पहलगाम,मलेशिया के PM अनवर इब्राहिम ने NDTV इंटरव्यू में पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाने से इनकार किया। जानें बिलावल भुट्टो की प्रतिक्रिया और पूरी सच्चाई, पूर्ण विश्लेषण के साथ।

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पहलगाम आतंकी हमले में नहीं पाक का हाथ
भारत और पाकिस्तान के बीच पहलगाम आतंकी हमले को लेकर चली आ रही तनातनी में एक नया मोड़ उस समय आया, जब मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने एक भारतीय न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाने से इनकार कर दिया। उनके इस बयान को पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने तुरंत लपक लिया और इसे भारत की “हार” और “बेनकाब” होना करार दे दिया। आइए इस पूरे घटनाक्रम को शुरू से समझते हैं — पहलगाम हमला क्या था, भारत-पाकिस्तान के बीच इसके बाद क्या हुआ, मलेशिया के PM ने क्या कहा, बिलावल ने क्या प्रतिक्रिया दी, और इस पूरे विवाद के कई पहलू क्या हैं।
पहलगाम हमला: शुरुआत कहां से हुई
यह पूरी कहानी 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकी हमले से शुरू होती है। इस हमले में बंदूकधारियों ने पर्यटकों पर हमला किया, जिसमें 26 लोगों की जान गई — इनमें ज़्यादातर पर्यटक थे। रिपोर्टों के मुताबिक हमलावरों ने पीड़ितों को अलग-अलग करके चुन-चुनकर गोली मारी थी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। यह हाल के वर्षों में कश्मीर में नागरिकों पर हुए सबसे बड़े हमलों में से एक माना गया।
हमले के तुरंत बाद भारत सरकार ने इसके पीछे पाकिस्तान-समर्थित आतंकी नेटवर्क का हाथ होने का आरोप लगाया। भारत का कहना था कि इस हमले के तार पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों से जुड़े हैं, जबकि पाकिस्तान ने शुरू से ही इस आरोप को खारिज किया और इसे “बेबुनियाद प्रोपेगंडा” बताया।
इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की स्थिति बन गई। पाकिस्तानी सेना ने दावा किया कि इस टकराव के दौरान उसने कई भारतीय लड़ाकू विमान — जिनमें फ्रांस निर्मित राफेल जेट भी शामिल थे — और दर्जनों ड्रोन मार गिराए। करीब 87 घंटे तक चले इस सैन्य गतिरोध के बाद आखिरकार दोनों देशों के बीच संघर्षविराम (सीज़फायर) हुआ, जिसने फिलहाल के लिए स्थिति को शांत किया, लेकिन दोनों देशों के बीच अविश्वास और गहरा हो गया।
मलेशिया के PM का भारत दौरा और NDTV इंटरव्यू
अब कहानी आगे बढ़ती है सितंबर 2026 में, जब मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम नई दिल्ली में आयोजित BRICS समिट में हिस्सा लेने पहुंचे। इस दौरे के दौरान उन्होंने भारतीय न्यूज़ चैनल NDTV को एक इंटरव्यू दिया, जिसमें पत्रकार विष्णु सोम ने उनसे कई अहम सवाल पूछे।
इंटरव्यू के दौरान जब अनवर इब्राहिम से पूछा गया कि क्या वे गाज़ा में इज़रायल की कार्रवाइयों को “आतंकवाद” मानते हैं, तो उन्होंने साफ तौर पर “हां” कहा। लेकिन जब उन्हीं से यह पूछा गया कि क्या उसी तर्ज पर पाकिस्तान का भारत और पहलगाम में जो कुछ हुआ, उसे भी “आतंकवाद” कहा जाएगा, तो अनवर इब्राहिम ने सीधा जवाब देने से परहेज़ किया।
उनका जवाब था: “मैं इतना आगे नहीं जाऊंगा। मुझे पता है भारत में यह कहना बहुत संवेदनशील है।” उन्होंने आगे कहा कि इस बारे में पहले तथ्यों को स्थापित करना होगा। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी किसी भी खुफिया एजेंसी ने उन्हें यह जानकारी नहीं दी कि पाकिस्तान की सरकार या सेना इस हमले में सीधे तौर पर शामिल थी। उनके शब्दों में — “मुझे मेरे किसी भी इंटेलिजेंस तंत्र ने कभी यह बताकर वापस नहीं आया कि ‘अनवर, यह राज्य-प्रायोजित आतंकवाद है’।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे भारत द्वारा साझा की गई जानकारी को खारिज नहीं करते — बल्कि केवल यह कह रहे हैं कि जो सबूत उन्हें अब तक दिखाए गए हैं, उनके आधार पर वे स्वतंत्र रूप से यह निष्कर्ष नहीं निकाल सकते कि यह राज्य-प्रायोजित आतंकवाद था।
बिलावल भुट्टो की प्रतिक्रिया
अनवर इब्राहिम के इस बयान की क्लिप सामने आते ही पाकिस्तान में राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। PPP चेयरमैन और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम भारतीय टीवी पर, भारत में रहते हुए, “भारतीय प्रोपेगंडा का पर्दाफाश” कर रहे हैं।
बिलावल ने लिखा, “सच्चाई यह है कि भारत ने एक झूठ के आधार पर युद्ध शुरू किया और बुरी तरह हार गया। भारत अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेनकाब हो चुका है। भारत को सीज़फायर के समय किए गए अपने वादों पर खरा उतरना चाहिए और पाकिस्तान के साथ सभी विवादित मुद्दों पर बातचीत करनी चाहिए, ताकि हम मिलकर क्षेत्र में शांति, समृद्धि और स्थिरता ला सकें।”
बिलावल का यह बयान पाकिस्तान में एक बड़ी राजनीतिक जीत के तौर पर पेश किया गया। पाकिस्तानी मीडिया के एक बड़े हिस्से ने इसे “भारत की कूटनीतिक हार” और “पाकिस्तान की स्थिति की पुष्टि” के तौर पर कवर किया। पाकिस्तान के कई अन्य नेताओं और मीडिया संस्थानों ने भी इस इंटरव्यू को बड़े पैमाने पर प्रचारित किया।
संदर्भ जो न भूलें: खुद बिलावल का पुराना बयान
दिलचस्प बात यह है कि यह वही बिलावल भुट्टो हैं, जिन्होंने कुछ महीने पहले ही — जुलाई 2025 में — भारतीय पत्रकार करण थापर को दिए एक विशेष इंटरव्यू में पहलगाम हमले को स्पष्ट रूप से एक “आतंकी हमला” स्वीकार किया था। उस इंटरव्यू में बिलावल ने यह भी कहा था कि वे पीड़ितों और उनके परिवारों का दर्द समझते हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे आतंकी संगठन आज भी पाकिस्तान की धरती पर मौजूद हैं। हालांकि, उन्होंने इस हमले में पाकिस्तानी सरकार या सेना की किसी सीधी भूमिका से साफ इनकार किया था और इसे “प्रोपेगंडा” करार दिया था। उस समय उन्होंने यह दलील भी दी थी कि पाकिस्तान खुद आतंकवाद का बहुत बड़ा शिकार रहा है — उनके मुताबिक, पिछले साल ही पाकिस्तान में 200 से ज़्यादा हमलों में 1,200 से अधिक नागरिकों सहित कुल मिलाकर 92,000 से ज़्यादा लोग आतंकवाद की भेंट चढ़ चुके हैं।
यानी बिलावल का अपना रुख़ भी पूरी तरह से “पाकिस्तान बेगुनाह है” वाला नहीं रहा — बल्कि उन्होंने हमले को आतंकी वारदात तो माना, पर राज्य की संलिप्तता को नकारा। ऐसे में अनवर इब्राहिम के बयान का इस्तेमाल पूरी तरह “पाकिस्तान निर्दोष साबित” के तौर पर करना, तथ्यों की एक अधूरी तस्वीर पेश करता है।
अनवर इब्राहिम ने वास्तव में क्या कहा और क्या नहीं कहा
यह समझना बेहद ज़रूरी है कि अनवर इब्राहिम का बयान किसी स्वतंत्र जांच या ठोस निष्कर्ष पर आधारित नहीं था। उन्होंने कहीं भी यह नहीं कहा कि पाकिस्तान का इस हमले से कोई लेना-देना नहीं है, या भारत के आरोप झूठे हैं। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि:
- उनकी अपनी खुफिया एजेंसियों ने उन्हें ऐसी कोई पुख्ता जानकारी नहीं दी जिससे यह साबित हो कि पाकिस्तानी राज्य इस हमले में सीधे तौर पर शामिल था।
- इस मसले पर कोई निष्कर्ष निकालने से पहले तथ्यों का स्थापित होना ज़रूरी है।
- वे भारत द्वारा साझा की गई जानकारी को सिरे से खारिज नहीं कर रहे।
दूसरे शब्दों में, यह एक कूटनीतिक रूप से सधा हुआ बयान था, जिसमें अनवर इब्राहिम ने न तो पूरी तरह भारत का पक्ष लिया और न ही पाकिस्तान का। लेकिन चूंकि उन्होंने सीधे तौर पर “हां, यह राज्य-प्रायोजित आतंकवाद है” नहीं कहा, इसलिए पाकिस्तान के राजनीतिक हलकों ने इसे तुरंत अपने पक्ष में एक बड़ी जीत के तौर पर भुनाना शुरू कर दिया।
यह भी गौरतलब है कि यह वही अनवर इब्राहिम हैं, जिन्होंने पहलगाम हमले के तुरंत बाद, 25 अप्रैल 2025 को, इस हमले की कड़ी निंदा की थी। उस समय उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में इस हमले को “सुनियोजित और अमानवीय” करार दिया था और पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि आतंकवाद की ऐसी घटनाएं किसी भी सभ्य समाज में जगह नहीं रखतीं, और क्षेत्र में शांति व न्याय के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराने की अपील की थी। हालांकि, उस बयान में भी उन्होंने हमले के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया था।
भारत का आधिकारिक रुख़
इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह समझना ज़रूरी है कि भारत सरकार की आधिकारिक स्थिति अब भी नहीं बदली है। भारत का कहना है कि पहलगाम हमले के पीछे पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों का हाथ था, और भारत के पास इसे लेकर अपने सबूत और खुफिया जानकारी है। किसी तीसरे देश के प्रमुख का किसी टीवी इंटरव्यू में सतर्क भाषा में जवाब देना, भारत की जांच या आधिकारिक रुख़ को खारिज नहीं करता।
कूटनीतिक भाषा में अक्सर देश एक-दूसरे के आंतरिक मामलों या द्विपक्षीय विवादों पर सीधे पक्ष लेने से बचते हैं, खासकर जब वे दोनों पक्षों के साथ संबंध बनाए रखना चाहते हैं। मलेशिया के भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ कूटनीतिक और आर्थिक रिश्ते हैं, इसलिए अनवर इब्राहिम का सतर्क रुख़ अपनाना कोई असामान्य बात नहीं मानी जा सकती।
पाकिस्तानी मीडिया और राजनीति में इसका असर
पाकिस्तान में इस बयान को लेकर मीडिया में व्यापक कवरेज हुई। कई पाकिस्तानी समाचार संस्थानों ने इसे “भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हार” के तौर पर पेश किया। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी और अन्य राजनीतिक दलों ने भी इस बयान का इस्तेमाल अपनी घरेलू राजनीति में भारत विरोधी नैरेटिव को मज़बूत करने के लिए किया।
यह कोई पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान के नेताओं ने किसी अंतरराष्ट्रीय हस्ती के बयान को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश की हो। भारत-पाकिस्तान संबंधों में यह एक जानी-पहचानी रणनीति रही है — जब भी कोई तीसरा देश या वैश्विक नेता पूरी तरह किसी एक पक्ष का साथ नहीं देता, तो दोनों ही देश उस बयान की व्याख्या अपने पक्ष में करने की कोशिश करते हैं।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर असर
BRICS जैसे मंचों पर जब कोई नेता किसी संवेदनशील द्विपक्षीय मुद्दे पर सवाल का सामना करता है, तो उसका जवाब अक्सर बहुत सोच-समझकर दिया गया होता है, ताकि किसी भी पक्ष के साथ रिश्ते खराब न हों। अनवर इब्राहिम का यह इंटरव्यू भी इसी कूटनीतिक संतुलन का एक उदाहरण माना जा सकता है।
हालांकि, इस तरह के बयानों का असर सिर्फ कूटनीतिक हलकों तक सीमित नहीं रहता — सोशल मीडिया के इस दौर में ऐसे बयानों की क्लिप्स तेज़ी से वायरल होती हैं, और उन्हें संदर्भ से काटकर पेश किया जाना आम बात हो गई है। इस मामले में भी यही हुआ — अनवर इब्राहिम के सतर्क और सधे हुए जवाब को पाकिस्तान में एक स्पष्ट “समर्थन” के तौर पर प्रचारित किया गया, जबकि वास्तविकता कहीं ज़्यादा जटिल और बारीक थी।
सच्चाई कहीं बीच में है
इस पूरे प्रकरण से एक बात साफ होती है — अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बयानों की व्याख्या अक्सर उतनी सीधी नहीं होती, जितनी सुर्खियों में दिखाई जाती है। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने न तो यह कहा कि पाकिस्तान का पहलगाम हमले से कोई संबंध नहीं, न ही उन्होंने भारत के आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने बस इतना कहा कि उनके पास मौजूद जानकारी के आधार पर वे किसी निश्चित निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकते।
दूसरी ओर, बिलावल भुट्टो जैसे नेताओं ने इस सतर्क बयान को एक बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर पेश किया — जो शायद घरेलू राजनीतिक फायदे के लिहाज़ से समझ में आता है, लेकिन तथ्यात्मक रूप से यह पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। खुद बिलावल ने कुछ महीने पहले ही पहलगाम को आतंकी हमला मानते हुए पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के अस्तित्व को स्वीकार किया था।
भारत का आधिकारिक रुख़ अब भी वही है जो शुरू से रहा है — कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान-समर्थित तत्वों का हाथ था। इस मसले पर अंतिम और निष्पक्ष सच्चाई शायद किसी स्वतंत्र और विश्वसनीय जांच से ही सामने आ सकेगी, न कि किसी एक टीवी इंटरव्यू के एक हिस्से से।
पाठकों को इस तरह की खबरों को पढ़ते समय यह ज़रूर ध्यान में रखना चाहिए कि राजनीतिक बयानों को अक्सर संदर्भ से काटकर प्रचारित किया जाता है, और किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले पूरी तस्वीर को समझना ज़रूरी होता है।
यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्टों और सार्वजनिक बयानों के आधार पर तैयार किया गया है। भारत-पाकिस्तान से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर स्थिति लगातार बदल सकती है, इसलिए ताज़ा जानकारी के लिए विश्वसनीय समाचार स्रोतों को फॉलो करते रहें।