इंग्लैंड सीरीज से पहले सेलेक्टर के मैसेज से नाराज हुए रोहित शर्मा(Rohit Sharma), लॉर्ड्स में 138 रन ठोककर दिया जवाब। जानें पूरी टाइमलाइन, गंभीर से रिश्ते और BCCI मीटिंग में क्या होगा फैसला।

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लॉर्ड्स वनडे से पहले सेलेक्टर के रिटायरमेंट मैसेज से नाराज थे रोहित शर्मा
भारतीय क्रिकेट में रोहित शर्मा (Rohit Sharma) का नाम पिछले कुछ महीनों से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। “हिटमैन” के नाम से मशहूर रोहित, जो कभी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रह चुके हैं, अब अपने करियर के सबसे नाजुक मोड़ पर खड़े नजर आ रहे हैं। इंग्लैंड के खिलाफ हाल ही में संपन्न हुई वनडे सीरीज के दौरान उनके संन्यास को लेकर लगातार अटकलें लगती रहीं, और अब एक नई रिपोर्ट ने इस पूरे मामले में एक दिलचस्प मोड़ ला दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, रोहित शर्मा को चयन समिति के एक सदस्य के जरिए यह संदेश दिया गया था कि सेलेक्टर्स अब उनके बिना आगे बढ़ने का मन बना चुके हैं। यह खबर सुनकर रोहित नाराज हुए थे, और चर्चा तो यहां तक चली कि उन्होंने इंग्लैंड सीरीज के बाद संन्यास लेने पर सहमति भी दे दी थी। लेकिन लॉर्ड्स के मैदान पर खेली गई एक शानदार पारी ने पूरी कहानी को नया मोड़ दे दिया। अब बीसीसीआई की आगामी बैठक में रोहित के भविष्य पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है। आइए इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
शुरुआत कहां से हुई: IPL 2026 के दौरान बनी योजना
इस पूरे विवाद की जड़ें आईपीएल 2026 के दौरान की गई चर्चाओं में मिलती हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय चयन समिति ने रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर बातचीत उसी समय शुरू कर दी थी, जब आईपीएल का सीजन चल रहा था। इन चर्चाओं में हेड कोच गौतम गंभीर भी शामिल थे। टीम प्रबंधन और सेलेक्टर्स की योजना यह थी कि 2027 में अफ्रीका (साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया) में होने वाले वनडे विश्व कप को ध्यान में रखते हुए युवा ओपनरों को मौका दिया जाए। रोहित उस समय 39 वर्ष के हो चुके थे, और टीम प्रबंधन का मानना था कि अगले विश्व कप तक एक नई पीढ़ी को तैयार करना जरूरी है।
इसी सोच के तहत, इंग्लैंड दौरे से पहले चयनकर्ताओं ने रोहित से बातचीत की थी। यह स्पष्ट कर दिया गया था कि आगे चलकर टीम युवा बल्लेबाजों को ओपनिंग की जिम्मेदारी सौंपने की दिशा में काम करेगी। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि यह संदेश सीधे चीफ सेलेक्टर अजित अगरकर की ओर से नहीं आया था, बल्कि चयन समिति के किसी अन्य सदस्य के माध्यम से रोहित तक पहुंचाया गया। यह बात रोहित को पसंद नहीं आई, और उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
रोहित की नाराजगी और संन्यास पर सहमति की खबरें
जिस तरह से यह संदेश रोहित तक पहुंचा, उसे लेकर वह असहज महसूस कर रहे थे। किसी भी सीनियर खिलाड़ी के लिए यह स्वाभाविक है कि वह अपने भविष्य से जुड़े इतने बड़े फैसले के बारे में सीधे बातचीत की उम्मीद करे, न कि किसी माध्यम से मिले संदेश के जरिए। इसी नाराजगी के बीच यह भी खबरें आईं कि रोहित शर्मा इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के बाद संन्यास लेने के लिए सहमत हो गए थे। मीडिया में यह अटकलें तेज हो गईं कि लॉर्ड्स में खेला गया तीसरा और आखिरी वनडे मैच रोहित के करियर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच हो सकता है।
इन अटकलों ने इतना जोर पकड़ लिया कि बीसीसीआई को सामने आकर सफाई देनी पड़ी। बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने साफ तौर पर कहा कि रोहित के भविष्य को लेकर मीडिया में चल रही तमाम बातें सिर्फ अटकलें हैं और इस तरह की कोई आधिकारिक चर्चा नहीं हुई है कि लॉर्ड्स रोहित का आखिरी मैच होगा। सैकिया ने यह भी कहा कि रोहित वनडे टीम के नियमित सदस्य हैं और जब तक वह टीम की योजनाओं का हिस्सा हैं, तब तक देश का प्रतिनिधित्व करते रहेंगे। लेकिन इसके बावजूद रोहित की फॉर्म और उनके भविष्य को लेकर चर्चाएं थमी नहीं।
दो मैचों में खराब फॉर्म ने बढ़ाईं मुश्किलें
इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के पहले दो मैचों में रोहित शर्मा का बल्ला खामोश रहा था। एजबेस्टन में खेले गए पहले वनडे में वह अच्छी फॉर्म में नजर नहीं आए और मिड ऑफ पर कैच थमाकर आउट हो गए थे। दूसरे मैच में भी उनका प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। इन दो नाकाम पारियों ने संन्यास की अटकलों को और हवा दे दी। आलोचकों का मानना था कि रोहित की उम्र और गिरता फॉर्म अब उनके पक्ष में नहीं है, और यही वह समय है जब टीम प्रबंधन को आगे बढ़ने का फैसला लेना चाहिए।
यह सिर्फ मौजूदा फॉर्म का मामला नहीं था। रोहित पहले भी सुर्खियों में रह चुके थे, खासकर 2024-25 के बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान, जब ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा था। उस सीरीज में रोहित सिर्फ पांच पारियों में 31 रन ही बना पाए थे, जिसमें उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर महज 10 रन का था। इसी खराब फॉर्म के चलते उन्होंने सिडनी में खेले गए पांचवें और आखिरी टेस्ट से खुद को बाहर कर लिया था।
हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे उनका अपना फैसला बताया गया, लेकिन उस समय भी यह खबरें सामने आई थीं कि हेड कोच गौतम गंभीर ने मेलबर्न टेस्ट में हार के बाद रोहित को साफ बता दिया था कि वह सिडनी टेस्ट की प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं होंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने कप्तान और कोच के बीच मतभेद की अटकलों को जन्म दिया था, हालांकि बीसीसीआई के तत्कालीन उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने इन खबरों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा था कि यह सिर्फ मीडिया में फैलाई जा रही अफवाहें हैं।
इसके कुछ ही महीनों बाद, मई में रोहित शर्मा ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक संदेश के जरिए अपने संन्यास की घोषणा की और स्पष्ट किया कि वह वनडे क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे, क्योंकि यह प्रारूप हमेशा से उनकी ताकत रहा है। उनसे पहले वह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से भी संन्यास ले चुके थे, जो उन्होंने वेस्टइंडीज में भारत को टी20 विश्व कप जिताने के तुरंत बाद लिया था।
लॉर्ड्स की वह ऐतिहासिक पारी जिसने सब कुछ बदल दिया
इन तमाम अटकलों, आलोचनाओं और दबाव के बीच रोहित शर्मा को इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे और निर्णायक वनडे मैच के लिए लॉर्ड्स के मैदान पर उतरना था। यह मुकाबला सीरीज के लिहाज से बेहद अहम था और साथ ही रोहित के करियर के लिहाज से भी। सबकी निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि क्या रोहित अपनी खराब फॉर्म से उबर पाएंगे, या फिर आलोचकों की बातें सही साबित होंगी।
लेकिन रोहित शर्मा ने इस दबाव भरे माहौल में वह कर दिखाया, जिसकी शायद कम ही लोगों ने उम्मीद की थी। उन्होंने महज 110 गेंदों में 138 रनों की तूफानी पारी खेली, जिसमें 17 चौके और 5 छक्के शामिल थे। उनका स्ट्राइक रेट 125 से ज्यादा का रहा। हालांकि भारत 388 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए 360/7 के स्कोर पर सिमट गया और मैच 27 रन से हार गया, लेकिन रोहित की यह पारी क्रिकेट जगत में लंबे समय तक याद रखी जाएगी।
इस पारी ने कई बड़े रिकॉर्ड भी अपने नाम किए:
- रोहित शर्मा लॉर्ड्स के मैदान पर वनडे शतक जड़ने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बन गए।
- वह लॉर्ड्स पर वनडे शतक बनाने वाले सबसे उम्रदराज बल्लेबाज बने, जिन्होंने सचिन तेंदुलकर का पुराना रिकॉर्ड तोड़ा।
- इंग्लैंड की धरती पर 1500 वनडे रन पूरे करने वाले वह पहले विदेशी बल्लेबाज बने। इंग्लैंड में उनके नाम अब 30 वनडे मैचों में 64 से ज्यादा की औसत से 1600 से अधिक रन दर्ज हैं, जिसमें आठ शतक और सात अर्धशतक शामिल हैं।
- इंग्लैंड की धरती पर इंग्लैंड के खिलाफ किसी भारतीय बल्लेबाज का यह सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत स्कोर है, जिसमें उन्होंने 2018 में ट्रेंट ब्रिज पर बनाए गए अपने ही 137 रनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
- उन्होंने लॉर्ड्स पर किसी विदेशी बल्लेबाज के सर्वोच्च वनडे स्कोर के मामले में महान विवियन रिचर्ड्स की बराबरी भी कर ली, जिन्होंने 1979 विश्व कप फाइनल में नाबाद 138 रन बनाए थे।
इस पारी के बाद रोहित को स्टेडियम में मौजूद दर्शकों से जोरदार सराहना मिली। उनकी इस पारी ने न सिर्फ आलोचकों को चुप कराया, बल्कि टीम प्रबंधन के भीतर भी उनके भविष्य को लेकर चल रही सोच पर असर डाला। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी पारी के चलते उनके तत्काल संन्यास की संभावना को फिलहाल टाल दिया गया।
लॉर्ड्स की बालकनी पर हंसी-मजाक: तनाव कम होने का संकेत
लॉर्ड्स में मैच से पहले एक और दिलचस्प तस्वीर सामने आई थी, जिसने संन्यास की अटकलों के बीच एक अलग ही कहानी बयां की। मैच से पहले प्रैक्टिस सेशन के दौरान रोहित शर्मा और हेड कोच गौतम गंभीर को लॉर्ड्स की बालकनी पर हंसी-मजाक करते हुए देखा गया। दोनों के बीच की यह हल्की-फुल्की बातचीत ऐसे समय पर हुई, जब मीडिया में उनके रिश्तों को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। कई लोगों ने इसे सिडनी टेस्ट विवाद के बाद कप्तान और कोच के बीच बेहतर होते रिश्तों के संकेत के तौर पर देखा।
यह याद दिलाना जरूरी है कि गंभीर और रोहित के बीच रिश्तों को लेकर पहले भी कई बार चर्चाएं हो चुकी हैं। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 2024-25 के दौरान जब रोहित को सिडनी टेस्ट से बाहर रखा गया था, तब गंभीर ने मीडिया में चल रही अटकलों पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि टीम की ईमानदार सोच ही भारतीय क्रिकेट को सुरक्षित रख सकती है। उन्होंने रोहित के फैसले का बचाव करते हुए इसे एक निस्वार्थ कदम बताया था। हालांकि उस समय पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान मार्क टेलर सहित कई क्रिकेट विशेषज्ञों ने इस आधिकारिक बयान पर सवाल उठाए थे और कहा था कि किसी भी देश का कप्तान आखिरी टेस्ट मैच से खुद बाहर होने का फैसला नहीं लेता।
इन सब पुरानी घटनाओं की पृष्ठभूमि में, लॉर्ड्स की बालकनी पर रोहित और गंभीर का हंसना-मुस्कुराना कई लोगों के लिए राहत भरा नजारा था। हालांकि भारतीय क्रिकेट में हमेशा कुछ नया होता रहता है, इसलिए किसी भी बात को अंतिम मानना जल्दबाजी होगी।
बीसीसीआई की सफाई: कोई फैसला नहीं हुआ
रोहित की फॉर्म और संन्यास की अटकलों के बीच बीसीसीआई ने बार-बार यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि खिलाड़ियों के संन्यास से जुड़े फैसले पूरी तरह से उनका निजी मामला है और बोर्ड इसमें कोई दखल नहीं देता। पहले जब रोहित और विराट कोहली ने अचानक टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लिया था, तब भी बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने साफ किया था कि यह पूरी तरह से खिलाड़ियों का अपना निर्णय था और बोर्ड की इसमें कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा था कि बोर्ड की नीति साफ है – बोर्ड किसी खिलाड़ी को यह नहीं बताता कि उसे कब या किस प्रारूप से संन्यास लेना चाहिए।
इसी तरह, जुलाई 2026 में जब लॉर्ड्स वनडे से पहले संन्यास की अटकलें जोर पकड़ रही थीं, तब बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने भी यही रुख दोहराया। उन्होंने पीटीआई से बातचीत में कहा कि रोहित के भविष्य को लेकर मीडिया में जो भी बातें चल रही हैं, वे सिर्फ अटकलें हैं, और इस तरह की कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है कि लॉर्ड्स उनका आखिरी मैच होगा। सैकिया ने यह भी जोड़ा कि रोहित अभी भी वनडे टीम के नियमित सदस्य हैं।
अब आगे क्या: बीसीसीआई की बैठक पर टिकी निगाहें
लॉर्ड्स की शानदार पारी के बाद भले ही रोहित के तत्काल संन्यास की संभावना टल गई हो, लेकिन उनके दीर्घकालिक भविष्य को लेकर सवाल अभी भी बरकरार हैं। अब बीसीसीआई एक अहम बैठक करने जा रहा है, जिसमें 2027 वनडे विश्व कप को लेकर भारत की रणनीति पर विस्तार से चर्चा होगी। यह विश्व कप साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में खेला जाएगा।
इस बैठक में सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या रोहित शर्मा को अगले विश्व कप तक टीम की योजनाओं का हिस्सा बनाए रखा जाए, या फिर युवा खिलाड़ियों को मौका देने का सिलसिला अभी से शुरू कर दिया जाए। इससे पहले भी रिपोर्ट्स आई थीं कि बीसीसीआई अधिकारी चाहते हैं कि रोहित और विराट कोहली जैसे सीनियर खिलाड़ियों को उनकी भूमिका को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जाए, ताकि उन्हें अनिश्चितता में न रहना पड़े। एक बोर्ड अधिकारी के हवाले से यह भी कहा गया था कि रोहित और कोहली जैसे कद के खिलाड़ियों को अंधेरे में नहीं रखा जाना चाहिए, और खुले संवाद की अहमियत पर जोर दिया गया था।
साथ ही, चयनकर्ता और टीम प्रबंधन 2027 विश्व कप के लिए बैकअप विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं, ताकि अगर कोई सीनियर खिलाड़ी किसी वजह से उपलब्ध न हो, तो टीम के पास तैयार विकल्प मौजूद हों। इसके अलावा, बीसीसीआई ने कथित तौर पर रोहित से यह भी कहा है कि वह सिर्फ अपनी फिटनेस और प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करें और उनके भविष्य को लेकर चल रही अटकलों पर प्रतिक्रिया देने से बचें।
फॉर्म में उतार-चढ़ाव और लय बनाए रखने की चुनौती
एक अहम मुद्दा जो चर्चा में शामिल हो सकता है, वह है सीनियर खिलाड़ियों का लंबे अंतराल के बाद फॉर्म में वापसी करना। चूंकि रोहित और कोहली जैसे खिलाड़ी अब सिर्फ एक ही प्रारूप – वनडे – नियमित रूप से खेलते हैं, इसलिए हर बार टीम में वापसी करने पर उनकी लय को लेकर चिंताएं बनी रहती हैं। हालांकि लॉर्ड्स की पारी ने इन चिंताओं को कुछ हद तक कम जरूर किया है, लेकिन लंबे समय तक निरंतरता बनाए रखना ही असली चुनौती होगी।
गौरतलब है कि लॉर्ड्स से पहले रोहित ने फरवरी 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ ही एक शतकीय पारी खेली थी, जो 487 दिनों के लंबे अंतराल के बाद उनका पहला वनडे शतक था। इससे पहले उनका आखिरी शतक 2023 वनडे विश्व कप के दौरान अफगानिस्तान के खिलाफ आया था, जब उन्होंने 131 रन बनाए थे। यह पैटर्न दिखाता है कि रोहित के करियर में लंबे सूखे के बाद बड़ी पारियां आने का सिलसिला बना रहा है, जो उनकी क्लास और क्षमता को दर्शाता है, भले ही निरंतरता को लेकर सवाल उठते रहें।
रोहित शर्मा का करियर: एक नजर
रोहित शर्मा भारतीय क्रिकेट के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में से एक हैं, जिन्होंने अपने करियर में हर प्रारूप में भारत की कप्तानी की है। उन्होंने भारत को 2024 टी20 विश्व कप जिताया और 2023 वनडे विश्व कप के फाइनल तक भी पहुंचाया, हालांकि उस खिताबी मुकाबले में भारत को हार का सामना करना पड़ा था। वनडे क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड बेहद प्रभावशाली रहा है। उनके नाम पुरुषों के वनडे क्रिकेट में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर – श्रीलंका के खिलाफ बनाए गए 264 रन – का रिकॉर्ड भी दर्ज है। वह तीन बार वनडे में दोहरा शतक लगा चुके एकमात्र बल्लेबाज हैं।
टेस्ट क्रिकेट में रोहित ने 67 मैचों में 4301 रन बनाए, जिसमें 12 शतक और 18 अर्धशतक शामिल रहे। उनका औसत 40.57 का रहा। हालांकि टेस्ट क्रिकेट के अंतिम दौर में उनकी फॉर्म में लगातार गिरावट देखी गई, खासकर न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज (तीन मैचों में 91 रन) और उसके बाद ऑस्ट्रेलिया दौरे पर, जहां भारत को पहली बार घरेलू मैदान पर 3-0 से टेस्ट सीरीज गंवानी पड़ी थी। इसी दौर के बाद उन्होंने टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया।
रोहित शर्मा का करियर पिछले कुछ महीनों में भावनाओं के कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है। एक तरफ चयन समिति के संदेश से उपजी नाराजगी और संन्यास की अटकलें रहीं, तो दूसरी तरफ लॉर्ड्स की एक यादगार पारी ने उनकी क्षमता और जज्बे को एक बार फिर साबित कर दिया। यह पारी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने यह भी दिखाया कि दबाव की परिस्थितियों में भी रोहित जैसा अनुभवी खिलाड़ी किस तरह वापसी कर सकता है।
अब सबकी निगाहें बीसीसीआई की आगामी बैठक पर टिकी हैं, जहां 2027 वनडे विश्व कप को ध्यान में रखते हुए रोहित के भविष्य पर अहम फैसला लिया जा सकता है। बोर्ड ने अभी तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया है, और सचिव देवजीत सैकिया पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि रोहित के संन्यास को लेकर कोई औपचारिक निर्णय नहीं हुआ है।
लेकिन जिस तरह से पिछले कुछ महीनों में यह पूरा घटनाक्रम सामने आया है, उससे यह साफ है कि भारतीय क्रिकेट में सीनियर खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर आने वाले समय में और भी दिलचस्प मोड़ देखने को मिल सकते हैं। फैंस और क्रिकेट प्रेमियों को अब बीसीसीआई की बैठक के नतीजों का बेसब्री से इंतजार रहेगा, जो यह तय करेगी कि क्या “हिटमैन” 2027 विश्व कप तक भारतीय टीम का हिस्सा बने रहेंगे या नहीं।
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