महेश बाबू के बेटे गौतम घट्टामनेनी(Gautam Ghattamaneni) का लेटरबॉक्सड प्रोफाइल वायरल — यश की ‘टॉक्सिक’ को 0.5 स्टार, ‘डीसी’ को 4 स्टार, वहीं ‘पोकिरी’ और ‘नेनोक्कडाइन’ को मिले पूरे 5 स्टार। पढ़ें पूरी कहानी।

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महेश बाबू के बेटे गौतम घट्टामनेनी की लेटरबॉक्सड रेटिंग्स ने मचाई हलचल
सोशल मीडिया पर कई बार ऐसी छोटी-छोटी बातें अचानक इतनी बड़ी बन जाती हैं कि पूरा फिल्म इंडस्ट्री उस पर बात करने लगती है। कुछ ऐसा ही इस हफ्ते हुआ, जब टॉलीवुड सुपरस्टार महेश बाबू के बेटे गौतम घट्टामनेनी (Gautam Ghattamaneni)का एक लेटरबॉक्सड (Letterboxd) प्रोफाइल इंटरनेट पर वायरल हो गया।
वजह थी उनकी बेबाक और बिना लाग-लपेट वाली मूवी रेटिंग्स, जिनमें सबसे ज़्यादा चर्चा में रही यश की बहुचर्चित फिल्म ‘टॉक्सिक: अ फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स’ को दी गई महज़ 0.5 स्टार की रेटिंग। यह कोई मामूली बात नहीं थी, क्योंकि जिस फिल्म को लेकर पूरे साउथ इंडस्ट्री में बड़े बजट और बड़े स्टार्स की वजह से इतनी हाइप थी, उसे एक 20 साल के लड़के ने अपनी निजी डायरी जैसी लगने वाली वेबसाइट पर लगभग सिरे से खारिज कर दिया।
आइए इस पूरी कहानी को शुरुआत से, विस्तार से और आसान भाषा में समझते हैं — कि आख़िर गौतम कौन हैं, उन्होंने किन-किन फिल्मों को कैसी रेटिंग दी, क्यों यह मामला इतना वायरल हुआ, और फैंस इस पर क्या कह रहे हैं।
आख़िर कौन हैं गौतम घट्टामनेनी?
गौतम घट्टामनेनी, महेश बाबू और नम्रता शिरोडकर के बेटे हैं। वे अभी लगभग 20 साल के हैं और अब तक ज़्यादातर लोगों की नज़र में एक स्टार-किड के तौर पर ही जाने जाते थे, जो कभी-कभार पारिवारिक कार्यक्रमों या पिता की फिल्मों की स्क्रीनिंग में दिखाई देते हैं। लेकिन अब पता चला है कि गौतम असल में एक बेहद गंभीर और भावुक सिनेमा-प्रेमी हैं। उनका लेटरबॉक्सड अकाउंट बताता है कि उन्होंने अब तक 400 से भी ज़्यादा फिल्में देखी और लॉग की हैं — और वो भी अलग-अलग भाषाओं, अलग-अलग देशों और अलग-अलग शैलियों (genres) की।
लेटरबॉक्सड, अगर आप नहीं जानते, तो एक ऐसी वेबसाइट और ऐप है जहां सिनेमाप्रेमी लोग अपनी देखी हुई फिल्मों को लॉग करते हैं, उन्हें स्टार रेटिंग देते हैं और छोटी-छोटी समीक्षाएं भी लिखते हैं। यह प्लेटफॉर्म ख़ासकर उन युवाओं में बेहद लोकप्रिय है जो सिनेमा को सिर्फ मनोरंजन के तौर पर नहीं, बल्कि एक कला के रूप में देखते और परखते हैं। जब फैंस को पता चला कि गौतम का भी ऐसा एक प्रोफाइल है, तो उन्होंने फौरन उसकी रेटिंग्स खंगालनी शुरू कर दीं — और यहीं से यह पूरा किस्सा शुरू हुआ।
‘टॉक्सिक‘ को सिर्फ आधा स्टार — फैंस हैरान
यश की ‘टॉक्सिक’ इस साल की सबसे ज़्यादा प्रतीक्षित फिल्मों में से एक मानी जा रही थी। गीतु मोहनदास द्वारा निर्देशित यह फिल्म 26 अगस्त को रिलीज़ हुई थी, और इसे भारत की अब तक की सबसे महंगी फिल्मों में गिना जा रहा है। यश इसमें डबल रोल में नज़र आए हैं, और उनके साथ कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा क़ुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसे बड़े नाम भी फिल्म का हिस्सा हैं।
रिलीज़ के तुरंत बाद गौतम ने यह फिल्म देखी और उसे केवल आधा स्टार (0.5/5) दिया। जब इसका स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर फैलने लगा, तो यह बात जंगल की आग की तरह फैल गई। एक यूज़र ने ट्विटर (X) पर लिखा भी — “गौतम घट्टामनेनी लेटरबॉक्सड.. lol” — और साथ में स्क्रीनशॉट भी शेयर किया, जिसमें उन्होंने रवि तेजा की ‘इरुमुडी’ को 3 स्टार, यश की ‘टॉक्सिक’ को आधा स्टार, और लोकेश कनगराज की फिल्म ‘डीसी’ को 4 स्टार दिए थे।
दिलचस्प बात यह है कि जब बाद में लोगों ने दोबारा उनका प्रोफाइल चेक किया, तो ‘टॉक्सिक’ की वह रेटिंग वहां से गायब मिली। इससे यह अटकलें लगने लगीं कि शायद विवाद बढ़ने के बाद गौतम ने ख़ुद ही उस रेटिंग को हटा या छिपा दिया हो। हालांकि इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्क्रीनशॉट्स तो पहले ही पूरे इंटरनेट पर सेव हो चुके थे, तो अब उसे वापस “अनदेखा” करना मुमकिन नहीं रहा।
अपने ही पिता की फिल्मों पर भी नहीं की कोई रियायत
अब सबसे दिलचस्प हिस्सा यह है — गौतम ने सिर्फ दूसरे स्टार्स की फिल्मों को नहीं आंका, बल्कि अपने पिता महेश बाबू की फिल्मों को भी उतनी ही ईमानदारी से रेट किया। और यहीं पर उनकी “निष्पक्षता” सबसे ज़्यादा उभरकर सामने आई।
गौतम ने महेश बाबू की दो फिल्मों — ‘पोकिरी’ (2006) और ‘1: नेनोक्कडाइन’ (2014) — को पूरे 5 स्टार दिए। यह दोनों फिल्में तेलुगु सिनेमा में मील का पत्थर मानी जाती हैं। पूरी जगन्नाध की निर्देशित ‘पोकिरी’ ने महेश बाबू के करियर को नई ऊंचाई दी थी, और आगे चलकर इसी फिल्म का हिंदी रीमेक सलमान खान की ‘वांटेड’ के नाम से बना, जो खुद एक बड़ी हिट रही। वहीं सुकुमार निर्देशित ‘1: नेनोक्कडाइन’ को उसकी जटिल कहानी और प्रयोगात्मक (experimental) अंदाज़ के लिए आलोचकों की काफी सराहना मिली थी — भले ही बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म उतनी बड़ी हिट न रही हो।
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने ‘अथाडु’ को साढ़े चार स्टार (4.5) भी दिए। लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी उतना ही चौंकाने वाला है — गौतम ने महेश बाबू की फिल्मों ‘निजम’ और ‘वंशी’ को महज़ 2-2 स्टार, जबकि ‘ब्रह्मोत्सवम’ को तो सिर्फ 1 स्टार ही दिया। यानी साफ है कि गौतम अपने पिता की फिल्मों को लेकर भी किसी तरह का “फैन-बॉय” रवैया नहीं अपनाते — जो फिल्म उन्हें अच्छी लगी, उसे भरपूर तारीफ़ मिली, और जो पसंद नहीं आई, उसे बेझिझक कम रेटिंग भी दे दी।
यह देखकर फैंस के बीच एक अलग ही तरह की बहस छिड़ गई। कुछ लोगों का कहना है कि गौतम की यह रेटिंग्स दरअसल दर्शकों की उस भावना से मेल खाती हैं, जो मानते हैं कि हाल के वर्षों में महेश बाबू ने अपनी पुरानी ‘पोकिरी’ और ‘दूकुडु’ जैसी फिल्मों जैसा प्रभाव नहीं छोड़ा है।
बाद में यह भी सामने आया कि विवाद बढ़ने के बाद गौतम ने अपने पिता की फिल्मों से जुड़ी रेटिंग्स को अपने प्रोफाइल पर से हटा या डिसेबल कर दिया — शायद इसलिए ताकि आगे कोई और अनावश्यक विवाद खड़ा न हो।
बाकी फिल्मों को कैसी रेटिंग दी?
गौतम का लेटरबॉक्सड सिर्फ तेलुगु या साउथ सिनेमा तक सीमित नहीं है। उनकी प्रोफाइल से पता चलता है कि वे हॉलीवुड, बॉलीवुड और तमिल सिनेमा तक बराबर दिलचस्पी रखते हैं और हर तरह की फिल्में देखते हैं।
कुछ फिल्में जिन्हें उन्होंने पूरे 5 स्टार दिए:
- शोले (क्लासिक बॉलीवुड फिल्म)
- प्रोजेक्ट हेल मैरी
- नाइव्स आउट
- जर्सी (नानी की मूल तेलुगु फिल्म)
वहीं The Odyssey और Spider-Man: Brand New Day जैसी हॉलीवुड फिल्मों को उन्होंने साढ़े चार (4.5) स्टार दिए। लोकेश कनगराज की चर्चित फिल्म ‘डीसी’ को उन्होंने 4 स्टार दिए, जबकि रवि तेजा अभिनीत ‘इरुमुडी’ को 3 स्टार मिले।
दिलचस्प बात यह भी है कि उन्होंने रणवीर सिंह की चर्चित फिल्म सीरीज़ को भी अलग-अलग नंबर दिए — ‘धुरंधर 1’ को 4 स्टार, जबकि ‘धुरंधर 2’ को महज़ 3 स्टार। यह दिखाता है कि गौतम सीक्वल्स को भी उतनी ही बारीकी से परखते हैं, बजाय इसके कि सिर्फ फ्रैंचाइज़ी के नाम पर ऊंची रेटिंग दे दें।
उनकी प्रोफाइल पर मौजूद रेटिंग डिस्ट्रीब्यूशन डेटा भी बेहद दिलचस्प है। कुल मिलाकर उन्होंने करीब 400 फिल्मों को रेट किया है, जिनमें से ज़्यादातर फिल्मों (करीब 24%) को उन्होंने 4 स्टार दिए हैं, जबकि सिर्फ एक फिल्म को आधा स्टार (0%) मिला है — वह फिल्म यही ‘टॉक्सिक’ मानी जा रही है। लगभग 10% फिल्मों को उन्होंने पूरे 5 स्टार दिए, जो दिखाता है कि वे बेहद चुनिंदा फिल्मों को ही परफेक्ट रेटिंग देते हैं।
इंटरनेट का रिएक्शन — “ब्रो इज़ ऑनेस्ट”
जैसे ही यह स्क्रीनशॉट्स वायरल हुए, सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। ज़्यादातर लोगों ने गौतम की तारीफ ही की। लोगों का कहना था कि एक स्टार किड होते हुए भी, जो आमतौर पर सोशल मीडिया पर बेहद सोच-समझकर, “सेफ” और डिप्लोमैटिक बातें करते हैं, गौतम ने बिना किसी डर के अपनी राय खुलकर रखी — चाहे वह किसी बड़े स्टार की फिल्म हो या खुद अपने पिता की।
कई यूज़र्स ने मज़ाक में यह भी लिखा कि गौतम को किसी प्रोफेशनल फिल्म क्रिटिक की तरह काम करना चाहिए, क्योंकि उनकी रेटिंग्स आम फैन-रेटिंग्स की तरह न होकर, एक सच्चे सिनेमाप्रेमी जैसी लगती हैं। “ब्रो इज़ ऑनेस्ट” (भाई ईमानदार है) जैसे कमेंट्स की भरमार देखने को मिली।
बेशक कुछ फैंस, ख़ासकर यश के समर्थक, इस रेटिंग से नाराज़ भी हुए और इसे बहुत ज़्यादा कठोर बताया। उनका तर्क था कि इतनी बड़ी और महंगी फिल्म को सिर्फ आधा स्टार देना अनुचित है, जबकि फिल्म को देखने और समझने के कई नज़रिए हो सकते हैं। लेकिन ज़्यादातर लोगों की प्रतिक्रिया गौतम के पक्ष में ही रही, क्योंकि उन्होंने साबित किया कि उनकी रेटिंग किसी स्टार की लोकप्रियता या भाषा के आधार पर तय नहीं होती — यहां तक कि खुद अपने पिता की फिल्मों को भी उन्होंने बख्शा नहीं।
‘टॉक्सिक’ के बारे में थोड़ा और
अगर बात करें फिल्म ‘टॉक्सिक’ की, तो यह एक पीरियड गैंगस्टर ड्रामा है, जिसे गीतु मोहनदास ने डायरेक्ट किया है। फिल्म का बजट लगभग 600-800 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जिससे यह भारत की अब तक की सबसे महंगी फिल्मों में शुमार हो गई है। इसे यश ने अपने प्रोडक्शन हाउस मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स और वेंकट के. नारायणा की केवीएन प्रोडक्शंस के तहत मिलकर बनाया है। फिल्म को शुरुआत में “Yash 19” के नाम से घोषित किया गया था, क्योंकि यह यश की बतौर लीड एक्टर 19वीं फिल्म है।
इतनी बड़ी हाइप और भारी-भरकम बजट के बावजूद, गौतम जैसे एक युवा और निष्पक्ष दर्शक की नज़र में फिल्म उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी — कम से कम उनकी निजी रेटिंग के हिसाब से तो यही लगता है।
आख़िर इस पूरे किस्से से क्या सीखने को मिलता है?
गौतम घट्टामनेनी का यह वायरल किस्सा असल में सिर्फ एक स्टार-किड की मूवी रेटिंग्स से कहीं ज़्यादा दिलचस्प है। यह हमें यह याद दिलाता है कि आज के डिजिटल दौर में, चाहे आप कितने भी बड़े परिवार से क्यों न हों, आपकी असली पहचान और आपकी सच्ची राय कभी भी, कहीं भी सामने आ सकती है — यहां तक कि एक साधारण-सी मूवी-ट्रैकिंग वेबसाइट के ज़रिए भी।
गौतम की रेटिंग्स ने यह भी दिखाया कि आज की युवा पीढ़ी सिनेमा को लेकर कितनी गंभीर और जागरूक है। वे सिर्फ बड़े स्टार्स या पारिवारिक रिश्तों की वजह से किसी फिल्म को अच्छा नहीं मानते, बल्कि उसकी कहानी, निर्देशन और क्राफ्ट के आधार पर उसे परखते हैं। यही वजह है कि उनकी बेबाक राय ने इतने कम समय में इतनी बड़ी चर्चा छेड़ दी — और शायद आने वाले समय में भी, जब भी कोई बड़ी फिल्म रिलीज़ होगी, फैंस सबसे पहले यही देखना चाहेंगे कि आख़िर गौतम घट्टामनेनी ने उसे कितने स्टार दिए।
फिलहाल के लिए, महेश बाबू अपनी अगली फिल्म ‘वाराणसी’ की शूटिंग में व्यस्त हैं, जिसे एस.एस. राजामौली डायरेक्ट कर रहे हैं। और उनके बेटे गौतम, अपनी बेबाक रेटिंग्स की वजह से, इंटरनेट पर छाए हुए हैं — बिना किसी फिल्मी करियर के भी, सिर्फ अपनी ईमानदार राय की वजह से।
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