कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में India vs Brazil दोस्ताना मैच की पूरी जानकारी: प्लेइंग इलेवन, लाइव स्कोर अपडेट, कोच के बयान, टीवी-स्ट्रीमिंग डिटेल और भारतीय फुटबॉल के लिए इस मुकाबले के मायने।

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India vs Brazil Friendly: कोलकाता में ब्राज़ील से भिड़ा भारत, लाइनअप, स्कोर अपडेट, लाइव स्ट्रीमिंग और पूरी जानकारी
india vs brazil football match
कोलकाता की शनिवार की शाम भारतीय फुटबॉल इतिहास के सबसे खास पन्नों में गिनी जाएगी। पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राज़ील की टीम पहली बार भारत के सामने मैदान पर उतरी। मुकाबला सॉल्ट लेक स्टेडियम में हुआ, जिसे विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन भी कहते हैं। कागज़ पर यह एक दोस्ताना मैच है, लेकिन भारत के फुटबॉल प्रेमियों के लिए यह सपने जैसा मौका है।
मैच एक नज़र में
- मुकाबला: भारत बनाम ब्राज़ील, अंतरराष्ट्रीय दोस्ताना मैच
- तारीख: शनिवार, 3 अक्टूबर 2026
- स्थान: विवेकानंद युवा भारती क्रीड़ांगन (सॉल्ट लेक स्टेडियम), कोलकाता
- शुरुआत: शाम 7:30 बजे (भारतीय समय)
- लाइव प्रसारण: सोनी स्पोर्ट्स पर टीवी प्रसारण और SonyLIV पर स्ट्रीमिंग
- भारत के कोच: खालिद जमील
- ब्राज़ील के कोच: कार्लो एंसलोटी
यह मैच इतना बड़ा क्यों है?
भारतीय फुटबॉल की सच्चाई यह है कि हमारी टीम को विश्व स्तर की टीमों के सामने खेलने के मौके बहुत कम मिलते हैं। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) ने इस मैच की पुष्टि की थी और बताया था कि ब्राज़ील फीफा रैंकिंग प्रणाली शुरू होने (1992) के बाद से भारत का सबसे ऊंची रैंकिंग वाला प्रतिद्वंद्वी होगा। यानी पिछले तीन दशकों से ज़्यादा के रिकॉर्ड में भारत इतनी मज़बूत टीम से कभी नहीं भिड़ा।
इसी मैच की एक और खास बात है। भारत और ब्राज़ील पहली बार आमने-सामने आए। दोनों देशों के बीच यह पहला पुरुष सीनियर मुकाबला है, इसलिए इसकी अहमियत सिर्फ नतीजे से नहीं आंकी जा सकती। यह मैच एक पूरी पीढ़ी के फुटबॉल प्रेमियों के लिए यादगार अनुभव है।
रैंकिंग को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट में थोड़ा अंतर दिखता है। एक रिपोर्ट ने ब्राज़ील को दुनिया में पांचवें नंबर पर बताया, जबकि ESPN की लाइव कवरेज में ब्राज़ील को छठे और भारत को 138वें नंबर की टीम बताया गया। ESPN ने भी माना कि दोनों टीमों की रैंकिंग में ज़मीन-आसमान का फर्क है, लेकिन भारत के लिए यह दिखाने का मौका है कि वह बड़ी टीमों से टक्कर ले सकता है। जो भी आंकड़ा सही माना जाए, फासला बहुत बड़ा है।
ब्राज़ील का सफर: वर्ल्ड कप के बाद पहली विंडो
यह मुकाबला ब्राज़ील के लिए भी अहम पड़ाव है। भारत में खेला जाने वाला यह मैच 2026 फीफा वर्ल्ड कप के बाद ब्राज़ील की पहली अंतरराष्ट्रीय विंडो का समापन करेगा। इससे पहले टीम ने ऑस्ट्रेलिया में दोस्ताना मैच खेले थे और फिर एशिया के इस दौरे पर पहुंची।
कोच कार्लो एंसलोटी के लिए ऐसे मैच नए प्रयोगों का मंच होते हैं। वह अलग-अलग खिलाड़ियों को आज़माने और टीम का नया ढांचा तैयार करने के लिए इन मैचों का इस्तेमाल करते हैं। ESPN की कवरेज के मुताबिक एंसलोटी ने इस मैच के लिए अपेक्षाकृत मज़बूत लाइनअप चुनी, जिसमें विनीसियस और एस्तेवाओ शुरुआत से खेले।
एक बड़ी खबर चोट की रही। बार्सिलोना के विंगर राफिन्हा दाईं जांघ की चोट की वजह से 26 सदस्यीय स्क्वाड से हट गए, इसलिए ब्राज़ील उनके बिना उतरी। फिर भी ब्राज़ील के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है।
भारतीय टीम: जज़्बा, अनुभव और एक मुश्किल इम्तिहान
भारतीय टीम इस मैच में कोच खालिद जमील की अगुवाई में उतरी। भारत इस मुकाबले में पनामा के खिलाफ 1-1 की बराबरी वाले मैच के बाद पहुंचा था और उस मैच में टीम ने जुझारूपन दिखाया था। यानी आत्मविश्वास कुछ हद तक बना हुआ था, लेकिन ब्राज़ील का स्तर बिल्कुल अलग है।
टीम की कमान अनुभवी गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू के पास रही। संधू को टीम का कप्तान बनाया गया। ब्राज़ील जैसी टीम के सामने गोलकीपर की भूमिका सबसे अहम हो जाती है, और संधू का अनुभव यहां काम आ सकता था।
प्लेइंग इलेवन: कौन-कौन उतरा मैदान पर
भारत (4-2-3-1)
गोलकीपर: गुरप्रीत सिंह संधू (कप्तान)। डिफेंस: अभिषेक सिंह, अनवर अली, बिजॉय वर्गीज़ और आकाश मिश्रा। मिडफील्ड: अनिरुद्ध थापा और आपुइया। अटैकिंग लाइन: मनवीर सिंह, सहल अब्दुल समद और आशिक कुरुनियन। स्ट्राइकर: रायन विलियम्स।
ब्राज़ील (4-2-3-1)
गोलकीपर: पेड्रो मोरिस्को। डिफेंस: मातेउज़िन्हो, आर्थर डियास, मार्किन्यॉस और डगलस सैंटोस। मिडफील्ड: दानिलो और आंद्रे सैंटोस। अटैकिंग लाइन: एस्तेवाओ, गैब्रिएल बोंटेम्पो और विनीसियस जूनियर। स्ट्राइकर: पेड्रो।
ब्राज़ील की इलेवन में विनीसियस जूनियर, मार्किन्यॉस, एस्तेवाओ और पेड्रो जैसे बड़े नाम थे। भारत की तरफ से अनिरुद्ध थापा, सहल अब्दुल समद, आशिक कुरुनियन और रायन विलियम्स जैसे चेहरों पर नज़र रही, क्योंकि इन्हें ब्राज़ील के डिफेंस पर दबाव बनाना था।
कोचों ने क्या कहा?
मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में खालिद जमील ने साफ कहा कि टीम पर दबाव है, लेकिन उसे झेलना ही होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सिर्फ डिफेंसिव खेलने के बारे में नहीं सोच रहा। ज़रूरत पड़ी तो टीम रक्षात्मक रहेगी और मौका मिला तो हमला भी करेगी। जमील ने उन धारणाओं को खारिज किया कि भारत सिर्फ बचाव करेगा, और कहा कि हालात के हिसाब से रणनीति तय होगी।
दूसरी तरफ एंसलोटी ने भारत में फुटबॉल की जगह पर खुलकर बात की। उन्होंने माना कि क्रिकेट भारत की संस्कृति का हिस्सा है और फुटबॉल सबसे अहम खेल नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि लोग फुटबॉल से प्यार नहीं करते। एंसलोटी के मुताबिक क्रिकेट भारतीय संस्कृति का हिस्सा है, फिर भी फुटबॉल के लिए प्यार कम नहीं है। कोलकाता के स्टेडियम का माहौल इस बात की गवाही देता दिखा।
कोलकाता और ब्राज़ील का पुराना रिश्ता
अगर भारत में कोई शहर ब्राज़ील की मेज़बानी के लिए सबसे उपयुक्त है, तो वह कोलकाता ही है। इस शहर की फुटबॉल की जड़ें बहुत गहरी हैं, और ब्राज़ील के लिए यहां के लोगों में खास मोहब्बत रही है।
इस रिश्ते की जड़ पेले की 1977 की यात्रा से जुड़ी बताई जाती है। उस समय न्यूयॉर्क कॉस्मॉस की ओर से खेलते हुए पेले मोहन बागान के खिलाफ मैच खेलने कोलकाता आए थे। पेले की 1977 की यात्रा ने कोलकाता और ब्राज़ील के बीच के रिश्ते को और गहरा किया। इसके बाद दशकों तक इस शहर में ब्राज़ील के झंडे और पीली जर्सी आम नज़ारा बनी रही।
कोलकाता का यह रिश्ता सिर्फ पुरानी कहानी नहीं है। 2017 में अंडर-17 वर्ल्ड कप के दौरान भी इस शहर ने बड़ी भीड़ और जोरदार माहौल दिखाया था। उस टूर्नामेंट में ब्राज़ील और जर्मनी के क्वार्टर फाइनल में 66,613 दर्शक पहुंचे थे। इस बार भी शहर ने ब्राज़ील का वैसा ही स्वागत किया।
हाल ही में लियोनेल मेसी भी 2025 के GOAT टूर में इसी स्टेडियम से अपनी भारत यात्रा की शुरुआत करने आए थे। यानी बड़े सितारों के लिए कोलकाता भारत का पहला पड़ाव बनता रहा है।
सॉल्ट लेक स्टेडियम में माहौल
मैच से एक दिन पहले, 2 अक्टूबर को ब्राज़ील की टीम ने स्टेडियम में अभ्यास किया। मार्किन्यॉस और गैब्रिएल मैगालहाएस समेत ब्राज़ील के खिलाड़ियों ने शुक्रवार को ट्रेनिंग सेशन में हिस्सा लिया। शहर में “सांबा की धुन” का माहौल था। मैच को “डेविड बनाम गोलियथ” का मुकाबला कहा गया, और भारतीय कोच ने सावधानी के साथ पूरी मेहनत पर ज़ोर दिया।
लाइव अपडेट: पहले हाफ में क्या हुआ?
यहां बताई गई बातें मैच के दौरान के अपडेट पर आधारित हैं, इसलिए फुल-टाइम के बाद इन्हें अपडेट करना होगा।
शुरुआती मिनटों में ब्राज़ील ने गेंद पर कब्ज़ा बनाए रखा, जैसी उम्मीद थी। पहले हाफ के शुरुआती दौर में दोनों टीमें अटैक में ज़्यादा असरदार नहीं दिखीं, लेकिन ब्राज़ील के पास गेंद ज़्यादा रही। भारत ने भी बॉक्स की तरफ बढ़ने की कोशिश की और एक शॉट ब्राज़ीली गोलकीपर पेड्रो मोरिस्को के दाएं पोस्ट के पास से बाहर चला गया।
20वें मिनट के बाद भी तस्वीर वैसी ही रही। ब्राज़ील का दबदबा रहा, लेकिन एंसलोटी की टीम इसे गोल के मौकों में नहीं बदल पाई, जबकि भारत अपने डिफेंस पर डटा रहा। स्कोर 0-0 बना रहा। एक लाइव ट्रैकर के मुताबिक पहले हाफ में भी स्कोर 0-0 दर्ज हुआ।
भारतीय प्रशंसकों के लिए यह शुरुआत उत्साह देने वाली थी। ब्राज़ील जैसी टीम के सामने शुरुआती आधे घंटे तक गोल न खाना अपने आप में एक सकारात्मक संकेत माना जाता है। हालांकि 90 मिनट का खेल लंबा होता है, और ऐसी टीमों के सामने थकान और एकाग्रता में चूक का असर दूसरे हाफ में दिखता है।
नोट: फुल-टाइम स्कोर, गोल करने वाले खिलाड़ी और मैच रिपोर्ट आधिकारिक स्रोत से पुष्टि करके यहां जोड़ें।
टैक्टिकल नज़र: भारत की रणनीति क्या हो सकती थी?
ब्राज़ील जैसी टीम के सामने भारत के पास सीमित विकल्प होते हैं, लेकिन कुछ बातें हमेशा काम आती हैं।
1. कॉम्पैक्ट डिफेंस: भारत ने 4-2-3-1 में दो डिफेंसिव मिडफील्डर रखे, ताकि डिफेंस के सामने जगह कम मिले। ब्राज़ील के विंगर तेज़ और कलात्मक हैं, इसलिए फुल-बैक को अकेला छोड़ना महंगा पड़ सकता था।
2. सेट-पीस पर सतर्कता: बड़ी टीमें अक्सर कॉर्नर और फ्री-किक से गोल निकाल लेती हैं। जगह की कमी में भी ऊंची गेंदों पर मार्किंग सख्त रखनी पड़ती है।
3. काउंटर-अटैक का मौका: जब ब्राज़ील के फुल-बैक ऊपर चढ़ते हैं, तब पीछे खाली जगह बनती है। सहल अब्दुल समद और आशिक कुरुनियन जैसे खिलाड़ी तेज़ी से उस जगह का फायदा उठाने की क्षमता रखते हैं।
4. मनोवैज्ञानिक मजबूती: सबसे बड़ी लड़ाई दिमाग की होती है। विनीसियस जैसे खिलाड़ी के सामने पहली बार खेलने वाला डिफेंडर घबरा सकता है। इसलिए शुरुआती 15 मिनट में अनुशासन बनाए रखना अहम रहता है।
भारत के लिए क्या दांव पर था?
यह मैच नतीजे से ज़्यादा अनुभव का है। जब कमज़ोर रैंकिंग वाली टीम किसी दिग्गज से खेलती है, तो जीत की उम्मीद कम होती है, पर सीखने के मौके बहुत होते हैं।
खिलाड़ियों के लिए: विनीसियस जैसे वर्ल्ड-क्लास खिलाड़ी के सामने खेलना हर भारतीय खिलाड़ी के करियर का बड़ा अनुभव है। तेज़ी, पासिंग की रफ्तार और फैसले लेने की क्षमता, इन सबका स्तर इस मैच में दिखता है।
कोच के लिए: खालिद जमील को इस मैच से अपनी टीम की कमज़ोरियां और ताकत सीधे मापने का मौका मिला। आगे के टूर्नामेंट की तैयारी में यह अनुभव काम आएगा।
फुटबॉल की लोकप्रियता के लिए: ऐसे मैच नए दर्शकों को फुटबॉल से जोड़ते हैं। क्रिकेट-प्रधान देश में जब पूरा देश एक फुटबॉल मैच देखने बैठता है, तो खेल की ज़मीन मज़बूत होती है। इसी दौरान एशियन गेम्स में क्रिकेट में भारत की जीत की खबरें भी चल रही थीं, लेकिन फुटबॉल ने आज अपनी अलग जगह बनाई।
भविष्य की मेज़बानी के लिए: सफल आयोजन से भारत में और बड़े अंतरराष्ट्रीय मैचों की संभावना बढ़ती है।
भारत का पिछला बड़ा मुकाबला
भारत ने इससे पहले ऐसे बड़े प्रतिद्वंद्वी को कब देखा था? ऐसे पिछले मुकाबले का ज़िक्र उरुग्वे के खिलाफ 2001 के मैच से किया गया, जिसमें भारत 0-3 से हारा था। यानी दो दशक से ज़्यादा समय बाद भारत को इस स्तर की कोई टीम मिली। इसी वजह से इस मैच को लेकर दर्शकों में इतना उत्साह था।
मैच कहां और कैसे देखें?
अगर आप मैच देखना चाहते थे तो इंतज़ाम सीधे थे।
- टीवी पर: सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के चैनल
- मोबाइल/ऑनलाइन: SonyLIV ऐप और वेबसाइट
- समय: शाम 7:30 बजे से (भारतीय समयानुसार)
- लाइव टेक्स्ट अपडेट: ESPN, VAVEL और SofaScore जैसी साइट पर मिनट-दर-मिनट कमेंट्री
अगर आप मैच देखने से चूक गए हैं, तो आधिकारिक प्रसारक और संघ के सोशल मीडिया हैंडल पर हाइलाइट्स मिलने की संभावना रहती है।
ब्राज़ील के सितारे जिन पर नज़र रही
विनीसियस जूनियर: तेज़ रफ्तार, ड्रिब्लिंग और एक-एक पर डिफेंडर को मात देने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। भारतीय डिफेंस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही रहे।
मार्किन्यॉस: अनुभवी सेंटर-बैक, जो ब्राज़ील की रक्षा पंक्ति की रीढ़ हैं। उनकी मौजूदगी से टीम को संतुलन मिलता है।
एस्तेवाओ: युवा और प्रतिभाशाली अटैकर, जिन्हें भविष्य का सितारा माना जाता है।
पेड्रो: आगे की लाइन में स्ट्राइकर की भूमिका निभाने वाले खिलाड़ी, जिनका काम बॉक्स में मौके भुनाना है।
भारतीय खिलाड़ी जिन पर उम्मीदें टिकी थीं
गुरप्रीत सिंह संधू: कप्तान और गोलकीपर, जिन पर सबसे ज़्यादा बोझ था। ब्राज़ील के हर शॉट पर उनकी प्रतिक्रिया मैच की दिशा तय कर सकती थी।
अनिरुद्ध थापा: मिडफील्ड के रचनात्मक खिलाड़ी, जो गेंद संभालकर टीम को दबाव से निकालने में अहम हैं।
सहल अब्दुल समद और आशिक कुरुनियन: दोनों तेज़ी से जगह बनाने वाले खिलाड़ी हैं, जिन पर काउंटर-अटैक की ज़िम्मेदारी रही।
रायन विलियम्स: आगे की लाइन में अकेले स्ट्राइकर के तौर पर उन्हें लंबे समय तक अकेले जूझना पड़ा, जो आसान काम नहीं है।
नतीजे से बड़ा है यह दिन
भारत बनाम ब्राज़ील का यह मैच नतीजे की कसौटी पर शायद एकतरफा माना जाए, लेकिन इसकी असली कीमत मैदान के बाहर दिखती है। एक तरफ 138वीं रैंकिंग की टीम थी, दूसरी तरफ पांच बार की विश्व चैंपियन। इसके बावजूद शुरुआती दौर में भारतीय टीम ने जिस अनुशासन से खेला, वह उम्मीद जगाने वाला है।
कोलकाता ने एक बार फिर साबित किया कि भारत में फुटबॉल का जुनून ज़िंदा है। पेले की यात्रा से लेकर मेसी के दौरे और अब ब्राज़ील की मौजूदगी तक, इस शहर ने हमेशा बड़े सितारों का दिल से स्वागत किया है।
अब सवाल यह है कि इस अनुभव से भारतीय फुटबॉल क्या सीखता है। अगर खिलाड़ी इस मैच से आत्मविश्वास और कोच जमील आगे की रणनीति के लिए ठोस सबक ले सकें, तो यह रात लंबे समय तक याद रखी जाएगी। फुटबॉल प्रेमियों की नज़र अब फुल-टाइम के नतीजे और आगे की चुनौतियों पर टिकी रहेगी।
क्या आपने मैच देखा? कमेंट में बताइए कि आपकी नज़र में भारत का सबसे अच्छा खिलाड़ी कौन रहा!