Pasindu sooriyabandara गॉल टेस्ट में दिनेश चंडीमल की गर्दन-कंधे में चोट के बाद पसिंदु सूर्यबंडारा बने कंकशन सब्स्टिट्यूट। जानें पूरी कहानी, दोनों टीमों की Playing XI और मैच का हाल।

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एक ऐतिहासिक टेस्ट मैच में नाटकीय मोड़
क्रिकेट का खेल कब किस करवट बैठ जाए, कोई नहीं जानता। गॉल इंटरनेशनल स्टेडियम में खेली जा रही भारत और श्रीलंका के बीच पहली टेस्ट सीरीज़ का पहला मुकाबला वैसे भी ऐतिहासिक था – यह गॉल मैदान का 50वां टेस्ट मैच था और भारत का इस मैदान पर नौ साल बाद वापसी था। लेकिन चौथे दिन की सुबह जो कुछ हुआ, उसने इस मैच को और भी यादगार बना दिया। श्रीलंका के अनुभवी बल्लेबाज दिनेश चंडीमल एक शानदार फील्डिंग प्रयास के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए,
और उनकी जगह मैदान पर उतरे 26 वर्षीय पासिंडु सूर्यबंडारा, जिन्होंने कंकशन सब्स्टीट्यूट के तौर पर अपना टेस्ट डेब्यू किया। यह सिर्फ एक साधारण खिलाड़ी बदलाव नहीं था – यह क्रिकेट इतिहास के उन दुर्लभ पलों में से एक था, जब कोई खिलाड़ी विकल्प के रूप में मैदान पर उतरकर अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करता है।
इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे कि आखिर चंडीमल के साथ क्या हुआ, सूर्यबंडारा कौन हैं, और साथ ही दोनों टीमों की पूरी प्लेइंग XI यानी पूर्ण फॉर्मेशन पर भी नज़र डालेंगे।
दिनेश चंडीमल के साथ हादसा कैसे हुआ
Pasindu Sooriyabandara,चौथे दिन के पहले सत्र में, भारत की दूसरी पारी के चौथे ओवर में एक ऐसा वाकया हुआ जिसने पूरे स्टेडियम की सांसें थाम दीं। केएल राहुल ने एक शॉट खेला और गेंद डीप मिडविकेट से डीप स्क्वायर लेग की दिशा में तेज़ी से जा रही थी। चंडीमल ने पूरी ताकत लगाकर उस गेंद को रोकने के लिए क्षैत्रिज (horizontal) डाइव लगाई। इस कोशिश में उन्होंने दो रन बचा भी लिए, लेकिन गिरते समय उनका शरीर एक अजीब तरीके से मुड़ गया – वे कंधे के बल ज़मीन पर गिरे और उनका पूरा शरीर पैरों के ऊपर से पलटी खा गया, जिससे उनकी गर्दन और कंधा बुरी तरह मुड़ गए।
गिरने के तुरंत बाद चंडीमल बाउंड्री के दूसरी ओर गिर पड़े और उन्हें काफी तकलीफ में देखा गया। उनकी टीम के साथी खिलाड़ी, फिजियोथेरेपिस्ट और डॉक्टर तुरंत मैदान पर पहुंचे और उनकी मदद की। यह देखकर साफ था कि चोट मामूली नहीं थी।
चंडीमल को एहतियात के तौर पर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका स्कैन किया गया। राहत की बात यह रही कि स्कैन रिपोर्ट में कोई आंतरिक चोट (internal injury) नहीं पाई गई और रिपोर्ट पूरी तरह स्पष्ट (clear) आई। हालांकि, इसके बाद टीम के डॉक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट ने मैदान पर ही उनका कंकशन असेसमेंट किया। इस जांच के बाद उन्हें मैच के बाकी हिस्से के लिए बाहर कर दिया गया।
श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड (SLC) ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि मैच रेफरी ने कंकशन रिप्लेसमेंट को मंज़ूरी दे दी है और पासिंडु सूर्यबंडारा अब बाकी मैच में चंडीमल की जगह बल्लेबाज़ी, गेंदबाज़ी और फील्डिंग करेंगे।
कंकशन सब्स्टीट्यूट नियम को समझें
क्रिकेट में कंकशन सब्स्टीट्यूट का नियम अपेक्षाकृत नया है, जिसे खिलाड़ियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लाया गया था। जब कोई खिलाड़ी सिर या गर्दन पर चोट के कारण कंकशन (मस्तिष्काघात) का शिकार होता है, तो टीम को उसकी जगह एक “जैसे को तैसा” (like-for-like) खिलाड़ी लाने की अनुमति दी जाती है। यह फैसला मैच रेफरी की मंज़ूरी के बाद ही लागू होता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई टीम इस नियम का गलत फायदा न उठा सके।
यह नियम पिछले कुछ वर्षों में कई बार विवादों में भी रहा है। भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया टी20 सीरीज़ में रवींद्र जडेजा की जगह युजवेंद्र चहल को कंकशन सब्स्टीट्यूट के तौर पर लाया गया था, जिस पर काफी बहस हुई थी क्योंकि चहल एक अलग तरह का गेंदबाज़ था। लेकिन आम तौर पर यह नियम खिलाड़ियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए बनाया गया एक सराहनीय कदम माना जाता है।
पासिंडु सूर्यबंडारा: इतिहास रचने वाला नाम
अब बात करते हैं उस युवा खिलाड़ी की, जिसने इस दुखद घटना के बीच अपने करियर का सबसे यादगार पल जिया। पासिंडु सूर्यबंडारा, जिनका पूरा नाम डॉन पासिंडु संजुला सूर्यबंडारा है, 19 अक्टूबर 1999 को कोलंबो में जन्मे एक दायें हाथ के बल्लेबाज़ हैं। 26 साल के इस खिलाड़ी ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है।
उनके आंकड़े देखें तो वे प्रथम श्रेणी क्रिकेट (first-class cricket) में 68 मैचों में 54.36 की औसत से 4,893 रन बना चुके हैं, जिसमें 14 शतक और 23 अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 242 रन है। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि यह कोई साधारण खिलाड़ी नहीं, बल्कि घरेलू क्रिकेट का एक स्थापित नाम है।
सूर्यबंडारा हाल ही में भारत के खिलाफ कोलंबो में हुए तीन दिवसीय अभ्यास मैच में श्रीलंका क्रिकेट इलेवन का हिस्सा भी थे, जहां उन्होंने दोनों पारियों में क्रमशः 35 और 4 रन बनाए थे। पहली पारी में उन्हें रवींद्र जडेजा ने आउट किया था, जबकि दूसरी पारी में प्रसिद्ध कृष्णा ने उनका विकेट लिया था।
गॉल टेस्ट में सूर्यबंडारा को दूसरी पारी में तीसरे नंबर पर बल्लेबाज़ी के लिए भेजा गया, यानी उन्हें सीधे टीम की सबसे अहम भूमिकाओं में से एक निभानी पड़ी।
टेस्ट इतिहास में डेब्यू के तौर पर सब्स्टीट्यूट बनने वाले खिलाड़ी
सबसे दिलचस्प बात यह है कि सूर्यबंडारा टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में महज़ पांचवें ऐसे खिलाड़ी बने, जिन्होंने अपना डेब्यू सब्स्टीट्यूट के तौर पर किया। यह सूची इस प्रकार है:
- ब्रायन मुदज़िंगनयामा (ज़िम्बाब्वे) – श्रीलंका के खिलाफ, हरारे, 2020 (कंकशन)
- खाया ज़ोंडो (साउथ अफ्रीका) – बांग्लादेश के खिलाफ, ग्केबेर्हा, 2022 (कोविड सब्स्टीट्यूट)
- मैट पार्किंसन (इंग्लैंड) – न्यूज़ीलैंड के खिलाफ, लॉर्ड्स, 2022 (कंकशन)
- बहीर शाह (अफगानिस्तान) – बांग्लादेश के खिलाफ, मीरपुर, 2023 (कंकशन)
- पासिंडु सूर्यबंडारा (श्रीलंका) – भारत के खिलाफ, गॉल, 2026 (कंकशन)
खास बात यह है कि सूर्यबंडारा श्रीलंका के पहले ऐसे खिलाड़ी बने, जिन्होंने इस तरह से अपना टेस्ट डेब्यू किया। यह उनके करियर की एक अनोखी शुरुआत है – एक ऐसा पल, जिसकी कल्पना शायद उन्होंने खुद भी नहीं की होगी।
मैच की मौजूदा स्थिति
चंडीमल की चोट के वक्त तक मैच पूरी तरह से भारत के पक्ष में झुका हुआ था। भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी का फैसला किया और पहली पारी में 462 रन बनाए। जवाब में श्रीलंका की टीम 284 रन पर सिमट गई, जिससे भारत को 178 रन की बढ़त मिली। भारत ने अपनी दूसरी पारी में 193 रन बनाए, जिससे श्रीलंका के सामने जीत के लिए 372 रनों का लक्ष्य रखा गया – एक ऐसा लक्ष्य, जो व्यावहारिक रूप से लगभग असंभव माना जा रहा था।
चौथे दिन के अंत तक श्रीलंका ने चार विकेट गंवाकर 84 रन बना लिए थे, यानी टीम को अभी भी 288 रनों की दरकार थी और सिर्फ एक दिन का खेल बाकी था। ज़ाहिर है, भारत मैच में मज़बूत स्थिति में है, लेकिन क्रिकेट में आखिरी गेंद तक कुछ भी कहना मुश्किल होता है।
भारत की पूरी प्लेइंग XI (फॉर्मेशन)
आइए अब नज़र डालते हैं इस ऐतिहासिक टेस्ट मैच में उतरी भारतीय टीम के पूरे फॉर्मेशन पर:
- यशस्वी जायसवाल – सलामी बल्लेबाज़, बाएं हाथ के इस खिलाड़ी ने हाल के वर्षों में भारत के लिए टॉप ऑर्डर में शानदार निरंतरता दिखाई है।
- केएल राहुल – उप-कप्तान, अनुभवी सलामी/शीर्ष क्रम बल्लेबाज़।
- देवदत्त पडिक्कल – चोटिल साई सुदर्शन की जगह टीम में शामिल हुए, तीसरे नंबर पर बल्लेबाज़ी।
- शुभमन गिल (कप्तान) – टीम के कप्तान और मुख्य बल्लेबाज़, इस सीरीज़ में उनकी कप्तानी की अग्निपरीक्षा है।
- ऋषभ पंत (विकेटकीपर) – आक्रामक अंदाज़ में बल्लेबाज़ी करने वाले विकेटकीपर-बल्लेबाज़।
- ध्रुव जुरेल – विशेषज्ञ बल्लेबाज़ के तौर पर टीम में शामिल।
- रवींद्र जडेजा – अनुभवी ऑलराउंडर, स्पिन आक्रमण की अगुवाई करने की ज़िम्मेदारी उन्हीं पर है क्योंकि आर अश्विन संन्यास ले चुके हैं।
- मानव सुथार – बाएं हाथ के स्पिनर।
- कुलदीप यादव – कलाई के स्पिनर, लंबे समय बाद टीम संयोजन का हिस्सा बने।
- मोहम्मद सिराज – तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण की अगुवाई।
- प्रसिद्ध कृष्णा – जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी में दूसरे प्रमुख तेज़ गेंदबाज़।
गौरतलब है कि टीम को इस सीरीज़ से पहले जसप्रीत बुमराह की चोट के कारण बड़ा झटका लगा था, जिनकी जगह औकिब नबी को स्क्वाड में शामिल किया गया। वॉशिंगटन सुंदर भी पहले टेस्ट के लिए उपलब्ध नहीं थे।
श्रीलंका की पूरी प्लेइंग XI (फॉर्मेशन, कंकशन बदलाव के बाद)
अब बात करते हैं मेज़बान श्रीलंका टीम की, जिसमें चंडीमल की जगह अब सूर्यबंडारा शामिल हो चुके हैं:
- लाहिरू उडारा – सलामी बल्लेबाज़।
- निशान मदुष्का – सलामी बल्लेबाज़।
- पासिंडु सूर्यबंडारा – (चंडीमल के स्थान पर कंकशन सब्स्टीट्यूट, टेस्ट डेब्यू) – तीसरे नंबर पर बल्लेबाज़ी।
- कामिंडू मेंडिस – उप-कप्तान, मध्य क्रम के अहम बल्लेबाज़।
- धनंजया डी सिल्वा (कप्तान) – टीम के कप्तान, अनुभवी ऑलराउंडर।
- सोनल दिनुशा – बल्लेबाज़/ऑलराउंडर।
- निरोशन डिकवेला (विकेटकीपर) – 2023 के बाद टेस्ट टीम में वापसी करने वाले विकेटकीपर, जो चयन का एक बड़ा टॉकिंग पॉइंट रहे।
- केशरा नुवांथा – गेंदबाज़/ऑलराउंडर।
- प्रभात जयसूर्या – बाएं हाथ के स्पिनर, टीम के प्रमुख स्पिन गेंदबाज़।
- लाहिरू कुमारा – तेज़ गेंदबाज़।
- असिथा फर्नांडो – तेज़ गेंदबाज़।
(मूल प्लेइंग XI में दिनेश चंडीमल शामिल थे, जो चौथे दिन चोट के कारण बाहर हो गए और उनकी जगह अब सूर्यबंडारा टीम में शामिल हैं।)
यह भी दिलचस्प है कि श्रीलंका ने इस मैच के लिए 16 सदस्यीय टीम की घोषणा की थी, जिसमें विश्वा फर्नांडो, दिलशान मदुशंका, रमेश मेंडिस और मिलान रत्नायके जैसे खिलाड़ी भी शामिल थे, जो प्लेइंग XI का हिस्सा नहीं बन पाए।
इस घटना का क्रिकेट जगत पर असर
चंडीमल का यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि क्रिकेट, चाहे कितना भी सभ्य और तकनीकी खेल क्यों न लगे, शारीरिक तौर पर कितना जोखिम भरा हो सकता है। फील्डिंग के दौरान डाइव लगाना एक आम बात है, लेकिन कई बार यही सामान्य सी दिखने वाली हरकत किसी खिलाड़ी के करियर के लिए खतरा बन सकती है।
दूसरी ओर, यह घटना सूर्यबंडारा के लिए किसी सपने के सच होने जैसा पल भी है। किसी भी क्रिकेटर के लिए राष्ट्रीय टीम की तरफ से टेस्ट डेब्यू करना एक जीवनभर का सपना होता है, लेकिन बहुत कम खिलाड़ियों को यह मौका इस तरह अचानक, किसी साथी की चोट के दुर्भाग्य से मिलता है। यह क्षण उनके लिए मिश्रित भावनाओं वाला रहा होगा – एक तरफ खुशी, तो दूसरी तरफ अपने वरिष्ठ साथी की चोट का दुख।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्यबंडारा जैसे प्रतिभाशाली घरेलू खिलाड़ी को यह मौका मिलना श्रीलंकाई क्रिकेट के लिए भी सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे टीम की बेंच स्ट्रेंथ का पता चलता है। हालांकि दबाव की स्थिति में डेब्यू करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब टीम एक कठिन लक्ष्य का पीछा कर रही हो।
आगे क्या होगा
मैच का पांचवां और आखिरी दिन काफी दिलचस्प होने वाला है। श्रीलंका को जीत के लिए अभी भी काफी दूरी तय करनी है, जबकि भारत की टीम बाकी बचे विकेट झटककर मैच को अपने नाम करने की कोशिश करेगी। चंडीमल की गैरमौजूदगी श्रीलंकाई मध्य क्रम के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि वे टीम के सबसे अनुभवी बल्लेबाज़ों में से एक हैं और दबाव की स्थिति में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है।
फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या चंडीमल की चोट गंभीर तो नहीं है, और क्या सूर्यबंडारा अपने डेब्यू मैच को यादगार बना पाएंगे। मौसम भी इस सीरीज़ में एक भूमिका निभा रहा है, क्योंकि गॉल में बारिश की संभावना लगातार बनी हुई है, जो नतीजे को प्रभावित कर सकती है।
यह टेस्ट मैच सिर्फ स्कोरबोर्ड के आंकड़ों से कहीं ज़्यादा है – यह क्रिकेट के उन अप्रत्याशित पलों की याद दिलाता है, जो इस खेल को इतना रोमांचक बनाते हैं। एक चोट, एक मौका, और एक युवा खिलाड़ी का सपना – यही तो क्रिकेट की असली कहानी है।
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