दिल्ली में आज फिर जंतर मंतर कूच की तैयारी: Breaking 7 लेयर बैरिकेडिंग, 30 रूट पर ट्रैफिक डायवर्जन और कॉकरोच जनता पार्टी का रविवार का ऐलान

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कॉकरोच जनता पार्टी ने आज फिर जंतर मंतर कूच का ऐलान किया है। जानिए 7 लेयर बैरिकेडिंग, 30 रूट पर डायवर्जन, शनिवार को हुई हिरासत और पूरे विवाद की पूरी कहानी।

दिल्ली में आज फिर जंतर मंतर कूच की तैयारी
दिल्ली में आज फिर जंतर मंतर कूच की तैयारी

दिल्ली में आज फिर जंतर मंतर कूच की तैयारी

राजधानी दिल्ली रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को भी सख्त सुरक्षा घेरे में है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बुलाया था, और अब पार्टी ने रविवार को दोबारा कूच का ऐलान किया है। इसी वजह से जंतर-मंतर की ओर जाने वाली सड़कों पर सात लेयर की बैरिकेडिंग है और करीब 30 रूट पर ट्रैफिक डायवर्जन की चेतावनी जारी की गई है। जंतर-मंतर, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और मध्य दिल्ली आने-जाने वालों को अतिरिक्त समय लेकर चलने की सलाह दी गई है।

यह सिर्फ़ ट्रैफिक की खबर नहीं है। यह एक नई, युवा-केंद्रित पार्टी, चुनाव आयोग पर उठे सवालों, पुलिस की भारी तैनाती और विपक्षी नेताओं की हिरासत का मिला-जुला मामला है।

दिल्ली में शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान दिनभर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खींचतान चलती रही.

सुबह से ही जंतर-मंतर और आसपास के इलाक़ों में भारी बैरिकेडिंग थी. बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षा बल तैनात थे. सीजेपी ने लोगों को प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर पर आने की अपील की थी.

प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंच रहे लोगों को हिरासत में लिया जा रहा था. कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खींचातानी भी हुई.

प्रदर्शन में शामिल होने मुंबई से दिल्ली आए कॉकरोच जनता पार्टी के फ़ाउंडर अभिजीत दीपके और उनके साथी सौरव दास और आशुतोष रांका को एयरपोर्ट से ही हिरासत में ले लिया गया. वहीं, हिरासत में लिए गए कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस बस का इमरजेंसी गेट खोलकर भागने में कामयाब रहे.

दोपहर में मशहूर अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज भी जंतर-मंतर के पास पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें वहां धरने पर नहीं बैठने दिया.

कौन है कॉकरोच जनता पार्टी और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की वजह क्या है

कॉकरोच जनता पार्टी, जिसे संक्षेप में CJP कहा जाता है, खुद को आम राजनीतिक दल से अलग एक मंच के रूप में पेश करती है। विकिपीडिया के अनुसार इसकी स्थापना 16 मई 2026 को हुई थी और इसके संस्थापक अभिजीत दिपके हैं। पार्टी की वेबसाइट पर इसका टैगलाइन “Voice of the Lazy & Unemployed” यानी आलसी और बेरोज़गारों की आवाज़ रखा गया है।

पार्टी का नाम भी सत्ताधारी भाजपा के नाम पर तंज़ के रूप में “कॉकरोच जनता पार्टी” रखा गया है। दिपके का कहना है कि यह किसी राजनीतिक संगठन से जुड़ी नहीं है और उन युवाओं के लिए एक मंच है जो खुद को मुख्यधारा की राजनीति में अनदेखा महसूस करते हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इसने देश की जेन-ज़ी पीढ़ी की राजनीतिक और आर्थिक नाराज़गी को आवाज़ दी और सोशल मीडिया पर तेज़ी से लोकप्रियता पाई।

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शन की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का विरोध कर रहे हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि “कथित गड़बड़ियां” प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं का आरोप है। इन आरोपों पर चुनाव आयोग या ज्ञानेश कुमार की प्रतिक्रिया हमारे सामने मौजूद रिपोर्ट्स में दर्ज नहीं है, इसलिए इस मुद्दे के दूसरे पक्ष को भी देखना ज़रूरी है।

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दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद बड़ी भीड़ जुटने की आशंका को देखते हुए 10 अक्टूबर के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए। न्यूज़24 की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने 9 अक्टूबर को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को पत्र लिखकर दिल्ली पुलिस के साथ लगातार तालमेल बनाए रखने और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे।

खुफिया इनपुट के हवाले से बताया गया कि अनुमति न मिलने के बाद भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी दिल्ली में घुसने की कोशिश कर सकते हैं। CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने इस पर कहा था कि अनुमति देने वाली दिल्ली पुलिस कौन होती है। यानी दोनों पक्षों का रुख शुरू से ही आमने-सामने था।

शनिवार का घटनाक्रम बैरिकेडिंग, हिरासत और बड़े नेताओं की गिरफ़्त

शनिवार को दिल्ली लगभग छावनी में बदली हुई दिखी। न्यूज़24 के अनुसार निगरानी के लिए 20,000 से ज़्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए। जंतर-मंतर, जनपथ, चुनाव आयोग और दिल्ली पुलिस मुख्यालय के 1.5 किलोमीटर के दायरे को हाई-सेंसिटिव ज़ोन घोषित किया गया, जहां अकेले 6,500 से ज़्यादा जवान लगाए गए। जंतर-मंतर की ओर जाने वाली सड़कों पर सात लेयर की बैरिकेडिंग हुई और नई दिल्ली ज़िले को 20 से ज़्यादा सुरक्षा ज़ोनों में बांटा गया।

पुलिस ने 12 अस्थायी डिटेंशन सेंटर तैयार किए और 300 से ज़्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए। गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद स्पेशल सेल ने जनपथ-कर्तव्य पथ क्रॉसिंग के 4 किलोमीटर के दायरे में 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक मोबाइल इंटरनेट भी बंद रखा।

इसका असर आम जीवन पर भी पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, पटेल चौक, नई दिल्ली, आईटीओ, कश्मीरी गेट और लाजपत नगर समेत 45 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट बंद रहा। भारतीय रेलवे ने 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच 254 ट्रेनें रद्द कीं, जिनमें 75 मेल-एक्सप्रेस और 179 लोकल ट्रेनें थीं।

एहतियात के तौर पर 9 और 10 अक्टूबर को दिल्ली में खुदरा शराब की दुकानें बंद रहीं और कनॉट प्लेस के कई बाज़ार, दफ़्तर और रेस्तरां भी बंद रखने का फैसला हुआ। यहां एक बात ध्यान रखें कि अलग-अलग रिपोर्ट्स में ट्रेनों की संख्या अलग लिखी गई है, कहीं करीब 200 तो कहीं 254। सटीक आंकड़े के लिए रेलवे की आधिकारिक सूचना देखना बेहतर होगा।

मैदान पर कार्रवाई तेज़ी से हुई। आज तक के अनुसार CJP संस्थापक अभिजीत दिपके समेत पार्टी के कुछ नेताओं को दिल्ली पहुंचने के बाद विमान के अंदर से ही हिरासत में ले लिया गया। दोपहर तक की रिपोर्ट में दिपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका समेत लगभग 400 प्रदर्शनकारियों के हिरासत में होने की बात कही गई और बताया गया कि दोपहर होते-होते जंतर-मंतर पर सन्नाटा पसर गया।

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बाद की रिपोर्ट्स में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 7,000 से ज़्यादा बताई गई, और सुरक्षाकर्मियों पर हमले के आरोपों का ज़िक्र भी आया। इन आंकड़ों में बड़ा अंतर इसलिए है कि यह दिन के अलग-अलग समय की संख्या है, और अंतिम आधिकारिक आंकड़ा पुलिस की ओर से आना बाकी है।

रिपब्लिक भारत की रिपोर्ट के अनुसार हिरासत में लिए गए लोगों में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी नाम रहा। आज तक की सहयोगी खबर में महात्मा गांधी के परपोते तुषार गांधी को भी हिरासत में लिए जाने का ज़िक्र है। केजरीवाल ने बाद में प्रधानमंत्री से सवाल किया कि दिपके, रांका और सौरभ कहां हैं। एक पथराव की घटना की भी खबर आई, पर रिपोर्ट्स में इसका ब्यौरा सीमित है।

इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी बंटी रहीं। रिपब्लिक भारत के मुताबिक भाजपा ने दावा किया कि CJP के प्रोटेस्ट की हवा निकल गई, जबकि इसी रिपोर्ट में कहा गया कि जंतर-मंतर पर वैसा बवाल नहीं हो पाया जैसा पहले हुआ था, क्योंकि कई नेताओं को पहले ही हिरासत में ले लिया गया। दूसरी ओर पार्टी के अजिंक्य शिंदे ने ऐलान किया कि रविवार को फिर कूच किया जाएगा। यानी एक पक्ष इसे असफल प्रदर्शन बता रहा है और दूसरा पक्ष इसे जारी रखने पर अड़ा है।

आज 11 अक्टूबर को क्या है स्थिति 7 लेयर बैरिकेडिंग और 30 रूट पर डायवर्जन

इंडिया टीवी की लाइव कवरेज के अनुसार आज भी प्रदर्शनकारियों के जुटने की आशंका है, इसलिए जंतर-मंतर पर सात लेयर की बैरिकेडिंग की गई है और 30 रूट पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू है। वार्ता24 की रिपोर्ट में कहा गया है कि रविवार को भी जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस और मध्य दिल्ली के आसपास यातायात प्रभावित रहने की आशंका है और लोगों को घर से निकलने से पहले ट्रैफिक की स्थिति जांचने की सलाह दी गई है।

डायवर्जन वाले इलाकों के बारे में रिपोर्ट्स में कुछ नाम सामने आते हैं। इनमें धौला कुआं फ्लाईओवर, अशोका रोड और जंतर-मंतर रोड का गोल चक्कर, कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, लोधी रोड, पार्लियामेंट स्ट्रीट और संसद मार्ग के आसपास की सड़कें शामिल हैं। टाइम्स नाउ नवभारत की सूची में डॉ. दिनेश नंदिनी डालमिया चौक (डब्ल्यू-पॉइंट) और विंडसर पैलेस रोड का नाम भी है। पूरी सूची और रूट बदलने की जानकारी के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ताज़ा एडवाइजरी देखना सबसे सही रहेगा, क्योंकि स्थिति दिन भर बदल सकती है।

ब्राज़ीलियन लीग में सैंटोस और फ्लेमेंगो का मैच 2-2 से बराबर रहा। 0-2 से पीछे चल रही टीम को Neymar के दो पेनल्टी गोलों ने बचाया। पूरी जानकारी, टाइमलाइन और पॉइंट्स टेबल यहाँ पढ़ें।

यहां एक सावधानी भी ज़रूरी है। 45 मेट्रो स्टेशन बंद रहने, 254 ट्रेनें रद्द होने, इंटरनेट बंदी और शराब की दुकानें बंद रहने जैसे इंतज़ाम शनिवार, 10 अक्टूबर के लिए घोषित थे। हमारे पास मौजूद रिपोर्ट्स में यह स्पष्ट नहीं है कि आज रविवार को ये सभी पाबंदियां उसी रूप में लागू हैं या नहीं। इसलिए मेट्रो, रेल और इंटरनेट से जुड़ी आज की स्थिति के लिए DMRC, रेलवे और दिल्ली पुलिस के आधिकारिक अपडेट देख लेना ही ठीक रहेगा।

आम लोगों के लिए सलाह और आगे का सवाल

अगर आपको आज मध्य दिल्ली की ओर जाना है, तो सबसे पहले ट्रैफिक एडवाइजरी देखें। जंतर-मंतर, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और आसपास के रास्तों से बचने की कोशिश करें और अतिरिक्त समय लेकर निकलें। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या किसी ज़रूरी अपॉइंटमेंट पर पहुंचना हो तो मेट्रो और रेल की ताज़ा स्थिति पहले जांच लें। संवेदनशील इलाकों में पुलिस की चेतावनियों और बैरिकेडिंग का पालन करें और भीड़ वाली जगहों से दूर रहें। शहर के अंदर आवाजाही के लिए ऐसे वैकल्पिक रूट चुनें जो प्रभावित इलाकों से बाहर हों।

इस पूरे मामले का राजनीतिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है। एक तरफ़ प्रदर्शनकारी और विपक्षी नेता चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची पर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी तरफ़ प्रशासन का कहना है कि बिना अनुमति के प्रदर्शन कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है, इसलिए एहतियाती कदम उठाए गए।

लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की ज़िम्मेदारी, दोनों की अपनी जगह है, और इन दोनों के बीच संतुलन पर ही ऐसी घटनाओं का आकलन होता है। यह एक सामान्य टिप्पणी है और किसी रिपोर्ट का निष्कर्ष नहीं।

अब सबकी नज़र इस पर रहेगी कि आज CJP का कूच किस रूप में सामने आता है, कितने लोग जंतर-मंतर तक पहुंच पाते हैं और पुलिस का रुख कैसा रहता है। साथ ही यह भी देखना होगा कि हिरासत में लिए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ आगे क्या होता है और चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल दिल्लीवासियों के लिए सबसे ज़रूरी बात यही है कि वे आधिकारिक एडवाइजरी पर नज़र रखें और अफ़वाहों पर भरोसा न करें।

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