वाराणसी शिक्षक एमएलसी चुनाव 2026: Breaking मतगणना शुरू, पहले चरण में सपा के लाल बिहारी यादव आगे, जानिए पूरा गणित

वाराणसी खंड शिक्षक एमएलसी चुनाव की मतगणना पहाड़िया मंडी में शुरू हो गई है। जानें प्रत्याशी, मतदान प्रतिशत, वरीयता मतों की गिनती का तरीका और पहले चरण की ताजा स्थिति।

वाराणसी शिक्षक एमएलसी चुनाव 2026
mlc result 2026

वाराणसी शिक्षक एमएलसी चुनाव 2026

mlc result 2026

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों की मतगणना मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की गिनती पहाड़िया मंडी में हो रही है। मतपत्रों की बंडलिंग का काम पूरा हो चुका है और प्रथम चक्र की गिनती शुरू हो गई है। शुरुआती रिपोर्टों में समाजवादी पार्टी के निवर्तमान एमएलसी लाल बिहारी यादव आगे बताए गए हैं।

मतगणना की शुरुआत, बंडलिंग से पहले चरण तक की प्रक्रिया

वाराणसी खंड में स्नातक और शिक्षक, दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के लिए मतदान शुक्रवार, 23 अक्टूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक हुआ था। मतगणना 27 अक्टूबर को पहाड़िया मंडी परिसर में सुबह 8 बजे से शुरू होनी थी, और रिपोर्टों के अनुसार वहां कड़ी सुरक्षा के बीच गिनती शुरू हुई। दोनों सीटों के लिए गिनती की अलग-अलग व्यवस्था की गई है।

यह चुनाव सिर्फ वाराणसी जिले तक सीमित नहीं है। यह वाराणसी खंड का चुनाव है, जिसमें आठ जिलों के मतदाता शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार दोनों सीटों को मिलाकर 3,23,447 मतदाता पंजीकृत थे।

बंडलिंग क्या होती है? आम विधानसभा या लोकसभा चुनाव की तरह इस चुनाव में EVM का इस्तेमाल नहीं होता। यहां कागज के मतपत्र होते हैं। गिनती शुरू होने से पहले सभी मतपेटियां खोली जाती हैं, अलग-अलग बूथों के मतपत्र आपस में मिलाए जाते हैं, ताकि किसी खास बूथ के मतदान का पैटर्न पता न चल सके। फिर उन्हें छांटकर बराबर संख्या के बंडलों में बांधा जाता है (आम तौर पर 25 मतपत्रों के बंडल)। इसी काम को बंडलिंग कहा जाता है। इससे गिनती आसान होती है और गड़बड़ी की गुंजाइश घटती है। सबसे पहले यह जांचा जाता है कि निकले मतपत्रों की कुल संख्या डाले गए वोटों से मेल खाती है या नहीं।

बंडलिंग पूरी होने के बाद प्रथम चक्र की गिनती होती है। इसमें हर वैध मतपत्र पर दर्ज पहली पसंद गिनी जाती है। अमान्य मतपत्र पहले ही अलग कर दिए जाते हैं। इस चरण से सिर्फ यह पता चलता है कि किस प्रत्याशी के पक्ष में कितने लोगों ने अपनी पहली पसंद दी, और यहीं से जीत के लिए जरूरी संख्या, यानी कोटा, तय होता है।

वेलिंगटन में अभिषेक शर्मा ने 38 गेंदों में 113 और वैभव सूर्यवंशी ने 19 गेंदों में 45 रन बनाए। भारत ने 6 विकेट से जीतकर T20I सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त ली। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

यही वजह है कि इस तरह के चुनाव में पहले चरण की बढ़त हमेशा अंतिम नतीजा नहीं होती। अगर कोई प्रत्याशी पहली पसंद में ही कोटा पार कर ले तो नतीजा वहीं तय हो जाता है। वरना गिनती आगे बढ़ती है, और इसमें कई घंटे या पूरा दिन लग सकता है।

चुनाव का पूरा ब्योरा: प्रत्याशी, मतदान प्रतिशत और पिछला नतीजा

प्रत्याशी: शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कुल 10 अभ्यर्थी मैदान में थे। मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के प्रमोद कुमार मिश्रा और समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव के बीच माना जा रहा है। इनके अलावा अवधेश सिंह, ऋतिका दुबे, चेत नारायण, जितेंद्र कुमार सिंह पटेल, धर्मेंद्र कुमार, फरीद अंसारी, सुधांशु शेखर और संजय प्रियदर्शी निर्दलीय अभ्यर्थी के रूप में मैदान में थे। स्नातक सीट पर 24 प्रत्याशी थे, जिनमें भाजपा से केदारनाथ सिंह, सपा से आशुतोष सिन्हा और राष्ट्रीय समाज पक्ष से राजकुमार दुबे के नाम सूची में हैं। वाराणसी खंड की दोनों सीटों के लिए कुल 34 प्रत्याशी हैं।

मतदान प्रतिशत: अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी खंड की शिक्षक सीट पर 34,900 पंजीकृत मतदाताओं में से 24,384 ने मतदान किया, यानी 69.87 प्रतिशत। पिछले चुनाव में यह आंकड़ा 68.83 प्रतिशत था, यानी लगभग 1.04 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई। स्नातक सीट पर 2,88,553 पंजीकृत मतदाताओं में से 1,18,611 ने वोट डाला, यानी 41.11 प्रतिशत, जो पिछली बार के 39.33 प्रतिशत से ज्यादा है। शिक्षक सीट पर मतदान स्नातक की तुलना में करीब 28.76 प्रतिशत अंक अधिक रहा। यह अंतर समझ में आता है, क्योंकि शिक्षक मतदाताओं का समूह छोटा और संगठित होता है और वे अपने स्कूल या संगठनों के जरिए आसानी से जुड़े रहते हैं।

पिछला चुनाव: शिक्षक सीट पर पिछली बार सपा के लाल बिहारी यादव ने प्रमोद कुमार मिश्रा को 936 मतों से हराया था। लाल बिहारी यादव को 7,766 और मिश्रा को 6,830 वोट मिले थे। उसी चुनाव में स्नातक सीट पर सपा के आशुतोष सिन्हा ने भाजपा के केदारनाथ सिंह को 3,850 मतों से हराया था। यानी पिछली बार दोनों सीटें सपा के खाते में गई थीं। इस बार सपा के सामने सीट बचाने की चुनौती है, जबकि भाजपा के सामने अपना प्रदर्शन सुधारने की। नवभारत की रिपोर्ट के मुताबिक सपा पीडीए, पुरानी पेंशन और आरक्षण जैसे मुद्दे उठा रही है।

राजनीतिक संदर्भ: यह चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हो रहा है, इसलिए दोनों दल इसे अपनी जमीनी पकड़ की परीक्षा की तरह देख रहे हैं। यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव का मतदाता वर्ग आम जनता से अलग होता है। इसलिए इसके नतीजे से पूरे प्रदेश या वाराणसी के आम मतदाताओं के रुझान के बारे में सीधे निष्कर्ष निकालना सही नहीं होता। शिक्षक संगठनों की गुटबाजी, स्थानीय छवि और शिक्षकों के मुद्दे, जैसे पुरानी पेंशन, वेतन, मानदेय और सेवा शर्तें, यहां ज्यादा असर डालते हैं।

लाल बिहारी यादव फिलहाल उत्तर प्रदेश विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष हैं। वे 22 जुलाई 2024 से इस पद पर हैं। इसलिए उनकी सीट का नतीजा सपा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष का पद आगे क्या रहेगा, यह नतीजों और परिषद की संख्या पर निर्भर करेगा, और इस बारे में कोई अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।

Hyundai ने Bayon SUV को ₹9,99,900 में लॉन्च किया है। जानें Creta के साथ 2.5 लाख यूनिट के सालाना टारगेट, कीमत, CNG वेरिएंट, एक्सपोर्ट प्लान और बाजार की चुनौतियां।

पहले चरण की स्थिति: क्या कहती हैं अब तक की रिपोर्टें

अब तक की रिपोर्टों के मुताबिक पहले चरण की गिनती में सपा के लाल बिहारी यादव आगे चल रहे हैं। यूनीवार्ता की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की शिक्षक सीट पर सपा प्रत्याशी पहले चरण की गिनती में बढ़त पर हैं।

वनइंडिया हिंदी की रिपोर्ट में पहले राउंड की गिनती में सपा के निवर्तमान एमएलसी लाल बिहारी यादव को आगे और भाजपा प्रत्याशी प्रमोद मिश्रा को दूसरे स्थान पर बताया गया है, और उसकी तालिका में बढ़त का अंतर 3,851 वोट दर्ज है। इस रिपोर्ट में भाजपा प्रत्याशी का नाम “प्रदीप मिश्रा” लिखा है, जबकि आधिकारिक सूची में नाम प्रमोद कुमार मिश्रा है, इसलिए इसे एक टंकण की चूक मानना ठीक होगा। साथ ही यह आंकड़ा एक ही रिपोर्ट में दिखा है, इसलिए इसे फिलहाल पक्का मानने की जगह आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें।

एक भ्रम से सावधान रहें: गिनती के दौरान कुछ वेबसाइटों पर एक पोस्ट भी घूम रही है, जिसमें लाल बिहारी यादव को 7,248 वोट के साथ 418 मतों से विजेता बताया गया है और प्रमोद कुमार मिश्र को 6,830 वोट। हमें यह दावा किसी दूसरे स्रोत में पुष्ट नहीं मिला। मिश्र का 6,830 का आंकड़ा 2020 के चुनाव में भी उनके वोटों के बराबर है, इसलिए यह संभव है कि पुराने आंकड़ों का घालमेल हुआ हो। सोशल मीडिया या किसी एक वेबसाइट के आंकड़े पर भरोसा करने से पहले उसे आधिकारिक घोषणा से मिलाना बेहतर है।

अन्य सीटों का हाल: राज्य की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों की गिनती एक साथ चल रही है। रिपोर्टों के अनुसार लखनऊ शिक्षक सीट पर भाजपा के उमेश द्विवेदी और सपा के सुशील कुमार के बीच मुकाबला है, जिसमें द्विवेदी आगे बताए गए हैं। लखनऊ और आगरा में गिनती को लेकर विवाद की खबरें भी हैं। आगरा में एक प्रत्याशी ने मतपत्रों की संख्या में अंतर को लेकर लिखित आपत्ति दर्ज कराई है। ऐसे विवाद निर्वाचन अधिकारियों के सामने सुलझाए जाते हैं और आगे की प्रक्रिया उसी पर निर्भर करती है। वाराणसी में ऐसे किसी विवाद की रिपोर्ट हमें अब तक नहीं मिली है।

वरीयता मत प्रणाली: कैसे तय होगी जीत, मतदाता और पाठक क्या समझें

इस चुनाव को समझने के लिए सबसे जरूरी चीज है वरीयता मत प्रणाली, जिसे आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत पद्धति कहा जाता है। इसे आसान शब्दों में समझें।

मतदाता कैसे वोट देता है: मतदाता को मतपत्र पर अपनी पहली पसंद के प्रत्याशी के सामने “1” लिखना होता है। चाहे तो वह दूसरी, तीसरी और अन्य वरीयता के लिए क्रम से “2”, “3” और आगे के अंक लिख सकता है। यह अंक मतदान केंद्र पर दिए गए बैंगनी स्केच पेन से ही लिखना होता है, किसी और पेन का इस्तेमाल करने पर वोट अमान्य हो सकता है। अंकों की जगह शब्द लिखने या एक ही अंक को दो प्रत्याशियों के सामने लिखने पर भी मतपत्र अमान्य हो जाता है। इसीलिए हर चुनाव में कुछ वोट अमान्य होते हैं।

Jio Platforms IPO का अलॉटमेंट आज 26 अक्टूबर 2026 को तय होना है। जानें KFin, BSE और NSE पर स्टेटस चेक करने का तरीका, सब्सक्रिप्शन, GMP और लिस्टिंग की तारीख।

जीत के लिए कोटा: एक सीट के चुनाव में जीतने के लिए प्रत्याशी को कुल वैध मतों का आधे से ज्यादा हिस्सा चाहिए। यानी वैध मतों का 50 प्रतिशत और एक वोट। इसे कोटा कहते हैं। उदाहरण के लिए, अगर 24,000 वैध मत हों तो करीब 12,001 वोट पाने वाला प्रत्याशी जीतेगा।

अगर कोई पहले चरण में कोटा न पार करे: तब सबसे कम पहली पसंद वाले प्रत्याशी को बाहर कर दिया जाता है। उसके मतपत्र खोलकर देखे जाते हैं कि उन पर दूसरी पसंद किसे मिली है, और वे वोट उन प्रत्याशियों के खाते में जुड़ जाते हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कोई प्रत्याशी कोटा नहीं पा लेता, या सिर्फ दो प्रत्याशी बचते हैं और ज्यादा वोट वाला विजेता घोषित होता है।

इसीलिए गिनती में कई चक्र होते हैं, और जिन सीटों पर 10 या इससे ज्यादा प्रत्याशी हों, वहां अंतिम नतीजा आने में काफी समय लग सकता है। इस सीट पर 10 प्रत्याशी हैं, इसलिए कई चरणों तक गिनती चल सकती है। पिछली बार भी गिनती 12 चरणों तक चली थी और विजेता की घोषणा आखिरी चरणों में हुई थी।

बाहर होने वाले प्रत्याशियों के वोट का असर: निर्दलीय प्रत्याशियों के वोट आखिरी नतीजे में निर्णायक हो सकते हैं। अगर पहले चरण में दो मुख्य प्रत्याशियों के बीच फासला कम हो, तो कम वोट वाले प्रत्याशियों के बाहर होने पर उनकी वरीयता किधर जाती है, यही अंतिम नतीजे का फैसला करती है। इसलिए पहले चरण की बढ़त को कितना मजबूत माना जाए, यह फासले पर निर्भर करता है। बड़ी बढ़त को पलटना मुश्किल होता है, जबकि कम फासले को वरीयता के हस्तांतरण से बदला जा सकता है।

पाठक किन बातों का ध्यान रखें:

  • पहले चरण की बढ़त को अंतिम नतीजा न मानें। यह सिर्फ पहली पसंद की गिनती है।
  • आधिकारिक घोषणा के लिए निर्वाचन आयोग, जिला प्रशासन और भरोसेमंद अखबारों पर भरोसा करें।
  • सोशल मीडिया पर चल रहे अधूरे आंकड़ों और स्क्रीनशॉट से सावधान रहें, क्योंकि गिनती के दौरान गलत या पुराने आंकड़े आसानी से फैलते हैं।
  • स्नातक सीट का नतीजा अलग है, उसकी गिनती अलग चल रही है। हमें स्नातक सीट का पक्का नतीजा अभी नहीं मिला है, इसलिए उसके बारे में कोई दावा नहीं कर रहे।

वाराणसी की शिक्षक सीट पर मुकाबला दो प्रमुख दलों के बीच है, और सपा के सामने सीट बचाने तथा भाजपा के सामने वापसी करने की चुनौती है। पहले चरण में सपा के लाल बिहारी यादव को बढ़त की खबरें हैं, लेकिन वरीयता मतों की गिनती में अभी कई चरण बाकी हो सकते हैं। असली तस्वीर तब साफ होगी जब कोटा पूरा होगा और निर्वाचन अधिकारी विजेता की औपचारिक घोषणा करेंगे। तब तक धैर्य रखें और पुष्ट जानकारी पर ही भरोसा करें।

Leave a Comment