Supreme court 27 august holiday :सुप्रीम कोर्ट ने 27 अगस्त को घोषित की छुट्टी, 22 अगस्त (शनिवार) होगा कार्यदिवस जानें पूरी वजह Full report

Supreme court 27 august holiday सुप्रीम कोर्ट ने SCAORA के अनुरोध पर 27 अगस्त 2026 को छुट्टी घोषित की, जिससे 26-28 अगस्त तक तीन दिन का अवकाश बनेगा। भरपाई के लिए 22 अगस्त (शनिवार) को रजिस्ट्री पूर्ण कार्यदिवस रहेगी। पढ़ें पूरी जानकारी।

Supreme court 27 august holiday
Supreme Court 27 August holiday
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सुप्रीम कोर्ट ने 27 अगस्त को घोषित की छुट्टी, 22 अगस्त को होगा कामकाज

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसले के तहत 27 अगस्त, 2026 (गुरुवार) को न्यायालय और उसकी रजिस्ट्री के लिए अवकाश घोषित किया है। इस अतिरिक्त छुट्टी की भरपाई के लिए 22 अगस्त, 2026 (शनिवार) को पूर्ण कार्यदिवस के रूप में अधिसूचित किया गया है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के वार्षिक अवकाश कैलेंडर में एक दिलचस्प बदलाव है, जिसने वकीलों, वादकारियों और न्यायिक प्रशासन से जुड़े सभी पक्षों का ध्यान खींचा है। इस लेख में हम इस फैसले की पूरी पृष्ठभूमि, कारण, प्रक्रिया और इसके व्यावहारिक असर को विस्तार से समझेंगे।

क्या है पूरा मामला

Supreme court 27 august holiday सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक महाशाखा (Administrative General Branch) की ओर से 14 अगस्त को एक परिपत्र (सर्कुलर) जारी किया गया, जिसमें बताया गया कि 27 अगस्त, 2026 को न्यायालय और रजिस्ट्री दोनों के लिए अवकाश रहेगा। यह फैसला यूं ही नहीं लिया गया — इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन यानी SCAORA का अनुरोध था। SCAORA, जो सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड वकीलों का प्रतिनिधि निकाय है, ने इस तारीख को अवकाश घोषित करने की मांग की थी।

इस मांग पर फुल कोर्ट (Full Court) यानी सभी न्यायाधीशों की समिति ने विचार किया और इसे मंजूरी दी। भारत के सुप्रीम कोर्ट में इस तरह के प्रशासनिक और कैलेंडर संबंधी फैसले आमतौर पर फुल कोर्ट की सहमति से ही लिए जाते हैं, क्योंकि इनका सीधा असर न्यायिक कामकाज, सुनवाई की तारीखों और वकीलों के शेड्यूल पर पड़ता है। मंजूरी मिलने के बाद प्रशासनिक महाशाखा ने औपचारिक परिपत्र जारी करते हुए यह जानकारी सार्वजनिक की।

परिपत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि इस अतिरिक्त छुट्टी की भरपाई के तौर पर 22 अगस्त, 2026, जो कि शनिवार है, को सुप्रीम कोर्ट और उसकी रजिस्ट्री के लिए पूर्ण कार्यदिवस के रूप में अधिसूचित किया गया है। यानी सामान्यतः शनिवार को जो अवकाश रहता, उस दिन अब न्यायालय और रजिस्ट्री कार्यालय खुले रहेंगे। परिपत्र के अनुसार, इस दिन रजिस्ट्री के कार्यालय शाम 5 बजे तक कामकाज करेंगे, यानी सामान्य कार्यदिवस की तरह ही पूरा समय दफ्तर खुला रहेगा।

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तीन त्योहारों के बीच बना संयोग

इस फैसले को समझने के लिए सुप्रीम कोर्ट के 2026 के अवकाश कैलेंडर पर एक नजर डालना जरूरी है। अगस्त महीने के आखिरी हफ्ते में पहले से ही दो महत्वपूर्ण त्योहारों की छुट्टियां तय थीं:

  • 26 अगस्त (बुधवार) — मिलाद-उन-नबी (ईद-ए-मिलाद) के अवसर पर अवकाश। यह पर्व पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है और इस्लामी चंद्र कैलेंडर पर आधारित होने के कारण हर साल इसकी तारीख बदलती रहती है, जो चांद दिखने पर निर्भर करती है।
  • 28 अगस्त (शुक्रवार) — रक्षाबंधन के अवसर पर अवकाश। यह भाई-बहन के स्नेह और रक्षा के वचन का प्रतीक पर्व है, जो श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

इन दोनों तारीखों के बीच august 27 (गुरुवार) एक सामान्य कार्यदिवस के रूप में पड़ रहा था। यानी वकीलों और अदालत के कर्मचारियों को 26 तारीख की छुट्टी के बाद सिर्फ एक दिन (27 अगस्त) दफ्तर आना पड़ता, और फिर अगले ही दिन यानी 28 अगस्त को दोबारा छुट्टी मिल जाती। इसी बीच के “टूटे हुए” दिन को लेकर SCAORA ने सुप्रीम कोर्ट प्रशासन से अनुरोध किया कि इसे भी अवकाश घोषित किया जाए, ताकि 26 से 28 अगस्त तक लगातार तीन दिन की छुट्टी बन सके।

फुल कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए 27 अगस्त को भी अवकाश घोषित कर दिया। इस तरह अब सुप्रीम कोर्ट में 26, 27 और 28 अगस्त — यानी बुधवार से शुक्रवार तक — लगातार तीन दिन का अवकाश रहेगा। इस व्यवस्था से पहले से तय दो त्योहारी छुट्टियों के बीच में पड़ने वाला अकेला कार्यदिवस भी अवकाश में बदल गया, जिससे एक “मिनी लॉन्ग वीकेंड” जैसी स्थिति बन गई है।

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भरपाई के तौर पर शनिवार को कामकाज

Supreme court 27 august holiday किसी भी संस्थागत कैलेंडर में जब अतिरिक्त छुट्टी जोड़ी जाती है, तो अक्सर इसकी भरपाई किसी अन्य दिन कामकाज करके की जाती है, ताकि कुल कार्यदिवसों की संख्या पर बहुत ज्यादा असर न पड़े। सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने भी यही तरीका अपनाया। चूंकि 27 अगस्त को अतिरिक्त अवकाश दिया गया, इसलिए इसके एवज में 22 अगस्त, 2026 (शनिवार) को पूर्ण कार्यदिवस के रूप में तय किया गया।

सामान्यतः शनिवार के दिन सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में सीमित या आंशिक कामकाज होता है, या फिर यह अवकाश का दिन होता है (यह इस पर निर्भर करता है कि वह महीने का कौन-सा शनिवार है)। लेकिन इस विशेष व्यवस्था के तहत 22 अगस्त को रजिस्ट्री पूरी तरह खुली रहेगी और कर्मचारी व अधिकारी सामान्य कार्यदिवस की तरह ड्यूटी पर रहेंगे। परिपत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस दिन रजिस्ट्री कार्यालय शाम 5 बजे तक कार्यरत रहेंगे, जो सामान्य कार्यालय समय के अनुरूप है।

इस व्यवस्था का सीधा मतलब यह है कि वकीलों, याचिकाकर्ताओं और अन्य पक्षकारों को जो भी दस्तावेज दाखिल करने हों, फाइलिंग करानी हो, या रजिस्ट्री से जुड़ा कोई अन्य काम निपटाना हो, वे 22 अगस्त को यह काम पूरा कर सकते हैं, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यह दिन अवकाश या आधे दिन के कामकाज का होता।

SCAORA की भूमिका और महत्व

यह समझना जरूरी है कि SCAORA जैसी संस्थाओं की सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक फैसलों में क्या भूमिका होती है। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन उन वकीलों का प्रतिनिधित्व करती है जिन्हें सुप्रीम कोर्ट में मुवक्किलों की ओर से याचिका दाखिल करने और पैरवी करने का विशेष अधिकार प्राप्त है। यह एसोसिएशन समय-समय पर न्यायालय प्रशासन के समक्ष वकीलों से जुड़े मुद्दे उठाती रहती है — चाहे वह अवकाश कैलेंडर से जुड़ा हो, सुनवाई की प्रक्रिया से संबंधित हो, या रजिस्ट्री के कामकाज को लेकर कोई सुझाव हो।

इस मामले में SCAORA का अनुरोध पूरी तरह व्यावहारिक था — दो त्योहारी छुट्टियों के बीच अकेले पड़ने वाले कार्यदिवस को लेकर वकीलों के बीच यह आम शिकायत रहती है कि इतने कम अंतराल में दूर-दराज से आना-जाना, अदालत का शेड्यूल प्रबंधित करना और सुनवाई की तैयारी करना व्यावहारिक रूप से कठिन हो जाता है। ऐसे मामलों में अक्सर पूरे देश से वकील और वादकारी दिल्ली आते हैं, इसलिए बीच में एक दिन के लिए वापस लौटना और फिर आना तार्किक रूप से मुश्किल भरा होता है। फुल कोर्ट ने इसी व्यावहारिक कठिनाई को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया।

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फुल कोर्ट की मंजूरी की प्रक्रिया

भारत के सुप्रीम कोर्ट में “फुल कोर्ट” शब्द का इस्तेमाल तब होता है जब कोई फैसला सभी (या अधिकांश) कार्यरत न्यायाधीशों की सामूहिक बैठक में लिया जाता है, न कि किसी एक पीठ या मुख्य न्यायाधीश के स्तर पर। प्रशासनिक प्रकृति के फैसले — जैसे अवकाश कैलेंडर में बदलाव, नियमों में संशोधन, या रजिस्ट्री से जुड़ी नीतियां — प्रायः फुल कोर्ट की सहमति से ही अंतिम रूप लेते हैं। यह सुनिश्चित करता है कि निर्णय पारदर्शी हो और सभी न्यायाधीशों की सहमति से लिया गया हो, जिससे इसे लागू करने में कोई विवाद न रहे।

इस विशेष मामले में भी SCAORA के अनुरोध को पहले प्रशासनिक स्तर पर परखा गया, फिर इसे फुल कोर्ट के समक्ष रखा गया। फुल कोर्ट की मंजूरी मिलने के बाद ही प्रशासनिक महाशाखा ने औपचारिक परिपत्र जारी किया। यह प्रक्रिया दर्शाती है कि भले ही यह एक “छोटा” प्रशासनिक फैसला लगे, लेकिन इसे लागू करने से पहले पूरी संस्थागत प्रक्रिया का पालन किया गया।

आम जनता और वकीलों पर असर

इस फैसले का सबसे सीधा असर उन वकीलों, वादकारियों और कर्मचारियों पर पड़ेगा जो नियमित रूप से सुप्रीम कोर्ट परिसर या रजिस्ट्री से जुड़े हैं। आइए इसके व्यावहारिक पहलुओं पर नजर डालते हैं:

वकीलों के लिए राहत: देशभर से आने वाले वकीलों को अब 26 से 28 अगस्त तक लगातार तीन दिन की छुट्टी मिलेगी। इससे वे या तो अपने गृहनगर लौट सकते हैं, या फिर व्यक्तिगत व पारिवारिक कार्यक्रमों — जैसे मिलाद-उन-नबी और रक्षाबंधन जैसे त्योहार — मना सकते हैं, बिना बीच में अदालत आने की चिंता किए।

सुनवाई और लिस्टिंग पर असर: चूंकि 27 अगस्त को अदालत बंद रहेगी, इसलिए उस दिन के लिए पहले से तय किसी भी सुनवाई को पुनर्निर्धारित करना होगा। वकीलों और मुवक्किलों को इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियां समायोजित करनी होंगी।

रजिस्ट्री में फाइलिंग: 22 अगस्त को रजिस्ट्री के पूरी तरह खुले रहने से उन पक्षकारों को फायदा होगा जिन्हें अर्जेंट फाइलिंग करनी है या जिनके दस्तावेजों की समय-सीमा नजदीक है। यह दिन अतिरिक्त कामकाजी अवसर के रूप में काम आएगा।

प्रशासनिक कर्मचारियों पर बोझ: दूसरी ओर, रजिस्ट्री और प्रशासनिक स्टाफ के लिए यह व्यवस्था इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि उन्हें एक ऐसे दिन (शनिवार) पूरा कामकाज करना होगा, जो सामान्यतः छुट्टी या आधे दिन का होता। हालांकि यह भारत की कई अन्य संस्थाओं में भी आम प्रचलन है, जहां त्योहारी लंबी छुट्टियों की भरपाई सप्ताहांत के किसी दिन कामकाज करके की जाती है।

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ऐतिहासिक संदर्भ — क्या पहले भी हुआ है ऐसा

यह पहली बार नहीं है जब किसी संस्था ने त्योहारों के बीच पड़ने वाले “अकेले कार्यदिवस” को अवकाश में बदलकर लंबी छुट्टी की व्यवस्था बनाई हो। भारत में सरकारी और न्यायिक दोनों तरह के संस्थानों में यह एक जाना-पहचाना प्रबंधकीय तरीका है, जिसे अक्सर “ब्रिज हॉलिडे” या “सैंडविच अवकाश समायोजन” कहा जाता है।

जब दो छुट्टियों के बीच केवल एक कार्यदिवस बचता है, तो संस्थाएं अक्सर या तो उस दिन को भी अवकाश घोषित करती हैं, या कर्मचारियों को उस दिन के लिए वैकल्पिक अवकाश (optional leave) का विकल्प देती हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले में पहला तरीका अपनाया गया, जिसमें भरपाई के लिए एक अन्य दिन कामकाज सुनिश्चित किया गया, ताकि कुल कार्यदिवसों की संख्या में बहुत अधिक कमी न आए।

सुप्रीम कोर्ट का वार्षिक अवकाश कैलेंडर हर साल चीफ जस्टिस के निर्देश पर जारी होता है, और इसमें राष्ट्रीय व धार्मिक पर्वों के साथ-साथ न्यायालय की स्थानीय परंपराओं का भी ध्यान रखा जाता है। इस्लामी कैलेंडर पर आधारित पर्व, जैसे मिलाद-उन-नबी, चांद दिखने के आधार पर तय होते हैं, इसलिए कई बार अंतिम तारीख की पुष्टि बाद में होती है। इसी वजह से कैलेंडर में समय-समय पर संशोधन की जरूरत पड़ती रहती है, जैसा कि इस मामले में हुआ।

आगे क्या

अब जबकि परिपत्र जारी हो चुका है, यह उम्मीद की जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट और आधिकारिक अवकाश कैलेंडर में इस बदलाव को अपडेट कर दिया जाएगा। वकीलों और वादकारियों को सलाह दी जाती है कि वे अपनी सुनवाई की तारीखों की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से करें, विशेष रूप से उन मामलों के लिए जो 26, 27 या 28 अगस्त के आसपास सूचीबद्ध हैं। इसी तरह, जिन्हें 22 अगस्त को रजिस्ट्री से जुड़ा कोई काम निपटाना है, वे इस दिन का पूरा लाभ उठा सकते हैं क्योंकि यह अब एक पूर्ण कार्यदिवस के रूप में उपलब्ध रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भले ही एक सामान्य प्रशासनिक बदलाव प्रतीत हो, लेकिन इसके पीछे की प्रक्रिया — SCAORA के अनुरोध से लेकर फुल कोर्ट की मंजूरी और फिर औपचारिक परिपत्र तक — यह दिखाती है कि भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था अपने कामकाज में वकीलों और पक्षकारों की व्यावहारिक जरूरतों को भी गंभीरता से लेती है।

26 से 28 अगस्त तक की तीन दिवसीय छुट्टी जहां वकीलों और कर्मचारियों को त्योहार मनाने का अवसर देगी, वहीं 22 अगस्त को शनिवार के दिन पूर्ण कामकाज सुनिश्चित करके यह भी सुनिश्चित किया गया है कि न्यायिक कामकाज पर इसका बहुत अधिक विपरीत असर न पड़े। यह संतुलन इस बात का उदाहरण है कि कैसे संस्थागत कैलेंडर प्रबंधन में परंपरा, व्यावहारिकता और दक्षता — तीनों का ध्यान रखा जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की छुट्टियों और सुनवाई की तारीखों से जुड़ी हर अपडेट सबसे पहले पाने के लिए जुड़े रहें। अगर आपका कोई केस 26-28 अगस्त के आसपास सूचीबद्ध है, तो अपनी सुनवाई की तारीख आधिकारिक सुप्रीम कोर्ट वेबसाइट से जरूर कन्फर्म करें।

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