Rajesh Kumar Success Story: Rosesh Sarabhai से किसान बनने तक, ₹2 करोड़ के कर्ज़ से Saiyaara तक की वापसी

Sarabhai vs Sarabhai के Rosesh उर्फ Rajesh Kumar ने पीक करियर में एक्टिंग छोड़कर खेती अपनाई, ₹2 करोड़ के कर्ज़ में डूबे और फिर Saiyaara से शानदार वापसी की। पढ़ें पूरी कहानी।

Rajesh Kumar
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Rajesh Kumar, Rosesh Sarabhai से किसान तक का सफर शोहरत, संघर्ष और वापसी की पूरी कहानी

एक जाना-पहचाना चेहरा, एक अनजानी कहानी

अगर आपने 2000 के दशक में भारतीय टीवी देखा है, तो “Sarabhai vs Sarabhai” के Rosesh Sarabhai को भूलना मुश्किल है। अपनी अजीबोगरीब शायरी और कॉमिक टाइमिंग से घर-घर में मशहूर हुए Rajesh Kumar ने दर्शकों को हंसाया, लेकिन कम लोग जानते हैं कि पर्दे के पीछे उनकी असली ज़िंदगी किसी इमोशनल ड्रामा से कम नहीं रही। करियर के सबसे ऊंचे मुकाम पर पहुंचकर उन्होंने अचानक एक्टिंग छोड़ दी, खेती को अपनाया, और फिर कर्ज़, गरीबी और संघर्ष के दौर से गुज़रते हुए दोबारा फिल्म इंडस्ट्री में वापसी की। यह कहानी सिर्फ एक एक्टर की नहीं, बल्कि हिम्मत, गिरने और फिर उठ खड़े होने की है।

शुरुआती करियर: टीवी इंडस्ट्री का जाना-माना नाम

Rajesh Kumar का जन्म बिहार के गया ज़िले में हुआ था। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से पढ़ाई की और इसके बाद एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा। 1999 से उनका करियर शुरू हुआ और उन्होंने “Ek Mahal Ho Sapno Ka”, “Ghar Ek Mandir”, “Kkusum” जैसे कई टीवी शोज़ में काम किया।

लेकिन असली पहचान उन्हें 2004 में मिली, जब वो “Sarabhai vs Sarabhai” में Rosesh Sarabhai के किरदार में नज़र आए। उनकी शायरी, उनका अनोखा अंदाज़ और परिवार के साथ उनकी नोकझोंक ने इस शो को कल्ट क्लासिक बना दिया। इसके अलावा वो “Baa Bahoo Aur Baby” में भी नज़र आए, जहां उन्होंने नैरेटर और किरदार, दोनों की भूमिका निभाई। साल 2004 में उन्होंने Madhavi Chopra से शादी की और मुंबई में परिवार के साथ रहने लगे।

करियर के शुरुआती दो दशकों में Rajesh Kumar इंडस्ट्री के एक भरोसेमंद और लोकप्रिय चेहरे के रूप में स्थापित हो चुके थे।

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राजेश कुमार ने एक्टिंग क्यों छोड़ दी?

Sadhguru news hindi,आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु से कई बार मिलने के बाद राजेश की खेती में दिलचस्पी बढ़ी। हालाँकि शुरू में उन्हें सद्गुरु की बातें पसंद नहीं आईं, लेकिन आखिरकार वे उनके फॉलोवर बन गए और ईशा फाउंडेशन के लिए कई इवेंट होस्ट किए।

वे सद्गुरु के रैली फॉर रिवर्स कैंपेन से भी जुड़े थे, जहाँ उन्होंने इवेंट होस्ट करने में मदद की।

सद्गुरु का एक खास मैसेज उनके साथ रहा और आखिरकार खेती करने के उनके फैसले पर असर डाला।

उन्होंने बताया, “रैली के दौरान सद्गुरु एक बात कहते रहे, ‘मुझे अपने राज्य से 100 युवा दो और मैं खेती की सूरत बदल दूँगा। लेकिन तीन साल तक, मुझसे मत पूछना, मेरा क्या?’ तो जब मैं अपने गाँव पहुँचा, तो मैंने अचानक अपने लिए वह लाइन पूरी कर ली, कि जिस दिन तुम अपने बारे में सोचना बंद कर दोगे, उसी दिन तुम दूसरों के बारे में सोचना शुरू कर दोगे और जिस दिन तुम दूसरों के बारे में सोचना शुरू करोगे, दूसरे तुम्हारे बारे में सोचना शुरू कर देंगे।”

करियर के पीक पर बड़ा फैसला

यहीं से कहानी में एक अनोखा मोड़ आता है। जब बाकी एक्टर्स अपने करियर को और आगे बढ़ाने में जुटे होते हैं, Rajesh Kumar ने कुछ अलग सोचा। साल 2019 में, करीब 41-42 साल की उम्र में, अपने करियर के सबसे अच्छे दौर में उन्होंने एक्टिंग से सबबेटिकल लेने का फैसला किया और पूरी तरह खेती की तरफ रुख कर लिया।

उनका मकसद सिर्फ शौक पूरा करना नहीं था। उन्होंने खुद बताया कि वो अगली पीढ़ी के लिए कुछ सार्थक करना चाहते थे। भारत में यह एक आम सोच है कि माता-पिता अपने बच्चों को डॉक्टर या इंजीनियर बनते देखना चाहते हैं, लेकिन कोई नहीं कहता कि उनका बच्चा किसान बने। Rajesh इस सोच को बदलना चाहते थे। उनका मानना था कि खेती को गरीबी और मजबूरी से जोड़कर देखा जाता है, जबकि असल में यह एक गौरवशाली और ज़रूरी पेशा है — आखिर हर इंसान को खाने के लिए अनाज चाहिए ही होता है।

उन्होंने पालघर में 20 एकड़ ज़मीन किराए पर ली और एक “फैमिली फार्मर” बनने के आइडिया पर काम शुरू किया। उन्होंने इंडस्ट्री के कई साथियों से भी संपर्क किया और उन्हें अपने इस स्टार्टअप कॉन्सेप्ट के बारे में बताया। कुछ लोगों ने शुरुआती दिलचस्पी दिखाई, लेकिन ज़्यादातर लोगों ने इस आइडिया को नज़रअंदाज़ कर दिया।

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जब सपना बुरे सपने में बदल गया

Rajesh Kumar ने पूरे जोश के साथ खेती शुरू की। उन्होंने अपने खेत में करीब 15,000 पौधे लगाए। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। एक भयंकर बाढ़ ने उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया — सारे पौधे तबाह हो गए। यह उनके लिए बहुत बड़ा झटका था, क्योंकि यह सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं बल्कि महीनों की मेहनत और उम्मीदों का टूटना था।

बाढ़ से उबरने की कोशिश ही चल रही थी कि तभी कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन आ गया। तीन महीने तक वो अपने खेत की देखभाल तक नहीं कर पाए। एक के बाद एक आती इन मुश्किलों ने उनके स्टार्टअप को पूरी तरह बर्बाद कर दिया।

नतीजा यह हुआ कि Rajesh Kumar धीरे-धीरे कर्ज़ के जाल में फंसते चले गए। EMI की किश्तें बाउंस होने लगीं, क्रेडिट कार्ड का कर्ज़ बढ़ता गया, और उनकी माली हालत बद से बदतर होती गई।

कर्ज़, ज़लालत और सिर्फ ₹2,500

Rajesh Kumar ने बाद में एक इंटरव्यू में बहुत ईमानदारी से अपने सबसे बुरे दौर के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि उनके बैंक अकाउंट में सिर्फ ₹2,500 बचे थे, जबकि उन पर करीब ₹2 करोड़ (20 मिलियन रुपये) का कर्ज़ था। न कोई आमदनी थी, न कोई बचत — हालात इतने खराब हो गए थे कि वो अपनी रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए भी पैसे नहीं जुटा पा रहे थे।

सबसे तकलीफदेह पहलू यह था कि क्रेडिट कार्ड रिकवरी एजेंट्स उन्हें बार-बार परेशान करते थे। वो सीधे उनके घर आने की बजाय बिल्डिंग के वॉचमैन केबिन में फोन करके उन्हें बदनाम करने की कोशिश करते और गाली-गलौज करते थे — सिर्फ इसलिए क्योंकि वो समय पर पैसे नहीं चुका पा रहे थे। यह उनके लिए बेहद अपमानजनक अनुभव था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

आर्थिक तंगी इतनी बढ़ गई कि उन्होंने अपनी गाड़ी तक बेच दी। इसके बावजूद, उन्होंने खुद को डिप्रेशन में जाने नहीं दिया — यह बात उन्होंने खुद कई इंटरव्यूज़ में दोहराई है।

बेटे की क्लास से लेकर स्कूल के बाहर सब्ज़ी बेचने तक

इस पूरे संघर्ष की सबसे भावुक कर देने वाली कहानी उनके बेटे से जुड़ी है। जब उनका स्टार्टअप पूरी तरह फेल हो गया, तो Rajesh Kumar ने अपने बेटे के स्कूल के बाहर सब्ज़ियां बेचना शुरू कर दिया। उस समय उनका बेटा तीसरी क्लास में पढ़ता था।

लोगों की नज़रों में यह अजीब और शर्मनाक लग सकता था — एक मशहूर टीवी एक्टर स्कूल के बाहर सब्ज़ी बेच रहा है। कई लोगों ने सोचा कि शायद उनका दिमागी संतुलन बिगड़ गया है। लेकिन जब उनके बेटे ने अपने पिता को स्कूल के बाहर सब्ज़ी बेचते देखा, तो उसने अपने टीचर्स और दोस्तों से कहा कि वो उसके पापा से सब्ज़ियां खरीद लें। बच्चे की इस मासूम कोशिश ने पूरी क्लास को हरकत में ला दिया, और उसके सहपाठी अलग-अलग क्लासरूम में जाकर लोगों को यह बात बताने लगे।

Rajesh Kumar के लिए यह पल बेहद इमोशनल था। उन्होंने बाद में बताया कि उन्होंने धनिया जैसी छोटी-छोटी चीज़ें उगाने में लगने वाली मेहनत को भी समझा, जिसे लोग अक्सर मुफ्त में मांग लेते हैं। उनका मकसद था कि लोग किसानों के काम और उसकी अहमियत को बेहतर समझें।

वापसी: एक्टिंग की दुनिया में दोबारा कदम

आखिरकार, बढ़ते कर्ज़ और लगातार आर्थिक दबाव के चलते Rajesh Kumar ने खेत छोड़कर वापस एक्टिंग की दुनिया में लौटने का फैसला किया। उन्हें “Binny And Family” में एक भूमिका मिली, जिसकी शूटिंग यूके में हुई थी।

लेकिन वापसी भी आसान नहीं थी। उस दौर में भी उनकी माली हालत इतनी खराब थी कि 24 दिनों की शूटिंग के दौरान वो दो बार घर गए, लेकिन अपने बच्चों के लिए चॉकलेट तक नहीं खरीद पाए। यह बात उन्होंने बहुत भावुक होकर शेयर की थी कि किस तरह पैसों की तंगी ने उन्हें अपने बच्चों के लिए एक छोटी सी खुशी देने से भी रोक दिया।

इसके बाद धीरे-धीरे उनका करियर फिर से पटरी पर लौटने लगा। उन्होंने “Kota Factory 2” में काम किया, और Shahid Kapoor तथा Nawazuddin Siddiqui जैसे बड़े कलाकारों के साथ प्रोजेक्ट्स में नज़र आए।

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Saiyaara में निभाई भावुक भूमिका

Rajesh Kumar की सबसे बड़ी वापसी 2025 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म “Saiyaara” से हुई, जिसे Mohit Suri ने डायरेक्ट किया और जिसमें Ahaan Panday और Aneet Padda जैसे नए कलाकार लीड रोल में थे। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर तूफानी कमाई करते हुए दुनियाभर में करीब ₹400 करोड़ (4 बिलियन रुपये) के आंकड़े को पार कर गई।

इस फिल्म में Rajesh Kumar ने Vaani Batra (Aneet Padda) के पिता का किरदार निभाया — एक युवा पत्रकार जिसे शुरुआती उम्र में अल्ज़ाइमर बीमारी हो जाती है। इंटरेस्टिंग बात यह है कि यह किरदार उनकी निजी ज़िंदगी से बेहद मिलता-जुलता था। Rajesh ने खुद बताया कि उनकी अपनी मां भी उसी बीमारी से जूझ रही हैं, और उन्होंने इस किरदार को निभाने के लिए एक्टिंग नहीं की — बल्कि उसे महसूस किया। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता, जो अपनी तकलीफ के बारे में खुलकर बात नहीं करते, उनसे इस किरदार की खामोशी को समझने में मदद मिली।

इस भूमिका को दर्शकों और आलोचकों, दोनों से जबरदस्त सराहना मिली, और यह उनके करियर की एक नई शुरुआत साबित हुई।

इस कहानी से क्या सीख मिलती है?

Rajesh Kumar की यह कहानी हमें कई अहम सबक सिखाती है:

1. जोखिम उठाने का साहस: करियर के पीक पर सब कुछ छोड़कर एक नई राह चुनना आसान नहीं होता। यह दिखाता है कि सफलता के बीच भी कुछ नया और सार्थक करने की हिम्मत रखना कितना बड़ा कदम है।

2. असफलता से न घबराना: बाढ़, कोविड लॉकडाउन, भारी कर्ज़ और सामाजिक शर्मिंदगी — इतना कुछ झेलने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।

3. परिवार का साथ: उनके बेटे की मासूम कोशिश यह दिखाती है कि मुश्किल वक्त में परिवार का साथ किसी भी इंसान को आगे बढ़ने की ताकत देता है।

4. वापसी की ताकत: ज़िंदगी में गिरना बुरी बात नहीं, असली बात यह है कि आप दोबारा कैसे उठते हैं। Rajesh Kumar ने यह साबित कर दिया कि सही समय पर सही फैसला लेकर कोई भी अपनी ज़िंदगी को दोबारा पटरी पर ला सकता है।

5. मेहनत की कद्र: उनकी यह कोशिश कि लोग खेती और किसानों के काम की अहमियत समझें, आज के दौर में बेहद ज़रूरी संदेश है, जब खेती को अक्सर कम आंका जाता है।

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