिंगटन सुंदर जैसे खिलाड़ी भी हैमस्ट्रिंग चोट के चलते कम से कम पहले टेस्ट से बाहर हैं। ऐसे में चयन को लेकर मुश्किलें और बढ़ गई हैं, और टीम प्रबंधन को युवा तथा घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों पर भरोसा जताना पड़ रहा है।

सीरीज़ का शेड्यूल

भारतीय टीम 4 अगस्त को श्रीलंका पहुंचने वाली है। दो टेस्ट मैचों की यह सीरीज़ 15 अगस्त से गॉल में शुरू होगी, जबकि दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो में खेला जाएगा। शुभमन गिल की अगुवाई में भारतीय टीम इस सीरीज़ में उतरेगी, और सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि क्या औकिब नबी जैसे नए चेहरे टीम की गेंदबाज़ी में आई कमी को पूरा कर पाते हैं या नहीं।

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आगे की राह

औकिब नबी की कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर के उभार की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस जज़्बे की मिसाल है जो सीमित संसाधनों के बावजूद कुछ बड़ा हासिल करने का हौसला रखता है। बारामूला के पहाड़ी इलाकों में क्रिकेट की बुनियादी सुविधाओं की कमी से लेकर भारतीय टेस्ट टीम तक का उनका सफर आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर के कई युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा बनेगा।

अब देखना यह होगा कि श्रीलंका के खिलाफ जब औकिब नबी को अपना पहला मौका मिलता है, तो क्या वे इस बड़े मंच पर भी अपनी घरेलू क्रिकेट वाली निरंतरता और आक्रामकता बरकरार रख पाते हैं। अगर उनका फॉर्म जारी रहा, तो यह सिर्फ बुमराह की एक सीरीज़ की गैर-मौजूदगी की भरपाई भर नहीं होगी, बल्कि भारतीय टेस्ट टीम को एक नया, भरोसेमंद तेज़ गेंदबाज़ भी मिल सकता है।

आपको क्या लगता है — क्या औकिब नबी श्रीलंका में अपने पहले मौके को यादगार बना पाएंगे? नीचे कमेंट में अपनी राय ज़रूर शेयर करें, और भारतीय क्रिकेट से जुड़ी हर बड़ी खबर सबसे पहले पाने के लिए हमें फॉलो करना न भूलें!

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