कल का मौसम,IMD अलर्ट 9 सितंबर 2026: दिल्ली, यूपी, बिहार, पंजाब, हरियाणा समेत 21 राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान और 75 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाओं का खतरा। जानें राज्यवार पूरी जानकारी और सुरक्षा सलाह।

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21 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, 75 की स्पीड से चलेंगी तूफानी हवाएं; जानें IMD का पूरा अपडेट
कल का मौसम,मॉनसून अपने अंतिम दौर में पहुंचने से पहले एक बार फिर पूरे जोर-शोर से सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 9 सितंबर 2026 के लिए देश के 21 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 18 से 20 घंटों के दौरान उत्तर, मध्य, पूर्व और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है, जिससे पेड़ उखड़ने, बिजली के खंभे गिरने और अस्थायी ढांचों को नुकसान पहुंचने का खतरा बना हुआ है।
बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र और एक सक्रिय ट्रफ रेखा के संयुक्त प्रभाव से यह मौसमी हलचल पैदा हुई है, जिसने देश के लगभग हर हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि किन-किन राज्यों में क्या हाल रहने वाला है और आम लोगों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
किन 21 राज्यों में जारी हुआ अलर्ट
मौसम विभाग की ताजा बुलेटिन के अनुसार जिन राज्यों में चेतावनी जारी की गई है उनमें उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, हरियाणा, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल, गुजरात, असम, ओडिशा, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र शामिल हैं। यानी उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ी राज्यों, पूर्वी भारत और दक्षिण के तटीय राज्यों तक — लगभग पूरा देश ही इस मौसमी उठापटक की जद में है।
यह लगातार कई दिनों से चल रहे मौसमी घटनाक्रम की अगली कड़ी है। बीते हफ्ते भी विभाग की ओर से 17 से 21 राज्यों में इसी तरह के अलर्ट जारी किए गए थे, जिससे साफ है कि सितंबर के दूसरे सप्ताह में भी मानसून की विदाई फिलहाल टलती दिख रही है और बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सबसे ज्यादा असर
बिहार, झारखंड, ओडिशा और पूर्वोत्तर के राज्यों में सबसे ज्यादा सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। इन इलाकों में तेज बारिश के साथ आंधी और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा बताया जा रहा है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश होने की पूरी संभावना जताई गई है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी हो सकती है।
पटना, रांची, भुवनेश्वर जैसे शहरों में प्रशासन को पहले से ही सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर झारखंड और ओडिशा के पहाड़ी व वन क्षेत्रों में भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की आशंका भी जताई जा रही है, क्योंकि लगातार बारिश से मिट्टी पहले से ही ढीली हो चुकी है।
उत्तर भारत और दिल्ली-एनसीआर का हाल
राजधानी दिल्ली में मौसम विभाग ने बूंदाबांदी का अलर्ट जारी किया है। यहां दिन में एक-दो बार हल्की-फुल्की बारिश हो सकती है, साथ ही कहीं-कहीं आंधी चलने की भी संभावना जताई गई है। दिल्ली-एनसीआर में हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रहने का अनुमान है, जो पिछले कुछ दिनों की तुलना में थोड़ी कम है, लेकिन फिर भी सतर्कता जरूरी बताई जा रही है।
हरियाणा-चंडीगढ़, पंजाब, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम विभाग ने 8 से 13 सितंबर के बीच भारी बारिश का अलर्ट जारी कर रखा है। यानी पंजाब और हरियाणा के लिए यह मौसमी दौर केवल एक दिन का नहीं, बल्कि अगले पांच-छह दिनों तक बना रह सकता है। किसानों को खासतौर पर सलाह दी गई है कि वे कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थान पर रखें और खुले खेतों में काम करते समय बिजली गिरने की चेतावनियों पर ध्यान दें।
उत्तर प्रदेश के 24 से ज्यादा जिलों में मूसलाधार बारिश के आसार जताए गए हैं, जिनमें पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्से शामिल हैं। जिन जिलों में विशेष चेतावनी जारी हुई है, वहां स्कूल प्रशासन और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने को कहा गया है।
पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का खतरा
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए यह अलर्ट खासतौर पर चिंता का विषय है। लगातार बारिश की वजह से इन इलाकों में भूस्खलन और सड़कों के धंसने की घटनाएं पहले से ही सामने आती रही हैं। मौसम विभाग ने पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है, खासकर उन मार्गों पर जहां पहले से भूस्खलन की घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं।
पहाड़ों पर तेज बारिश के साथ-साथ अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) का खतरा भी बना रहता है, जिसकी वजह से नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
मध्य भारत: मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ
मौसम विभाग के मुताबिक 9 से 11 सितंबर के दौरान पश्चिमी मध्य प्रदेश में, 8 से 9 सितंबर के दौरान छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में, और 9 से 14 सितंबर के दौरान महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में कहीं-कहीं आंधी-तूफान और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है। यानी मध्य भारत के इन इलाकों में यह मौसमी दौर अगले हफ्ते तक जारी रह सकता है।
छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल इलाकों में, जहां कच्चे मकान और अस्थायी ढांचे ज्यादा हैं, प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं। इसी तरह मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर जैसे बड़े शहरों में भी जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए नगर निगम प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है।
दक्षिण भारत में गरज-चमक के साथ बारिश
दक्षिण भारत के कई इलाकों में बादलों की गड़गड़ाहट, आकाशीय बिजली और तेज आंधी का संकट बना हुआ है। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना में मौसम विभाग ने अलग-अलग तीव्रता की बारिश का अनुमान जताया है। केरल में मानसून की सक्रियता अभी भी बनी हुई है, जिसकी वजह से तटीय इलाकों में ऊंची लहरें उठने और समुद्र में हलचल बढ़ने की आशंका जताई गई है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है, खासकर उन इलाकों में जहां तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है।
कर्नाटक के तटीय इलाकों और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। तेलंगाना में हैदराबाद समेत कई जिलों में बादल छाए रहने और छिटपुट बारिश का अनुमान जताया गया है।
हवा की रफ्तार: कहां कितना खतरा
इस बार के अलर्ट में सबसे अहम पहलू तेज हवाओं का है। मौसम विभाग के मुताबिक कुछ इलाकों में हवा की गति 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि ज्यादातर मैदानी इलाकों में यह 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे के बीच रहने का अनुमान है। बीते दिनों जारी हुए अलर्ट में भी कई जगह हवा की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की चेतावनी दी गई थी, जिससे साफ है कि मौसमी सिस्टम की तीव्रता में उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
इतनी तेज हवाओं की वजह से कच्चे मकानों, होर्डिंग्स, अस्थायी टेंट और बिजली के तारों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी रहती है। इसीलिए प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि वे तूफान के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास खड़े न हों।
बिजली गिरने से जुड़ी चेतावनी
गरज-चमक के साथ आने वाले इस मौसमी दौर में आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं हर साल सैकड़ों जानें लेती हैं, खासकर ग्रामीण और खेतिहर इलाकों में। मौसम विभाग ने साफ तौर पर आगाह किया है कि जिन इलाकों में गरज-चमक का अलर्ट है, वहां खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे या ऊंचे स्थानों पर खड़े होने से बचना चाहिए। बिजली गिरने के दौरान पक्के मकानों के अंदर रहना सबसे सुरक्षित माना जाता है।
किसानों और खेती पर असर
सितंबर का यह महीना खरीफ की फसल के लिहाज से बेहद अहम होता है। धान, मक्का और अन्य फसलें कटाई के करीब होती हैं, ऐसे में लगातार बारिश और तेज हवाएं फसल को नुकसान पहुंचा सकती हैं। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि धान की कटाई का सीजन नजदीक है। कृषि विशेषज्ञों की सामान्य सलाह यही रहती है कि किसान मौसम विभाग के पूर्वानुमान पर नजर रखते हुए कटाई और भंडारण का काम समय रहते पूरा करने की कोशिश करें।
शहरी इलाकों में जलभराव की आशंका
दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई महानगरों में हर साल मानसून के दौरान जलभराव एक बड़ी समस्या बनकर सामने आता है। भारी बारिश की स्थिति में सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा से पहले मौसम और ट्रैफिक की ताजा स्थिति जरूर जांच लें। खासकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
मौसम विभाग की सामान्य सलाह
मौसम विभाग की तरफ से आमतौर पर ऐसे अलर्ट के दौरान कुछ सामान्य सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है:
- गरज-चमक के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे और ऊंचे स्थानों पर जाने से बचें।
- कच्चे मकानों और अस्थायी ढांचों में रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।
- बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मर और ढीले तारों के पास खड़े न हों।
- नदी-नालों के किनारे और पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने से बचें, खासकर भूस्खलन प्रभावित इलाकों में।
- मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह, जहां तटीय क्षेत्रों में अलर्ट जारी हो।
- वाहन चालक तेज हवाओं और कम दृश्यता की स्थिति में सावधानी से गाड़ी चलाएं।
- मोबाइल पर मौसम विभाग के आधिकारिक अलर्ट और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों पर नजर बनाए रखें।
आगे कैसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक देश के विभिन्न हिस्सों में यह मौसमी सिलसिला अलग-अलग तीव्रता के साथ जारी रह सकता है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 11 सितंबर तक, विदर्भ में 14 सितंबर तक और उत्तर-पश्चिम भारत के कई राज्यों में 13 सितंबर तक बारिश और आंधी की गतिविधियां बनी रहने की संभावना जताई गई है। यानी आने वाले हफ्ते में भी मौसम का मिजाज पूरी तरह स्थिर होने की उम्मीद फिलहाल कम ही है।
मानसून की वापसी की प्रक्रिया आमतौर पर सितंबर के मध्य से शुरू होती है, लेकिन इस बार बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय ट्रफ रेखा की वजह से मानसून की विदाई में देरी होती दिख रही है। इसका मतलब यह है कि उत्तर भारत के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज होने की संभावना बनी हुई है।
कुल मिलाकर, 9 सितंबर को देश के 21 राज्यों में भारी बारिश, तेज आंधी और 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलने वाली हवाओं का अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सबसे ज्यादा सतर्कता की जरूरत है, वहीं पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है। दिल्ली-एनसीआर में हल्की बारिश और आंधी की संभावना है, जबकि पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अगले कई दिनों तक भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है।
ऐसे में जरूरी है कि लोग मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें, अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें। खासकर किसानों, मछुआरों और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, ताकि इस मौसमी उठापटक से होने वाले नुकसान को कम से कम किया जा सके।
(नोट: मौसम की स्थिति तेजी से बदल सकती है, इसलिए ताजा और सटीक जानकारी के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय प्रशासन के अलर्ट जरूर देखें।)