मंदाडी(Mandaadi) मूवी रिव्यू हिंदी में — सूरी, सुहास और महिमा नांबियार स्टारर इस बोट रेसिंग ड्रामा की पूरी कहानी, परफॉर्मेंस, टेक्निकल पहलू, रेटिंग और वर्डिक्ट जानें।

Table of Contents
Table of Contents
Mandaadi Review: समुद्री दुनिया की रोमांचक कहानी में चमके सूरी
रिलीज़ डेट: 10 सितंबर 2026 डायरेक्टर: मथिमारन पुगाज़ेंधी स्टार कास्ट: सूरी, सुहास, महिमा नांबियार, सत्यराज म्यूज़िक: जी.वी. प्रकाश कुमार सिनेमैटोग्राफी: एस.आर. कथिर एडिटिंग: प्रदीप ई. राघव प्रोड्यूसर: एल्रेड कुमार क्रिएटिव प्रोड्यूसर: वेत्रिमारन बजट: लगभग ₹75 करोड़ रनटाइम: 154 मिनट भाषा: तमिल बैनर: आरएस इन्फोटेनमेंट
शुरुआत में
Mandaadi Review in Hindi,10 सितंबर 2026 को तमिल सिनेमा में एक नई और अनोखी फिल्म रिलीज़ हुई, जिसका नाम है “मंदाडी” (अंग्रेज़ी में इसका मतलब निकलता है “Sea Wanderer” यानी समुद्र का यात्री)। यह फिल्म एक ऐसे विषय पर बनी है जो अब तक भारतीय सिनेमा में बहुत कम देखने को मिला है — तटीय इलाकों में होने वाली पारंपरिक नाव दौड़ यानी बोट रेसिंग। डायरेक्टर मथिमारन पुगाज़ेंधी ने इस फिल्म के ज़रिए मछुआरों के जीवन, उनकी जड़ों से जुड़ी संस्कृति, और समुद्र किनारे बसे समुदायों की रोज़मर्रा की जद्दोजहद को पर्दे पर उतारने की कोशिश की है। फिल्म को मशहूर डायरेक्टर वेत्रिमारन का क्रिएटिव सपोर्ट भी मिला है, जिससे इस प्रोजेक्ट को लेकर पहले से ही दर्शकों में उत्सुकता थी।
फिल्म की कहानी और सेटिंग जितनी अलग है, उतनी ही चर्चा इसके एक्टर्स के परफॉर्मेंस को लेकर भी हो रही है। खासतौर पर सूरी, जो अब तक ज़्यादातर कॉमेडी और सपोर्टिंग रोल्स के लिए जाने जाते थे, इस फिल्म में एक दमदार लीड हीरो के रूप में नज़र आए हैं। वहीं तेलुगु और कन्नड़ सिनेमा में अपनी पहचान बना चुके एक्टर सुहास ने इस फिल्म से तमिल सिनेमा में डेब्यू किया है, और वो भी एक नेगेटिव रोल में।
कहानी क्या है
मंदाडी की कहानी समुद्र किनारे बसे एक मछुआरा समुदाय के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी का केंद्र बिंदु हैं मुथुकाली (सूरी) और साट्टापुली (सुहास) के बीच की दुश्मनी, जो पारंपरिक “रस्सी के खेल” यानी नाव दौड़ की प्रतियोगिता से जुड़ी है। मुथुकाली एक निडर मछुआरा है, जो खतरनाक समुद्री लहरों, स्थानीय राजनीति के दांवपेच, और अपनी इज़्ज़त की लड़ाई के बीच अपना रास्ता बनाने की कोशिश करता है। मंदाडी फिल्म की कहानी सिर्फ प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें परिवार, दोस्ती, भरोसे के टूटने और दोबारा मौका मिलने जैसे भावनात्मक पहलू भी शामिल हैं।
फिल्म के दूसरे हाफ में एक फ्लैशबैक पोर्शन आता है, जिसमें काली, पुली और उनके कोच सत्यराज के बीते हुए रिश्तों को दिखाया गया है। यह हिस्सा दोनों मुख्य किरदारों की दुश्मनी की जड़ों को समझाने की कोशिश करता है। क्लाइमैक्स में एक बड़ा बोट रेस सीक्वेंस है, जिसे ज़्यादातर समीक्षकों ने फिल्म का सबसे दमदार हिस्सा बताया है।
परफॉर्मेंस की बात करें तो
सूरी को लगभग हर रिव्यू में फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बताया गया है। उन्होंने मुथुकाली के किरदार में एक ज़मीनी और असरदार परफॉर्मेंस दी है, और पूरी फिल्म का भार अपने कंधों पर उठाया है। समीक्षकों का कहना है कि जब भी कहानी थोड़ी सुस्त पड़ती है, सूरी की मौजूदगी ही दर्शकों को स्क्रीन से जोड़े रखती है। उनकी स्क्रीन प्रेज़ेंस को “मास हीरो” के लेवल का बताया गया है, जो उनकी अब तक की फिल्मोग्राफी से अलग है।
हालांकि कुछ समीक्षकों का यह भी मानना है मंदाडी कि उनके इमोशनल और रोमांटिक सीन्स उतने प्रभावशाली नहीं बन पाए, जितने उनकी पिछली फिल्मों में देखने को मिले थे। साथ ही, कुछ का कहना है कि उनके किरदार में कॉमेडी की गुंजाइश कम रखी गई, जो उनकी ताकत मानी जाती है।
सुहास का यह तमिल डेब्यू है, और उन्होंने विलेन साट्टापुली के रोल में एक खतरनाक और दमदार छाप छोड़ी है। उनकी स्क्रीन प्रेज़ेंस और डायलॉग डिलीवरी को सराहा गया है, और सूरी के साथ उनकी जोड़ी को कहानी की दुश्मनी में वज़न देने वाला बताया गया है। हालांकि कुछ समीक्षाओं में यह शिकायत भी है कि उनके किरदार की लेखनी उतनी गहराई वाली नहीं है, जिससे उनका किरदार दर्शकों पर उतना गहरा असर नहीं छोड़ पाता जितना छोड़ सकता था।
महिमा नांबियार ने सपोर्टिंग रोल में खासतौर पर इमोशनल सीन्स में अच्छा प्रभाव छोड़ा है। सत्यराज, जो कोच मुनी के किरदार में हैं, कहानी में सही तरीके से फिट बैठते हैं, लेकिन कई समीक्षकों का मानना है कि उनके स्टार पावर का पूरा इस्तेमाल नहीं किया गया और उनका किरदार अंडरयूटिलाइज़्ड रह गया।
टेक्निकल पहलू
मंदाडी फिल्म की सिनेमैटोग्राफी, खासतौर पर समुद्र के बीच फिल्माए गए सीक्वेंस, काफी सराही जा रही है। एस.आर. कथिर के कैमरा वर्क ने फिल्म को एक कच्चा और असली फील दिया है। बोट रेसिंग के सीन्स को असली लोकेशंस पर शूट किया गया है, जिससे ये सीक्वेंस और भी प्रभावशाली बन गए हैं।
जी.वी. प्रकाश कुमार के म्यूज़िक और बैकग्राउंड स्कोर को लेकर समीक्षकों की राय बंटी हुई है। कुछ रिव्यूज़ में बीजीएम को रेस सीक्वेंस के दौरान “शानदार” और सीन्स को उठाने वाला बताया गया है, जबकि कुछ अन्य समीक्षकों का कहना है कि म्यूज़िक फिल्म की सबसे कमज़ोर कड़ी है और बैकग्राउंड स्कोर भुलाने लायक है, जो सीन्स के असर को बढ़ाने में नाकाम रहा।
फिल्म के प्लस पॉइंट्स
- बोट रेसिंग सीक्वेंस: लगभग हर समीक्षा में इसे फिल्म की जान बताया गया है। ग्रैंड स्केल पर शूट किए गए ये सीन्स दर्शकों को एक बिल्कुल नया स्पोर्ट्स एक्सपीरियंस देते हैं, जो भारतीय सिनेमा में पहले शायद ही देखने को मिला हो।
- सूरी का परफॉर्मेंस: एक बार फिर उनकी एक्टिंग और स्क्रीन प्रेज़ेंस फिल्म का सबसे मज़बूत पहलू मानी जा रही है।
- इंटरवल एक्शन ब्लॉक: कहानी के केंद्रीय संघर्ष को तीव्रता देने वाला यह हिस्सा भी काफी सराहा गया है।
- असली लोकेशंस पर शूटिंग: समुद्र और तटीय इलाकों की सच्चाई को पर्दे पर लाने की मेहनत साफ झलकती है।
- सुहास का डेब्यू: तमिल सिनेमा में उनकी शुरुआत को एक अच्छी शुरुआत माना जा रहा है।
फिल्म की कमज़ोरियां
- कहानी की प्रेडिक्टेबिलिटी: दो दोस्तों के दुश्मन बनने की कहानी नई नहीं है, और कई समीक्षकों ने इसे पुराने ढांचे पर बना हुआ बताया है।
- पहला हाफ: कुछ समीक्षाओं के मुताबिक फिल्म की शुरुआत धीमी और खिंची हुई लगती है, जिसमें कई ऐसे सीन्स हैं जो कहानी को आगे बढ़ाने में ज़्यादा मदद नहीं करते।
- भावनात्मक गहराई की कमी: मुख्य किरदारों की टूटी हुई दोस्ती और उनके बीच की दुश्मनी की जड़ों को स्क्रिप्ट में उतनी गहराई से नहीं दिखाया गया, जितना ज़रूरी था। इस वजह से क्लाइमैक्स के हाई-स्टेक ड्रामा का असर कुछ हद तक कमज़ोर पड़ जाता है।
- रोमांटिक ट्रैक: सूरी और महिमा नांबियार के बीच की लव स्टोरी को कमज़ोर बताया गया है, जो कहानी में उतना कनेक्ट नहीं कर पाती।
- सत्यराज का किरदार: उनके स्टार पावर के बावजूद उनके रोल को छोटा और कम इस्तेमाल किया गया बताया जा रहा है।
- म्यूज़िक: जैसा ऊपर बताया गया, संगीत को लेकर मिली-जुली राय है, और कुछ समीक्षकों के लिए यह फिल्म की सबसे बड़ी कमी रही।
आलोचकों की रेटिंग
फिल्म को लेकर समीक्षकों की राय बंटी हुई नज़र आ रही है:
- 123telugu.com ने फिल्म को 2.75/5 रेटिंग दी है, और इसे “प्रॉमिसिंग प्रीमाइज़, अनईवन एग्ज़िक्यूशन” यानी अच्छा आइडिया लेकिन कमज़ोर क्रियान्वयन बताया है।
- tracktollywood.com ने फिल्म को 2.5/5 रेटिंग दी है, और इसे “स्ट्रॉन्ग फर्स्ट हाफ, वीक सेकंड हाफ” कहा है।
- कुछ अन्य समीक्षाओं में फिल्म के पहले हाफ को धीमा और दूसरे हाफ को बेहतर बताया गया है, यानी अलग-अलग समीक्षकों की राय में पहला और दूसरा हाफ दोनों को लेकर विरोधाभास देखने को मिल रहा है — यह इस बात का संकेत है कि फिल्म की गति (पेसिंग) को लेकर दर्शकों और समीक्षकों में एकराय नहीं बन पाई है।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया, खासतौर पर एक्स (पूर्व ट्विटर) पर, फिल्म को लेकर आम दर्शकों की प्रतिक्रिया समीक्षकों की तुलना में कहीं ज़्यादा सकारात्मक रही है। कई यूज़र्स ने फिल्म के बोट रेसिंग सीक्वेंस, विज़ुअल्स और इंटरवल ब्लॉक की जमकर तारीफ की है। कुछ लोगों ने इसे सूरी के करियर की एक बड़ी छलांग बताया है, और उनके “मास हीरो” वाले अवतार को पसंद किया है। दूसरी ओर, कहानी की प्रेडिक्टेबिलिटी और क्लीशे कॉन्फ्लिक्ट्स को लेकर आलोचना भी सामने आई है।
कुल मिलाकर, मंदाडी कैसी फिल्म है
अगर एक लाइन में कहें, तो “मंदाडी” एक ऐसी फिल्म है जो अपने अनोखे विषय और सूरी के दमदार परफॉर्मेंस की वजह से ध्यान खींचती है, लेकिन स्क्रिप्ट की कमज़ोरियों की वजह से पूरी तरह प्रभावित नहीं कर पाती। बोट रेसिंग जैसा नया और ताज़ा विषय चुनने के लिए डायरेक्टर मथिमारन पुगाज़ेंधी तारीफ के हकदार हैं, और तकनीकी तौर पर भी फिल्म कई जगहों पर प्रभावशाली है — खासतौर पर सिनेमैटोग्राफी और एक्शन सीक्वेंस के मामले में।
लेकिन जब बात आती है भावनात्मक गहराई और किरदारों के बीच के रिश्तों को ठीक से स्थापित करने की, तो फिल्म वहां थोड़ी पीछे रह जाती है। दो दोस्तों की दुश्मनी वाला ट्रैक भले ही नया न हो, लेकिन अगर इसे बेहतर तरीके से लिखा जाता, तो फिल्म का असर कहीं ज़्यादा गहरा हो सकता था।
कुल मिलाकर, अगर आप एक अलग तरह की स्पोर्ट्स ड्रामा देखना चाहते हैं, जिसमें दमदार एक्शन, शानदार विज़ुअल्स और सूरी का एक नया अवतार देखने को मिले, तो “मंदाडी” एक बार देखी जा सकने वाली फिल्म है। हालांकि जिन दर्शकों को कहानी और स्क्रिप्ट में गहराई की तलाश रहती है, उनके लिए यह फिल्म शायद उतनी संतोषजनक साबित न हो।
आखिर में
“मंदाडी” तमिल सिनेमा में एक नए विषय को लेकर आने की एक ईमानदार कोशिश है। भले ही स्क्रिप्ट के स्तर पर यह फिल्म हर जगह पूरी तरह सफल न हो पाई हो, लेकिन इसकी सिनेमैटोग्राफी, बोट रेसिंग सीक्वेंस और सूरी का परफॉर्मेंस इसे थिएटर में देखने लायक बनाते हैं। वेत्रिमारन जैसे डायरेक्टर का इस प्रोजेक्ट से जुड़ना भी यह दिखाता है कि फिल्म इंडस्ट्री में नए और अलग विषयों को लेकर अब भी प्रयोग हो रहे हैं, और यही तमिल सिनेमा की सबसे बड़ी खूबियों में से एक है।
अगर आपने “मंदाडी” देखी है, तो कमेंट में बताइए — आपको फिल्म का कौन सा हिस्सा सबसे ज़्यादा पसंद आया, बोट रेसिंग सीक्वेंस या सूरी का परफॉर्मेंस?
1 thought on “Breaking ,Mandaadi Review in Hindi 2026: सूरी की समुद्री स्पोर्ट्स ड्रामा में दमदार वापसी”