Perplexity AI CEO Aravind Srinivas के बयान को आसान हिंदी में समझें। जानें कैसे AI के दौर में Computer Science फिर से maths, physics, logic और fundamentals की ओर लौटता दिख रहा है।

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Perplexity AI के CEO Aravind Srinivas का बड़ा बयान: “Computer Science फिर से Maths और Physics की तरफ लौट रही है”
साल 2026 में AI इंडस्ट्री में एक नई बहस ने ज़ोर पकड़ लिया है — क्या Computer Science, जैसा हम आज जानते हैं, धीरे-धीरे खत्म हो रही है और अपनी पुरानी जड़ों यानी गणित (Mathematics) और भौतिकी (Physics) की तरफ वापस लौट रही है? इस बहस को हवा दी Perplexity AI के को-फाउंडर और CEO Aravind Srinivas ने, जब उन्होंने एक वायरल हो रही पोस्ट को अपना समर्थन दिया। यह छोटा सा बयान — सिर्फ दो शब्दों का — टेक इंडस्ट्री में एक बड़ी चर्चा का केंद्र बन गया।
आखिर हुआ क्या था?
12 मार्च 2026 को, X (पहले Twitter) पर एक यूज़र, जिनका हैंडल @TheVixhal है, ने एक पोस्ट लिखी जिसका सार यह था कि जैसे-जैसे लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs) पारंपरिक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के ज़्यादातर काम खुद संभालने लगे हैं, वैसे-वैसे कंप्यूटर साइंस का दायरा धीरे-धीरे फिर से फिजिसिस्ट्स, मैथमेटिशियन्स और इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स के डोमेन में सिमटता जा रहा है। पोस्ट में यह भी कहा गया कि इस फील्ड का “केंद्र बिंदु” अब मैन्युअल कोड लिखने से हटकर कहीं और शिफ्ट हो रहा है।
कुछ ही घंटों में, Aravind Srinivas ने इस पोस्ट को कोट करते हुए अपने आधिकारिक अकाउंट से सिर्फ दो शब्द लिखे — “Well said” (बहुत सही कहा)। यही छोटी सी टिप्पणी टेक और AI कम्युनिटी में आग की तरह फैल गई। कुछ ही दिनों में इस पोस्ट को लगभग 10 लाख के करीब व्यूज़, हज़ारों लाइक्स और सैकड़ों रीपोस्ट मिल गए।
Srinivas का समर्थन इतना बड़ा मुद्दा क्यों बना?
यह समझना ज़रूरी है कि Aravind Srinivas कोई साधारण टेक कमेंटेटर नहीं हैं। वे खुद एक कंप्यूटर साइंटिस्ट हैं, जिन्होंने UC Berkeley से कंप्यूटर साइंस में PhD की है, और उससे पहले IIT Madras से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में B.Tech और M.Tech किया है। Perplexity AI बनाने से पहले उन्होंने OpenAI, Google और DeepMind जैसी दुनिया की टॉप AI रिसर्च लैब्स में रिसर्च साइंटिस्ट के तौर पर काम किया है।
यानी जब इस शख्स ने, जो खुद AI इंडस्ट्री के फ्रंटलाइन पर बैठकर एक बिलियन-डॉलर कंपनी चला रहे हैं, इस विचार का समर्थन किया, तो यह सिर्फ एक “रैंडम ओपिनियन” नहीं रह गया — यह एक ऐसे इनसाइडर की गवाही बन गई जो खुद यह देख रहा है कि AI मॉडल्स कोडिंग की दुनिया को किस तरह बदल रहे हैं।
Perplexity AI CEO Aravind Srinivas : टेक्नोलॉजी की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेजी से आई क्रांति ने software tools के स्वरूप के साथ-साथ learning, coding और problem-solving के प्रति हमारा नजरिया fundamentally बदल दिया है। अब coding केवल syntax या frameworks याद करने तक सीमित नहीं है। इस बदलाव के बीच एक अहम सवाल उठ रहा है—AI के प्रभाव से Computer Science क्या अपने मूल, यानी mathematics और physics की ओर लौट रहा है?
इसी संदर्भ में Perplexity AI के CEO Aravind Srinivas का एक बयान चर्चा में है, जिसमें वह मानते हैं कि AI के असर के कारण Computer Science अब फिर से deeper thinking, abstraction, logical modeling और scientific reasoning की दिशा में जा रहा है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि अब coding का एक बड़ा हिस्सा AI tools द्वारा automate हो रहा है। ऐसे में भविष्य के software engineer की सबसे अहम पहचान होगी systems को समझना, problems को सही ढंग से model करना और solutions को verify करना।
यह विषय केवल एक viral statement भर नहीं है। यह technology industry, students, developers, job seekers और educational institutions—सभी के लिए एक अहम संकेत है। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि इस बयान का वास्तविक अर्थ क्या है, AI coding tools ने software development को किस तरह बदला है, mathematics और physics की relevance क्यों बढ़ रही है, और आने वाले समय में Computer Science की दिशा कैसी हो सकती है।
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Aravind Srinivas के बयान का सरल अर्थ

मूल तर्क क्या है?
इस पूरी बहस के पीछे तर्क कुछ इस तरह है:
पिछले दो-तीन दशकों में, “Computer Science” शब्द का मतलब काफी हद तक “सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग” और “कोडिंग” बन गया था। कॉलेज के छात्र प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेस सीखते थे, डेटा स्ट्रक्चर्स और एल्गोरिद्म याद करते थे, और इंटरव्यू में लीटकोड (LeetCode) जैसे प्लेटफॉर्म्स पर घंटों प्रैक्टिस करते थे। यह पूरा इकोसिस्टम “मैनुअल कोड लिखने” की स्किल पर आधारित था।
लेकिन अब जब AI कोडिंग असिस्टेंट्स — जैसे Claude, GPT सीरीज़, और खुद Perplexity जैसे टूल्स — रूटीन कोडिंग टास्क्स, बॉयलरप्लेट कोड, डिबगिंग, और यहां तक कि पूरे-पूरे फीचर्स को खुद-ब-खुद लिख देने में सक्षम हो गए हैं, तो सवाल उठता है: अब इंसानी इंजीनियर की असली वैल्यू कहां है?
इसका जवाब यह दिया जा रहा है कि अब असली वैल्यू “सिस्टम-लेवल सोच”, “गणितीय तर्क”, और “गहरी समस्या-समाधान क्षमता” में शिफ्ट हो रही है — यानी वही स्किल्स जो पारंपरिक रूप से फिजिसिस्ट्स और मैथमेटिशियन्स के पास होती थीं। दूसरे शब्दों में कहें तो, कोड लिखना अब एक “कमोडिटी” स्किल बनता जा रहा है, जबकि यह समझना कि किसी सिस्टम को कैसे डिज़ाइन किया जाए, किस एल्गोरिद्म का इस्तेमाल कब करना है, और अंडरलाइंग गणितीय मॉडल्स को कैसे समझा और ऑप्टिमाइज़ किया जाए — यह अब ज़्यादा वैल्यूएबल स्किल बनता जा रहा है।
अन्य AI लीडर्स की भी यही राय
Srinivas अकेले नहीं हैं जो यह मानते हैं। इस विचार को हाल के महीनों में कई बड़े AI इंडस्ट्री लीडर्स ने अलग-अलग तरीकों से दोहराया है:
- Dario Amodei (Anthropic के CEO) पहले भी कह चुके हैं कि AI सिस्टम्स जल्द ही सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का एक बड़ा हिस्सा एंड-टू-एंड खुद संभालने में सक्षम हो सकते हैं, और उन्होंने इसके लिए छह से बारह महीने का एक अनुमानित समयसीमा भी बताई थी।
- Replit के CEO ने और भी सीधे शब्दों में कहा है कि पारंपरिक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग जॉब “लगभग गायब” हो सकती है।
इसके अलावा, Anthropic के अपने “AI Exposure Index” के मुताबिक, प्रोग्रामिंग वह पेशा है जो AI से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने के खतरे में है — इस इंडेक्स के अनुसार प्रोग्रामिंग के लगभग 75% टास्क्स ऑटोमेट किए जा सकते हैं।
हर कोई इस बात से सहमत नहीं है
जहां एक तरफ यह “आशावादी” नज़रिया है कि कंप्यूटर साइंस अपनी बौद्धिक जड़ों की तरफ लौट रही है, वहीं दूसरी तरफ इस पर आलोचना भी हो रही है। कई टीका-टिप्पणीकारों का कहना है कि यह पूरी बहस एक “प्रिविलेज्ड” नज़रिये से हो रही है।
आलोचकों का तर्क है कि जो इंजीनियर्स इस बदलाव से सबसे ज़्यादा प्रभावित हो रहे हैं, वे वे लोग नहीं हैं जिनके पास Berkeley जैसी यूनिवर्सिटीज़ से गणित में PhD है। बल्कि वे लोग हैं जिन्होंने कोडिंग सीखी क्योंकि उन्हें बताया गया था कि यह मिडिल क्लास में पहुंचने का एक भरोसेमंद रास्ता है — चाहे वह बूटकैंप्स के ज़रिए हो या सेल्फ-टॉट प्रोग्रामिंग के ज़रिए। सवाल यह उठाया जा रहा है कि जो व्यक्ति पिछले साल तक बॉयलरप्लेट कोड लिख रहा था, वह अगले साल “सिस्टम-लेवल रीज़निंग” करने वाला इंजीनियर कैसे बन जाएगा? इसका जवाब आसान नहीं है — इसके लिए समय, पैसा, और अच्छी शिक्षा तक पहुंच चाहिए, और यह तीनों चीज़ें आज भी असमान रूप से बंटी हुई हैं।
साथ ही, कई एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि AI कोडिंग टूल्स में तेज़ी से सुधार होने के बावजूद, अनुभवी इंजीनियर्स की ज़रूरत खत्म नहीं हुई है। AI मॉडल्स अभी भी अनजान समस्याओं और जटिल आर्किटेक्चर्स से जूझते समय गलतियां कर सकते हैं, जिसकी वजह से आउटपुट की समीक्षा (review) करने, विश्वसनीयता सुनिश्चित करने, और जटिल सिस्टम्स को डिज़ाइन करने के लिए इंसानी जजमेंट अब भी बेहद अहम बना हुआ है।
Aravind Srinivas कौन हैं?
अगर आप Aravind Srinivas के बारे में पूरी जानकारी नहीं जानते, तो यहां एक संक्षिप्त परिचय है। उनका जन्म 7 जून 1994 को चेन्नई, तमिलनाडु में हुआ था। उनके परिवार का पृष्ठभूमि टेक्नोलॉजी से ज़्यादा फाइनेंस से जुड़ी थी, और इंजीनियरिंग को करियर के रूप में चुनना उनके परिवार के लिए भी एक नया कदम था। बचपन से ही उन्हें गणित और समस्या-समाधान में गहरी रुचि थी।
उन्होंने IIT Madras से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में B.Tech और M.Tech किया, और फिर अमेरिका जाकर UC Berkeley से कंप्यूटर साइंस में PhD पूरी की। इसके बाद उन्होंने OpenAI, Google और DeepMind जैसी संस्थाओं में रिसर्च साइंटिस्ट के तौर पर काम किया। साल 2022 में उन्होंने Perplexity AI की सह-स्थापना की — एक ऐसा “AI-पावर्ड आंसर इंजन” जो पारंपरिक सर्च इंजन की जगह सटीक, इन-लाइन साइटेशन के साथ सीधे जवाब देने पर केंद्रित है।
Perplexity AI ने अब तक NEA, Jeff Bezos, Nat Friedman, Elad Gil, NVIDIA और स्वर्गीय Susan Wojcicki जैसे बड़े निवेशकों से भारी फंडिंग जुटाई है। कंपनी का “Publishers Program” भी काफी चर्चा में रहा है, जिसके तहत जिन मीडिया आउटलेट्स और कंटेंट क्रिएटर्स के काम को Perplexity साइट करता है, उन्हें रेवेन्यू का हिस्सा दिया जाता है। Srinivas को भारत के सबसे युवा अरबपतियों में से एक माना जाता है, और वे M3M Hurun India Rich List जैसी लिस्ट्स में भी शामिल हो चुके हैं।
इसका मतलब भारतीय छात्रों और इंजीनियर्स के लिए क्या है?
भारत जैसे देश में, जहां लाखों छात्र हर साल कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग के फील्ड में करियर बनाने के सपने के साथ दाखिला लेते हैं, यह बहस खासतौर पर अहम बन जाती है। अगर वाकई “मैनुअल कोडिंग” की वैल्यू घट रही है और “गणितीय व वैचारिक समझ” की वैल्यू बढ़ रही है, तो इसका सीधा असर इस बात पर पड़ेगा कि छात्रों को क्या सीखना चाहिए और कैसे तैयारी करनी चाहिए।
इसका मतलब यह हो सकता है कि आने वाले सालों में केवल सिंटैक्स और फ्रेमवर्क्स रटने की बजाय, गणित की गहरी समझ, एल्गोरिद्मिक सोच, डेटा स्ट्रक्चर्स की मूल अवधारणाएं, और सिस्टम डिज़ाइन जैसी स्किल्स ज़्यादा महत्वपूर्ण हो जाएंगी। साथ ही, यह भी साफ है कि AI टूल्स को समझना और उनके साथ मिलकर काम करना (prompt engineering, AI-assisted development) खुद एक नई ज़रूरी स्किल बनती जा रही है
AI coding tools ने क्या बदला है?

Perplexity AI CEO Aravind Srinivas :आज कई AI tools ऐसे हैं जो developers की productivity बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। ये tools functions लिख सकते हैं, syntax suggest कर सकते हैं, code errors explain कर सकते हैं, test cases बना सकते हैं, documentation summarize कर सकते हैं और कई बार complete blocks of code भी generate कर देते हैं।
क्या इसका मतलब है कि coding jobs खतरे में हैं?
Perplexity AI CEO Aravind Srinivas : यह सवाल हर student और developer के मन में है। सच्चाई यह है कि jobs पूरी तरह खत्म होने की बजाय बदल सकती हैं। Entry-level repetitive tasks पर असर पड़ सकता है, क्योंकि AI basic coding काम को तेज कर सकती है। लेकिन high-quality engineering, system design, complex debugging, AI model integration, infra engineering, cybersecurity, backend architecture, research engineering, और domain-specific development जैसे क्षेत्रों में skilled professionals की जरूरत बनी रहेगी।
दरअसल AI ने एक paradox पैदा किया है। अब basic app बनाना पहले से आसान हो सकता है, लेकिन truly reliable, scalable और secure software बनाना पहले जितना ही कठिन—और कई मामलों में उससे भी कठिन—हो सकता है। क्योंकि AI-generated code को समझना, verify करना और production-grade बनाना एक अलग skill है।
इसलिए आने वाले समय में वह developer अधिक सफल हो सकता है, जो AI tools का सही उपयोग करे, लेकिन उनके output पर आँख बंद करके भरोसा न करे।
Mathematics की relevance क्यों बढ़ रही है?
Perplexity AI CEO Aravind Srinivas : Mathematics की relevance कई कारणों से फिर केंद्र में आ रही है।
पहला कारण है abstraction। Computer Science की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वह real-world problems को abstract models में बदलती है। AI tools code लिख सकते हैं, लेकिन सही abstraction चुनना इंसान का काम है।
दूसरा कारण है algorithms और optimization। जैसे-जैसे systems बड़े और complex होते जाते हैं, efficient algorithms की जरूरत बढ़ती है। Faster execution, lower memory use, reduced latency और better scalability—ये सभी mathematical thinking से जुड़े हैं।
तीसरा कारण है probability और statistics। AI systems deterministic नहीं होते। उनका behavior uncertainty, confidence scores, model errors, bias और evaluation metrics पर आधारित हो सकता है। ऐसे systems के साथ काम करने के लिए probabilistic thinking जरूरी हो जाती है।
चौथा कारण है machine learning और data science। आज के tech landscape में linear algebra, calculus, statistics और optimization methods की समझ कई advanced roles के लिए बेहद उपयोगी होती जा रही है।
Physics की relevance क्यों बढ़ रही है?
Perplexity AI CEO Aravind Srinivas : Physics का संबंध केवल research labs तक सीमित नहीं है। आज जब computing hardware, edge devices, robotics, chips, sensors, data centers और energy-efficient computing की बात होती है, तब physics की भूमिका सामने आती है।
मान लीजिए AI future में केवल cloud servers पर निर्भर न रहे, बल्कि smartphones, embedded systems, vehicles, robots और local devices पर अधिक चले। ऐसे में hardware limitations, battery constraints, thermal issues, signal accuracy और real-time behavior जैसे विषय अधिक महत्वपूर्ण हो जाएंगे। यह सब physics-informed engineering mindset मांगता है।
Physics हमें constraints में सोचना सिखाती है। हर system infinite resources के साथ काम नहीं करता। Memory सीमित होती है, power सीमित होती है, bandwidth सीमित होती है और response time की भी practical limits होती हैं। जो engineer इन constraints को समझकर efficient systems बनाता है, वही long-term में ज्यादा valuable साबित होता है।
Students के लिए इसका क्या मतलब है?
Perplexity AI CEO Aravind Srinivas : अगर आप student हैं और tech field में career बनाना चाहते हैं, तो यह समय केवल tools सीखने का नहीं, बल्कि fundamentals मजबूत करने का है। Programming languages सीखना जरूरी है, लेकिन केवल language जानना अब पर्याप्त नहीं होगा। आपको data structures, algorithms, operating systems, databases, networking, probability, logic, linear algebra और system design जैसी चीजों पर भी ध्यान देना होगा।
इसके साथ ही AI literacy भी महत्वपूर्ण है। आपको यह समझना होगा कि AI tools को सही prompt कैसे दिया जाए, उनके output को कैसे evaluate किया जाए, generated code को कैसे test किया जाए, और कहाँ AI की limits सामने आती हैं।
आज बहुत से students shortcut ढूंढते हैं—कौन-सी language सबसे जल्दी job दिलाएगी, कौन-सा framework trending है, कौन-सा tool सबसे easy है। लेकिन future शायद उन लोगों का होगा जो short-term trends के साथ-साथ deep understanding पर भी काम करेंगे।
Developers और professionals के लिए सीख
Perplexity AI CEO Aravind Srinivas : जो लोग पहले से software industry में हैं, उनके लिए यह बदलाव adaptation की मांग करता है। AI tools को ignore करना practical नहीं है। लेकिन हर AI-generated output को final solution मान लेना भी खतरनाक हो सकता है।
अब professionals को तीन स्तरों पर evolve होना होगा। पहला, AI-assisted workflow को अपनाना। दूसरा, fundamentals को और मजबूत करना। तीसरा, domain understanding को बढ़ाना। क्योंकि future में domain expertise बहुत बड़ी differentiation बन सकती है। जो engineer healthcare, finance, education, cybersecurity, logistics या manufacturing जैसे किसी specific field की वास्तविक समस्याओं को समझता है, वह generic coder की तुलना में अधिक value create कर सकता है।
Education system को क्या बदलना चाहिए?
यह debate education system के लिए भी महत्वपूर्ण है। अगर coding का basic हिस्सा AI assist करने लगे, तो फिर teaching का focus केवल syntax, memorization और repetitive lab exercises पर नहीं रहना चाहिए। छात्रों को logic, reasoning, modeling, experimentation, system design और verification पर ज्यादा train किया जाना चाहिए।
Exams और assignments का format भी धीरे-धीरे बदल सकता है। केवल code output के आधार पर किसी student की capability नापना पर्याप्त नहीं होगा। future assessment शायद इस बात पर अधिक निर्भर करे कि student problem को कैसे समझता है, constraints को कैसे identify करता है, alternatives को कैसे compare करता है और अपने solution को justify कैसे करता है।
क्या यह सचमुच traditional Computer Science की वापसी है?
कुछ हद तक हाँ, लेकिन यह traditional रूप में वापसी नहीं है। यह एक नए hybrid era की शुरुआत भी हो सकती है। यहाँ AI tools implementation में मदद करेंगे, लेकिन humans conceptual control बनाए रखेंगे। यानी coding रहेगी, लेकिन उसका अर्थ बदलेगा। अब coding सिर्फ keyboard skill नहीं, बल्कि reasoning-backed engineering activity बन सकती है।
इस नए दौर में तीन तरह के लोग सबसे आगे हो सकते हैं। वे जिनके fundamentals मजबूत हैं। वे जो किसी domain को गहराई से समझते हैं। और वे जो AI tools को intelligently use करना जानते हैं।
इस सोच की सीमाएँ भी हैं
Perplexity AI CEO Aravind Srinivas : यह भी याद रखना चाहिए कि हर software problem maths problem नहीं होती। Product design, user experience, communication, team coordination, maintenance, customer needs और business priorities भी software development का अहम हिस्सा हैं। केवल mathematical brilliance से great product नहीं बनता। उसी तरह केवल AI tools के सहारे भी long-term quality software नहीं बनता।
इसलिए संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है। fundamentals की वापसी का मतलब यह नहीं कि practical skills की जरूरत खत्म हो गई। बल्कि इसका मतलब यह है कि practical skills को अब deeper reasoning के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
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