Stock Market Crash, Accenture की कमजोर Revenue Guidance के बाद भारतीय IT सेक्टर में भारी बिकवाली हुई। TCS, Infosys, Wipro समेत कई शेयर गिरे और निवेशकों को ₹2 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। जानिए पूरी रिपोर्ट।

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Infosys Share Price भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार का कारोबारी सत्र आईटी (IT) सेक्टर के निवेशकों के लिए बेहद निराशाजनक साबित हुआ। बाजार खुलते ही आईटी कंपनियों के शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली, जिसके चलते निवेशकों की करीब ₹2 लाख करोड़ की संपत्ति कुछ ही घंटों में साफ हो गई। इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण ग्लोबल टेक्नोलॉजी और कंसल्टिंग कंपनी Accenture द्वारा जारी किया गया सतर्क बिजनेस आउटलुक रहा, जिसने न केवल अमेरिकी बाजार बल्कि भारतीय आईटी सेक्टर की संभावनाओं को लेकर भी चिंता बढ़ा दी।
Accenture ने अपने पूरे वित्तीय वर्ष के Revenue Growth Guidance की ऊपरी सीमा को कम कर दिया और संकेत दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर उत्साह जरूर है, लेकिन कंपनियां अभी भी टेक्नोलॉजी पर अतिरिक्त खर्च करने से बच रही हैं। इसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ा, क्योंकि उनका बड़ा कारोबार अमेरिका और यूरोप के क्लाइंट्स से आता है।
जैसे ही यह खबर बाजार में पहुंची, TCS, Infosys, Wipro, HCLTech, Tech Mahindra जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर 3% से 6% तक टूट गए। इसके साथ ही मिडकैप आईटी कंपनियों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली। निवेशकों को डर सताने लगा कि यदि वैश्विक स्तर पर आईटी खर्च धीमा रहता है, तो आने वाली तिमाहियों में भारतीय कंपनियों की आय और मुनाफे पर भी दबाव बढ़ सकता है।
भारतीय आईटी उद्योग देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। लाखों लोगों को रोजगार देने वाला यह सेक्टर विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में जब वैश्विक स्तर पर मांग कमजोर होने के संकेत मिलते हैं, तो उसका असर केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है।
एक समय ऐसा माना जा रहा था कि AI टेक्नोलॉजी के आने से आईटी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे और टेक्नोलॉजी पर खर्च तेजी से बढ़ेगा। लेकिन Accenture की ताजा टिप्पणी ने इस धारणा को चुनौती दी है। कंपनी का कहना है कि ग्राहक नए बजट जारी करने के बजाय मौजूदा बजट को ही AI प्रोजेक्ट्स की ओर स्थानांतरित कर रहे हैं। इसका मतलब यह है कि फिलहाल AI अतिरिक्त कमाई का बड़ा स्रोत नहीं बन पा रहा है।
यही कारण है कि भारतीय शेयर बाजार में आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। निवेशकों को चिंता है कि यदि वैश्विक कंपनियां अपने टेक्नोलॉजी बजट में कटौती जारी रखती हैं, तो भारतीय आईटी कंपनियों के ऑर्डर, राजस्व और मुनाफे की वृद्धि पर भी असर पड़ेगा।
Accenture की चेतावनी के बाद भारतीय IT शेयरों में क्यों आई भारी गिरावट?
भारतीय आईटी सेक्टर की सफलता काफी हद तक विदेशी बाजारों पर निर्भर करती है। अमेरिका और यूरोप की बड़ी कंपनियां अपने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, क्लाउड सर्विस, साइबर सिक्योरिटी और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट का बड़ा हिस्सा भारतीय कंपनियों को आउटसोर्स करती हैं। इसलिए जब Accenture जैसी वैश्विक कंपनी अपने भविष्य के बिजनेस को लेकर सतर्क संकेत देती है, तो उसका असर भारतीय बाजार पर तुरंत दिखाई देता है।
Accenture ने अपने तिमाही नतीजों में बताया कि कंपनी का राजस्व बढ़ा है, लेकिन भविष्य में ग्रोथ की रफ्तार पहले के अनुमान से कम रह सकती है। कंपनी ने पूरे वर्ष की Revenue Growth Guidance को घटा दिया। इससे निवेशकों को यह संकेत मिला कि वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी खर्च अभी भी अपेक्षित गति से नहीं बढ़ रहा है।
इससे भी ज्यादा चिंता की बात कंपनी की आउटसोर्सिंग बुकिंग रही। रिपोर्ट के अनुसार, Accenture की आउटसोर्सिंग बुकिंग में सालाना आधार पर लगभग 15% की गिरावट दर्ज की गई। भारतीय आईटी कंपनियों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण संकेत है, क्योंकि उनका मुख्य व्यवसाय भी आउटसोर्सिंग सेवाओं पर आधारित है। यदि बड़े वैश्विक क्लाइंट नए प्रोजेक्ट्स को टालते हैं या उनका आकार छोटा कर देते हैं, तो भारतीय कंपनियों की आय प्रभावित होना तय है।
Stock Market Today विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में कंपनियां नए डिजिटल प्रोजेक्ट शुरू करने की बजाय लागत कम करने पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, ऊंची ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनाव के कारण कॉर्पोरेट कंपनियां अपने खर्चों की समीक्षा कर रही हैं। ऐसे माहौल में टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स पर होने वाला विवेकाधीन (Discretionary) खर्च सबसे पहले प्रभावित होता है।
AI को लेकर भी बाजार की उम्मीदों को झटका लगा। पिछले कुछ वर्षों से यह माना जा रहा था कि Generative AI आईटी सेक्टर के लिए नई कमाई का बड़ा जरिया बनेगा। लेकिन Accenture ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ग्राहक अतिरिक्त बजट नहीं दे रहे हैं। वे पुराने बजट का ही उपयोग AI प्रोजेक्ट्स में कर रहे हैं। इसका मतलब यह है कि AI की वजह से नई मांग बनने में अभी समय लग सकता है।
भारतीय निवेशकों ने इन संकेतों को गंभीरता से लिया। बाजार खुलते ही बड़े संस्थागत निवेशकों ने आईटी शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी। नतीजतन, केवल लार्ज-कैप कंपनियां ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप टेक्नोलॉजी शेयर भी दबाव में आ गए।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल आईटी सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती नई डील्स की गति बनाए रखना है। यदि आने वाले कुछ महीनों में वैश्विक कंपनियां अपने टेक्नोलॉजी निवेश बढ़ाती हैं, तो भारतीय आईटी सेक्टर दोबारा मजबूत वापसी कर सकता है। लेकिन यदि खर्च में सुस्ती बनी रहती है, तो कंपनियों की आय और शेयर कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है।
हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय केवल घबराने का नहीं, बल्कि कंपनियों के बिजनेस मॉडल, ऑर्डर बुक, AI रणनीति और वित्तीय मजबूती का गहराई से विश्लेषण करने का भी है। मजबूत बैलेंस शीट और विविध ग्राहक आधार वाली कंपनियां ऐसी परिस्थितियों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
TCS, Infosys, Wipro समेत किन कंपनियों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर?
Accenture की कमजोर Revenue Guidance और वैश्विक आईटी खर्च को लेकर जताई गई चिंता का असर भारतीय शेयर बाजार में तुरंत दिखाई दिया। बाजार खुलते ही आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली शुरू हो गई और निवेशकों ने बड़ी संख्या में अपने शेयर बेचना शुरू कर दिया। इसका सबसे ज्यादा प्रभाव देश की अग्रणी आईटी कंपनियों पर पड़ा, जिनका बड़ा कारोबार अमेरिका और यूरोप जैसे विदेशी बाजारों से आता है।
सबसे पहले टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयर दबाव में आए। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी होने के कारण TCS को निवेशक पूरे सेक्टर का संकेतक मानते हैं। Accenture की टिप्पणी के बाद TCS के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे कंपनी के मार्केट कैपिटलाइजेशन में भी बड़ी कमी आई। निवेशकों की चिंता यह थी कि यदि वैश्विक कंपनियां टेक्नोलॉजी पर खर्च कम करती हैं, तो इसका सीधा असर TCS के नए प्रोजेक्ट्स और राजस्व वृद्धि पर पड़ सकता है।
इसी तरह Infosys के शेयरों में भी तेज गिरावट देखने को मिली। Infosys का बड़ा ग्राहक आधार उत्तरी अमेरिका और यूरोप में है। ऐसे में जब वैश्विक कंपनियां डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स पर खर्च कम करने के संकेत देती हैं, तो Infosys जैसी कंपनियों के लिए नए कॉन्ट्रैक्ट हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यही कारण रहा कि निवेशकों ने शेयरों में मुनाफावसूली शुरू कर दी।
HCLTech, Tech Mahindra और Wipro भी इस बिकवाली से अछूते नहीं रहे। इन कंपनियों के शेयरों में भी 3% से 6% तक की गिरावट दर्ज की गई। खासतौर पर Wipro और Tech Mahindra जैसी कंपनियों पर दबाव इसलिए अधिक दिखाई दिया क्योंकि इनकी आय का बड़ा हिस्सा विदेशी ग्राहकों से आने वाले प्रोजेक्ट्स पर निर्भर करता है।

केवल बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि Coforge, Hexaware Technologies, Sonata Software, Tata Elxsi और KPIT Technologies जैसी मिड-कैप आईटी कंपनियों के शेयरों में भी तेज गिरावट आई। इससे साफ संकेत मिला कि निवेशकों की चिंता केवल किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारतीय आईटी सेक्टर को लेकर नकारात्मक धारणा बन गई है।
विदेशी बाजारों में भी इसका असर साफ दिखाई दिया। अमेरिकी शेयर बाजार में Accenture के शेयरों में लगभग 15% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं Infosys ADR, Wipro ADR, Cognizant, IBM और फ्रांस की आईटी कंपनी Capgemini के शेयरों में भी उल्लेखनीय गिरावट आई। इससे यह स्पष्ट हो गया कि यह केवल भारतीय बाजार की समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक टेक्नोलॉजी सेक्टर में बढ़ती चिंता का संकेत है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि आने वाली तिमाहियों में वैश्विक मांग कमजोर बनी रहती है, तो भारतीय आईटी कंपनियों की आय, मार्जिन और मुनाफे पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि जिन कंपनियों का ग्राहक आधार विविध है और जो AI, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी तथा डिजिटल इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में मजबूत निवेश कर रही हैं, उनके लिए भविष्य में बेहतर अवसर भी मौजूद रहेंगे।
AI के बढ़ते प्रभाव के बावजूद IT सेक्टर पर क्यों बढ़ा दबाव?
पिछले दो वर्षों में दुनिया भर में Artificial Intelligence (AI) सबसे चर्चित तकनीक बनकर उभरी है। Microsoft, Google, OpenAI, Meta और Amazon जैसी बड़ी कंपनियां AI पर अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं। इसी वजह से निवेशकों को उम्मीद थी कि AI भारतीय आईटी कंपनियों के लिए भी नई कमाई और तेज विकास का बड़ा अवसर बनेगा।
लेकिन Accenture के ताजा बयान ने इस उम्मीद को कुछ हद तक झटका दिया। कंपनी ने साफ कहा कि ग्राहक AI में रुचि तो दिखा रहे हैं, लेकिन वे इसके लिए अलग से अतिरिक्त बजट जारी नहीं कर रहे हैं। अधिकांश कंपनियां अपने पुराने टेक्नोलॉजी बजट को ही AI प्रोजेक्ट्स की ओर स्थानांतरित कर रही हैं। इसका मतलब यह है कि AI फिलहाल नई मांग पैदा करने के बजाय मौजूदा खर्च का पुनर्वितरण कर रहा है।
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इसके अलावा, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी आईटी सेक्टर पर दबाव बढ़ाने का बड़ा कारण है। ऊंची ब्याज दरें, महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा लागत नियंत्रण की रणनीति के चलते नए डिजिटल प्रोजेक्ट्स की गति धीमी पड़ गई है। ऐसे माहौल में कंपनियां केवल उन्हीं प्रोजेक्ट्स पर निवेश कर रही हैं जो तुरंत लाभ दे सकें।
Accenture ने यह भी बताया कि उसकी Outsourcing Bookings में लगभग 15% की गिरावट आई है। भारतीय आईटी उद्योग का बड़ा हिस्सा आउटसोर्सिंग सेवाओं पर आधारित है। यदि वैश्विक कंपनियां आउटसोर्सिंग कॉन्ट्रैक्ट कम करती हैं, तो इसका असर भारतीय कंपनियों की आय और भविष्य की ग्रोथ पर पड़ना स्वाभाविक है।
हालांकि तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। Accenture की CEO Julie Sweet ने यह भी कहा कि AI आधारित बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। कंपनी AI, Cloud Computing, Cyber Security और Data Services जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए बड़े निवेश की योजना बना रही है।
यानी अल्पकाल में दबाव जरूर दिखाई दे रहा है, लेकिन दीर्घकाल में AI आईटी उद्योग के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जो भारतीय कंपनियां समय रहते AI आधारित समाधान, ऑटोमेशन, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सिक्योरिटी सेवाओं में निवेश बढ़ाएंगी, वे भविष्य में प्रतिस्पर्धा में आगे रह सकती हैं।
फिलहाल निवेशकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह समझना है कि मौजूदा गिरावट अस्थायी है या लंबे समय तक चलने वाली। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन मजबूत कंपनियां बदलती तकनीक और नई मांग के अनुसार खुद को ढालकर फिर से विकास की राह पकड़ सकती हैं।

क्या भारतीय IT सेक्टर में निवेश करना अभी सही रहेगा? एक्सपर्ट्स की राय
Accenture की कमजोर Revenue Guidance के बाद भारतीय आईटी सेक्टर में आई गिरावट ने निवेशकों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या यह केवल एक अस्थायी करेक्शन है या आने वाले समय में आईटी कंपनियों के लिए चुनौतियां और बढ़ सकती हैं?
शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि किसी भी सेक्टर में गिरावट आने के बाद घबराकर निवेश से बाहर निकलना हमेशा सही रणनीति नहीं होती। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि गिरावट की वजह क्या है और उसका असर कितना लंबा रह सकता है। इस मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल भारतीय आईटी सेक्टर पर दबाव मुख्य रूप से वैश्विक मांग में कमजोरी, आउटसोर्सिंग कॉन्ट्रैक्ट्स की धीमी गति और कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा टेक्नोलॉजी खर्च सीमित रखने के कारण दिखाई दे रहा है।
ब्रोकरेज हाउस HSBC ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि Accenture की गाइडेंस में कटौती यह संकेत देती है कि वैश्विक आईटी डिमांड अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुई है। हालांकि उनका मानना है कि इसका बड़ा कारण पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी है, न कि केवल AI का प्रभाव।
Nomura ने भी निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। ब्रोकरेज का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है, तो वित्त वर्ष 2027 की शुरुआती तिमाहियों में नई डील्स और आईटी खर्च पर असर देखने को मिल सकता है। हालांकि Nomura ने Infosys और Cognizant जैसी मजबूत कंपनियों को अपनी पसंदीदा बड़ी आईटी कंपनियों में शामिल रखा है, जबकि मिडकैप में Coforge और eClerx जैसी कंपनियों को बेहतर संभावनाओं वाला माना है।
वहीं Jefferies ने सबसे अधिक सतर्क रुख अपनाया है। ब्रोकरेज का मानना है कि यदि Accenture भविष्य में एक बार फिर अपनी गाइडेंस घटाती है, तो भारतीय आईटी कंपनियों की कमाई के अनुमान और नीचे आ सकते हैं। Jefferies ने यह भी कहा कि Nifty IT Index में पहले से बड़ी गिरावट आने के बावजूद सेक्टर में जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
हालांकि दूसरी ओर कुछ सकारात्मक संकेत भी हैं। Accenture ने स्पष्ट किया है कि AI आधारित प्रोजेक्ट्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और डेटा सर्विसेज की मांग लगातार बढ़ रही है। कंपनी ने इन क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े निवेश की योजना भी बनाई है। इससे यह संकेत मिलता है कि लंबी अवधि में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और AI भारतीय आईटी कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा कर सकते हैं।
निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में निवेशकों को केवल शेयर की कीमत देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। कंपनी की ऑर्डर बुक, ग्राहक आधार, नकदी की स्थिति, AI रणनीति और भविष्य की विकास योजना का विश्लेषण करना अधिक महत्वपूर्ण है। मजबूत बैलेंस शीट और वैश्विक स्तर पर विविध ग्राहक रखने वाली कंपनियां बाजार में आई अस्थायी गिरावट से अपेक्षाकृत जल्दी उबर सकती हैं।
यदि आपका निवेश दृष्टिकोण लंबी अवधि का है, तो यह समय घबराने के बजाय कंपनियों के मूलभूत प्रदर्शन (Fundamentals) पर ध्यान देने का हो सकता है। हालांकि किसी भी निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें।
Calcusion
Stock Market Crash ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारतीय शेयर बाजार वैश्विक घटनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। Accenture जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनी की एक गाइडेंस में बदलाव का असर कुछ ही घंटों में भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया और निवेशकों की लगभग ₹2 लाख करोड़ की संपत्ति प्रभावित हुई।
हालांकि वर्तमान स्थिति चुनौतियों से भरी हुई है, लेकिन इसे केवल नकारात्मक दृष्टि से देखना उचित नहीं होगा। AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्र आने वाले वर्षों में आईटी उद्योग के विकास की नई दिशा तय कर सकते हैं। फिलहाल समस्या यह है कि इन अवसरों का वित्तीय लाभ कंपनियों के परिणामों में दिखाई देने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।
भारतीय आईटी कंपनियां पहले भी कई वैश्विक आर्थिक संकटों का सफलतापूर्वक सामना कर चुकी हैं। इसलिए यह संभव है कि जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और कंपनियां दोबारा टेक्नोलॉजी निवेश बढ़ाएंगी, वैसे-वैसे भारतीय आईटी सेक्टर भी फिर से विकास की राह पर लौट आएगा।
निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे अफवाहों के आधार पर नहीं बल्कि कंपनियों के वास्तविक प्रदर्शन, वित्तीय स्थिति और दीर्घकालिक संभावनाओं को देखकर निर्णय लें। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन मजबूत कंपनियां समय के साथ फिर से बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं।
(FAQ)
1. Stock Market Crash की सबसे बड़ी वजह क्या रही?
Accenture द्वारा Revenue Growth Guidance घटाने और वैश्विक IT खर्च में कमजोरी के संकेत देने के बाद निवेशकों ने आईटी शेयरों में भारी बिकवाली की।
2. किन भारतीय IT कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा गिरे?
TCS, Infosys, Wipro, HCLTech, Tech Mahindra सहित कई बड़ी और मिडकैप आईटी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
3. क्या AI भारतीय IT सेक्टर के लिए खतरा है?
नहीं। AI लंबे समय में अवसर है, लेकिन फिलहाल कंपनियां नए बजट जारी करने के बजाय पुराने बजट को AI प्रोजेक्ट्स में स्थानांतरित कर रही हैं।
4. क्या अभी IT सेक्टर में निवेश करना चाहिए?
यदि आपका निवेश लंबी अवधि का है और आप मजबूत Fundamentals वाली कंपनियां चुनते हैं, तो अवसर मिल सकते हैं। निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की राय लेना उचित रहेगा।
5. क्या IT सेक्टर जल्द रिकवर कर सकता है?
यह काफी हद तक वैश्विक आर्थिक स्थिति, नई डील्स, कॉर्पोरेट टेक्नोलॉजी खर्च और AI आधारित प्रोजेक्ट्स की गति पर निर्भर करेगा।
(CTA)
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