वियतनाम(vietnam) सरकार के निर्देश 10/CT-TTg और उद्योग-व्यापार मंत्रालय के निर्णय 1126 से जानें रूफटॉप सोलर योजना के लक्ष्य, सब्सिडी, चुनौतियां और भारत से तुलना।

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उद्योग और व्यापार मंत्रालय के नए निर्देश की पूरी कहानी
एशिया में ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में वियतनाम(vietnam) ने एक बड़ा और महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। बढ़ती गर्मी, चरम मांग के दौरान बिजली संकट, और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की ज़रूरत के बीच वियतनाम सरकार ने घरों, सरकारी कार्यालयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की छतों पर सौर ऊर्जा प्रणाली (रूफटॉप सोलर पावर – RSP) लगाने को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक नीति ढांचा तैयार किया है।
इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह द्वारा जारी निर्देश संख्या 10/CT-TTg से हुई, जिसे बाद में उद्योग और व्यापार मंत्रालय (Ministry of Industry and Trade – MOIT) ने अपनी कार्य योजना और निर्णय संख्या 1126 के ज़रिए और आगे बढ़ाया। इस लेख में हम इस पूरी नीति, इसके लक्ष्यों, कार्यान्वयन की रणनीति, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं को विस्तार से समझेंगे।
वियतनाम को इस निर्देश की ज़रूरत क्यों पड़ी?
वियतनाम पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से औद्योगीकरण और शहरीकरण से गुज़र रहा है। इसके साथ ही बिजली की मांग भी हर साल तेज़ी से बढ़ रही है। खासकर गर्मियों के महीनों — अप्रैल, मई, जून और जुलाई — में एयर कंडीशनिंग और औद्योगिक उपयोग के चलते बिजली की मांग चरम पर पहुंच जाती है, जिससे राष्ट्रीय ग्रिड पर भारी दबाव पड़ता है। पारंपरिक बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने में समय और भारी निवेश दोनों लगते हैं, ऐसे में वितरित ऊर्जा स्रोतों (Distributed Energy Resources) जैसे रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देना एक व्यावहारिक और तेज़ समाधान माना जा रहा है।
इसके अलावा, वियतनाम ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कार्बन उत्सर्जन कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धताएं जताई हैं। रूफटॉप सोलर न केवल बिजली की मांग-आपूर्ति संतुलन बनाने में मदद करता है, बल्कि यह ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लॉस को भी कम करता है क्योंकि बिजली उत्पादन स्थल के पास ही उपयोग हो जाती है।
निर्देश संख्या 10/CT-TTg: मुख्य प्रावधान
30 मार्च 2026 को प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह ने निर्देश संख्या 10/CT-TTg पर हस्ताक्षर किए, जिसका शीर्षक है “बिजली बचत के कार्यान्वयन को मजबूत करने और छत पर सौर ऊर्जा के विकास पर।” इस निर्देश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. बिजली बचत के लक्ष्य
निर्देश में 2026 के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कुल बिजली खपत में कम से कम 3.0% की बचत का लक्ष्य रखा गया है। वहीं गर्मी के चरम महीनों — अप्रैल से जुलाई तक — के दौरान यह लक्ष्य बढ़ाकर कम से कम 10% कर दिया गया है। यह अंतर इसलिए रखा गया है क्योंकि गर्मियों में बिजली की मांग सबसे ज़्यादा होती है और इसी दौरान ग्रिड पर सबसे अधिक दबाव पड़ता है।
2. डिमांड-साइड मैनेजमेंट और डिमांड रिस्पॉन्स
सरकार डिमांड-साइड मैनेजमेंट (DSM) और डिमांड रिस्पॉन्स (DR) कार्यक्रमों को व्यवस्थित रूप से लागू करना चाहती है, ताकि पीक आवर्स के दौरान लोड शिफ्टिंग की जा सके। लक्ष्य है कि जब भी बिजली आपूर्ति-मांग में असंतुलन का खतरा हो, तब कम से कम 3,000 मेगावाट लोड कम किया जा सके।
3. रूफटॉप सोलर को प्राथमिकता
निर्देश में सेल्फ-प्रोड्यूस्ड, सेल्फ-कंज्यूम्ड (यानी उत्पादित बिजली का खुद ही उपयोग करने वाले) रूफटॉप सोलर सिस्टम के विकास को बढ़ावा देने की बात कही गई है। प्राथमिकता दी जाएगी:
- सरकारी कार्यालयों को
- उत्पादन, व्यावसायिक और सेवा प्रतिष्ठानों को
- और आम घरों को
साथ ही, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के साथ रूफटॉप सोलर को जोड़ने को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि पीक लोड कम हो और स्थानीय स्तर पर ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़े।
4. मात्रात्मक लक्ष्य
यह निर्देश बेहद स्पष्ट और मापने योग्य लक्ष्य तय करता है:
- हर साल लगभग 10% सरकारी कार्यालयों में रूफटॉप सोलर स्थापित हो
- हर साल लगभग 10% घरों में रूफटॉप सोलर स्थापित हो
- या फिर, 2026-2030 की अवधि के लिए प्रांतों/शहरों की रूफटॉप सोलर विकास योजना के तहत निर्धारित कुल क्षमता का 20% हासिल किया जाए
यह दोहरा लक्ष्य रखने से स्थानीय प्रशासन को थोड़ी लचीलापन मिलती है — वे या तो प्रतिशत आधारित लक्ष्य अपना सकते हैं या क्षमता आधारित।
5. स्थानीय निकायों की भूमिका
निर्देश में यह भी कहा गया है कि स्थानीय प्रशासन अपनी वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप रूफटॉप सोलर विकास योजनाएं स्वयं तैयार करें और उन्हें सक्रियता से लागू करें।
6. बैकअप और ऑन-साइट पावर स्रोतों का अधिकतम उपयोग
जब भी बिजली आपूर्ति में कमी का खतरा हो, एजेंसियों, उद्यमों और उत्पादन प्रतिष्ठानों को अपने ऑन-साइट और बैकअप पावर स्रोतों का अधिकतम उपयोग करने के लिए कहा गया है, ताकि राष्ट्रीय ग्रिड पर दबाव कम हो।
7. ट्रांसमिशन लॉस कम करना
वियतनाम इलेक्ट्रिसिटी (EVN) को पूरे पावर सिस्टम में ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लॉस को 6% से नीचे लाने का लक्ष्य दिया गया है।
उद्योग और व्यापार मंत्रालय की भूमिका और निर्णय संख्या 1126
निर्देश 10/CT-TTg जारी होने के बाद उद्योग और व्यापार मंत्रालय (MOIT) को इसके कार्यान्वयन की निगरानी और समन्वय की मुख्य ज़िम्मेदारी सौंपी गई। इसी क्रम में उद्योग और व्यापार उप मंत्री गुयेन होआंग लॉन्ग ने 14 मई 2026 को निर्णय संख्या 1126 पर हस्ताक्षर किए, जिसके ज़रिए मंत्रालय की विस्तृत कार्य योजना को औपचारिक रूप दिया गया।
इस कार्य योजना में शामिल प्रमुख बिंदु हैं:
- आत्मनिर्भर रूफटॉप सोलर ऊर्जा को बढ़ावा: मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि सेल्फ-कंज्यूम्ड रूफटॉप सोलर पावर के विकास को प्राथमिकता दी जाए।
- प्राथमिकता क्षेत्र: सरकारी कार्यालय, उत्पादन इकाइयां, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, सेवा सुविधाएं और घरेलू उपभोक्ता — इन सभी में स्थापना को प्राथमिकता दी जाएगी।
- एकीकृत ऊर्जा भंडारण प्रणाली: पीक आवर लोड को कम करने और स्थानीय बिजली आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए बैटरी स्टोरेज सिस्टम को सोलर पैनल के साथ एकीकृत करने को प्रोत्साहित किया जाएगा।
- निवेश योजना: मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि सरकारी भवनों, कार्यालयों, स्कूलों और अस्पतालों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए निवेश योजना तैयार की जाए, निवेश पूंजी आवंटित की जाए, या निजी निवेश आकर्षित किया जाए।
वित्तीय सहायता और सब्सिडी तंत्र
निर्देश 10/CT-TTg में यह भी उल्लेख है कि वित्त मंत्रालय, उद्योग और व्यापार मंत्रालय तथा वियतनाम के केंद्रीय बैंक (State Bank of Vietnam) के साथ मिलकर एक ऐसी नीति तैयार करने पर काम करेगा, जिसके तहत घरों को रूफटॉप सोलर और बिजली भंडारण प्रणाली लगाने में सहायता दी जा सके। इस प्रस्ताव को अध्ययन के बाद प्रधानमंत्री के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूफटॉप सोलर सिस्टम की शुरुआती लागत आम मध्यम वर्गीय परिवार के लिए अक्सर एक बड़ी बाधा होती है। यदि राज्य की ओर से सब्सिडी, सॉफ्ट लोन, या कर छूट जैसी सुविधाएं मिलती हैं, तो अधिक परिवार इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
कार्यान्वयन में चुनौतियां
हर बड़ी नीति की तरह, इस निर्देश के कार्यान्वयन में भी कई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आई हैं। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, वियतनाम के 34 प्रांतों और शहरों में से केवल 2 ने ही अब तक घरों में रूफटॉप सोलर स्थापना के लिए सहायक नीतियां पूरी तरह जारी की हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि स्थानीय स्तर पर कार्यान्वयन की गति अपेक्षा से काफी धीमी रही है।
इसके जवाब में उद्योग और व्यापार मंत्रालय ने सभी प्रांतों और शहरों से आग्रह किया है कि वे जल्द से जल्द अपनी सहायक नीतियां तैयार करें और लागू करें। मंत्रालय को इस पूरे कार्यक्रम की निगरानी, समन्वय और प्रगति की समीक्षा करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रमुख चुनौतियां इस प्रकार हैं:
- नीतिगत असंगति: अलग-अलग प्रांतों में अलग गति और अलग प्राथमिकताएं होने से एक समान राष्ट्रीय प्रगति में देरी हो रही है।
- वित्तीय बाधाएं: शुरुआती निवेश की लागत, खासकर ग्रामीण और कम आय वाले परिवारों के लिए, एक बड़ी रुकावट है।
- तकनीकी और ग्रिड एकीकरण: बड़ी संख्या में वितरित सौर स्रोतों को ग्रिड में सुरक्षित और स्थिर तरीके से जोड़ना तकनीकी रूप से जटिल है।
- जागरूकता की कमी: कई घरेलू उपभोक्ताओं को अभी भी रूफटॉप सोलर के दीर्घकालिक फायदों, सब्सिडी विकल्पों और स्थापना प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है।
विशेषज्ञों और उद्योग जगत के सुझाव
जैसे-जैसे पीएम सूर्य घर जैसी योजनाओं की तर्ज पर वियतनाम की अगली चरण की नीतिगत संरचना बन रही है, उद्योग जगत के दिग्गजों और विशेषज्ञों ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
- बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम का एकीकरण: केवल सोलर पैनल लगाना काफी नहीं है; इसे बैटरी स्टोरेज के साथ जोड़ने से रात के समय और पीक आवर्स में भी ऊर्जा उपलब्ध रहेगी।
- पूंजीगत सहायता: शुरुआती निवेश को कम करने के लिए सीधी वित्तीय सहायता या सब्सिडी दी जानी चाहिए।
- ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार: अभी तक अधिकांश ध्यान शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों पर केंद्रित है; विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस योजना का दायरा ग्रामीण क्षेत्रों तक भी बढ़ाया जाए।
- नीतिगत निरंतरता: नीतियों में बार-बार अचानक बदलाव से निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों में अनिश्चितता पैदा होती है, इसलिए दीर्घकालिक स्थिरता बनाए रखने की सिफारिश की गई है।
वियतनाम की सौर नीति और भारत की तुलना
भारत में भी रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए समान प्रकार के प्रयास चल रहे हैं, जैसे नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना। इस योजना के तहत भारत में घरों को सब्सिडी सहित रूफटॉप सोलर पैनल लगाने में मदद दी जाती है, और नेट-मीटरिंग जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। दिल्ली जैसे राज्यों में तो कुछ चरणों में पूरी तरह मुफ्त रूफटॉप सोलर प्लांट लगाने की योजनाएं भी शुरू की गई हैं।
वियतनाम और भारत, दोनों देशों की नीतियों में कुछ समानताएं साफ नज़र आती हैं:
- दोनों देश स्पष्ट मात्रात्मक लक्ष्य (जैसे घरों की एक निश्चित प्रतिशत संख्या) तय कर रहे हैं।
- दोनों में वित्तीय सहायता और सब्सिडी तंत्र पर विचार किया जा रहा है।
- दोनों जगह स्थानीय प्रशासन (राज्य/प्रांत स्तर) को कार्यान्वयन की मुख्य ज़िम्मेदारी दी गई है।
- दोनों देश बैटरी स्टोरेज और ग्रिड एकीकरण की चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
हालांकि अंतर भी हैं — भारत में यह पहल MNRE (ऊर्जा मंत्रालय) के अंतर्गत आती है, जबकि वियतनाम में इसका नेतृत्व उद्योग और व्यापार मंत्रालय (जो व्यापक रूप से ऊर्जा नीति भी देखता है) कर रहा है। साथ ही वियतनाम की नीति सीधे तौर पर बिजली बचत और डिमांड मैनेजमेंट के साथ जुड़ी हुई है, जबकि भारत की योजना मुख्यतः सब्सिडी और स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच पर केंद्रित है।
रूफटॉप सोलर अपनाने के फायदे
घरों और व्यवसायों के लिए रूफटॉप सोलर अपनाने के कई ठोस फायदे हैं:
- बिजली बिल में कमी: स्वयं उत्पादित बिजली का उपयोग करने से मासिक बिजली बिल काफी हद तक घट जाता है।
- ऊर्जा आत्मनिर्भरता: ग्रिड पर निर्भरता कम होने से बिजली कटौती के दौरान भी (खासकर बैटरी स्टोरेज के साथ) आपूर्ति बनी रह सकती है।
- पर्यावरण संरक्षण: सौर ऊर्जा एक स्वच्छ, नवीकरणीय स्रोत है, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सीधे योगदान देता है।
- राष्ट्रीय ग्रिड पर दबाव में कमी: वितरित सौर उत्पादन से पीक आवर्स के दौरान ग्रिड पर बोझ कम होता है, जिससे बिजली कटौती और ब्लैकआउट का खतरा घटता है।
- दीर्घकालिक आर्थिक लाभ: शुरुआती निवेश के बावजूद, कुछ वर्षों में सोलर सिस्टम की लागत बिजली बचत के ज़रिए वसूल हो जाती है।
भविष्य की राह
वियतनाम सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है — 2026 से 2030 के बीच देश भर में रूफटॉप सोलर की पहुंच को व्यापक स्तर पर बढ़ाना, बिजली बचत को संस्थागत रूप देना, और नवीकरणीय ऊर्जा को राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा रणनीति का अभिन्न हिस्सा बनाना। इसके लिए आने वाले महीनों में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं:
- वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक द्वारा प्रस्तावित सब्सिडी और सहायता योजना का औपचारिक अनुमोदन
- अधिक प्रांतों और शहरों द्वारा अपनी स्थानीय रूफटॉप सोलर नीतियां जारी करना
- बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम से जुड़ी तकनीकी मानकों और सब्सिडी नीतियों का प्रकाशन
- ग्रामीण क्षेत्रों के लिए विशेष योजनाओं की शुरुआत
यदि यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह न केवल वियतनाम की ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करेगी, बल्कि आम नागरिकों के लिए बिजली की लागत घटाने और पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ी भूमिका निभाएगी।
उद्योग और व्यापार मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नए निर्देश और कार्य योजना, वियतनाम की ऊर्जा नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री के निर्देश संख्या 10/CT-TTg से शुरू हुई यह पहल न केवल बिजली बचत के ठोस लक्ष्य तय करती है, बल्कि घरों, सरकारी कार्यालयों और व्यवसायों में रूफटॉप सोलर की स्थापना को भी प्राथमिकता देती है।
हालांकि कार्यान्वयन की गति में अभी काफी असमानता है — जैसा कि केवल 2 प्रांतों द्वारा नीति पूरी करने के आंकड़े से पता चलता है — लेकिन सरकार की मंशा और स्पष्ट लक्ष्य दिखाते हैं कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र तेज़ी से आगे बढ़ेगा। भारत जैसे देशों के अनुभव से सीखते हुए, यदि वियतनाम वित्तीय सहायता, बैटरी स्टोरेज एकीकरण और नीतिगत स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करता है, तो यह पहल पूरे क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन सकती है।