भारत सरकार ने WhatsApp Username Feature को लेकर Meta को नोटिस जारी किया है। सरकार ने परामर्श प्रक्रिया पूरी होने तक फीचर लॉन्च न करने और तीन दिन में जवाब देने को कहा है।

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सरकार ने Meta को भेजा नोटिस, WhatsApp Username फीचर के रोलआउट पर लगाई रोक; जानिए पूरा मामला
1 जुलाई (PTI) सरकार ने बुधवार को भारत में WhatsApp पर विवादित यूज़रनेम फ़ीचर को लेकर मेटा को नोटिस जारी किया। सूत्रों ने बताया कि सरकार ने मेटा को चेतावनी दी कि इस मुद्दे पर कंसल्टेशन खत्म होने तक इसे रोलआउट न किया जाए। भारत सरकार ने WhatsApp के प्रस्तावित Username Feature को लेकर Meta को नोटिस जारी किया है। सरकार ने कंपनी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस फीचर को भारत में तब तक लॉन्च न किया जाए, जब तक इस विषय पर चल रही परामर्श (Consultation) प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने Meta से तीन दिनों के भीतर इस फीचर से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी मांगी है। भारत WhatsApp के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है, जहां प्लेटफॉर्म के 500 मिलियन (50 करोड़) से अधिक उपयोगकर्ता हैं।
सरकार ने क्या कहा?
सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने भारत में WhatsApp पर यूज़रनेम फ़ीचर के रोलआउट को लेकर मेटा को नोटिस जारी किया है – यह एक बड़ा मार्केट है जहां मैसेजिंग की बड़ी कंपनी के 500 मिलियन से ज़्यादा यूज़र हैं। सरकार ने Meta को जारी नोटिस में कहा है कि WhatsApp Username Feature को फिलहाल रोलआउट नहीं किया जाए। सरकार का मानना है कि इस फीचर से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुरक्षा और कानूनी पहलुओं पर पहले चर्चा और समीक्षा जरूरी है। इसलिए कंपनी को निर्देश दिया गया है कि परामर्श प्रक्रिया पूरी होने तक इस फीचर को लागू न किया जाए।
तीन दिन में मांगी गई पूरी जानकारी
WhatsApp इस साल के आखिर में एक यूज़रनेम लाने की योजना बना रहा है, जिससे यूज़र्स अपने फ़ोन नंबर शेयर किए बिना बातचीत कर सकेंगे। मेटा के मालिकाना हक वाले मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म का कहना है कि यह फ़ीचर प्राइवेसी बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, खासकर ग्रुप चैट और नए कॉन्टैक्ट्स के साथ बातचीत में। सरकार ने Meta से कहा है कि वह तीन दिनों के भीतर इस फीचर की पूरी जानकारी उपलब्ध कराए।
इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित पहलुओं की जानकारी मांगी गई है—
- Username Feature कैसे काम करेगा।
- इसके लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय होंगे।
- भारत में इसे लागू करने की कंपनी की योजना क्या है।
सरकार को क्यों है चिंता?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, WhatsApp का नया Username Feature किसी व्यक्ति, संस्था या सरकारी एजेंसी की पहचान की नकल (Impersonation) का माध्यम बन सकता है। हालांकि, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स और स्टार्टअप फाउंडर्स ने चिंता जताई है कि यूज़र्स ऐसे यूज़रनेम बना सकते हैं जो बिज़नेस, सरकारी एजेंसियों या पब्लिक हस्तियों जैसे दिखते हैं, जिससे शायद किसी और की नकल, धोखाधड़ी और फाइनेंशियल स्कैम हो सकते हैं, जब तक कि मज़बूत वेरिफिकेशन और एंटी-अब्यूज़ सेफ़्टी उपाय लागू न किए जाएं।
अधिकारियों का मानना है कि यदि मजबूत वेरिफिकेशन सिस्टम नहीं हुआ तो धोखेबाज किसी प्रसिद्ध व्यक्ति, सरकारी विभाग या ब्रांड जैसा यूज़रनेम बनाकर लोगों के साथ ऑनलाइन ठगी कर सकते हैं।
कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा के पहलुओं की भी होगी जांच
सूत्रों के अनुसार, संबंधित एजेंसियां इस फीचर के कानूनी ढांचे की भी जांच करेंगी।
सरकार यह भी देख रही है कि यदि यह फीचर सार्वजनिक सुरक्षा (Public Safety) या राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) के लिए खतरा पैदा करता है, तो क्या मौजूदा कानूनों के तहत इसके रोलआउट को रोका जा सकता है।
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WhatsApp का क्या कहना है?
WhatsApp इस साल के आखिर तक Username Feature लाने की तैयारी कर रहा है।
कंपनी का कहना है कि इस फीचर का उद्देश्य यूज़र्स की प्राइवेसी को बेहतर बनाना है ताकि लोग अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना भी बातचीत कर सकें। विशेष रूप से ग्रुप चैट और नए कॉन्टैक्ट्स के साथ बातचीत के दौरान यह फीचर उपयोगी होगा।
साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता
साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों और कई स्टार्टअप फाउंडर्स ने इस फीचर को लेकर चिंता जताई है।
उनका कहना है कि यदि प्रभावी पहचान सत्यापन (Identity Verification) और एंटी-इम्पर्सनेशन सिक्योरिटी सिस्टम लागू नहीं किए गए, तो कोई भी सरकारी एजेंसी, कंपनी या सार्वजनिक हस्ती जैसा यूज़रनेम बनाकर लोगों को धोखा दे सकता है।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
Paytm के फाउंडर और चीफ एग्जीक्यूटिव विजय शेखर शर्मा ने X पर कहा कि एक जैसे लगने वाले यूज़रनेम नकल और स्कैम का ज़रिया बन सकते हैं। KnotDating के को-फाउंडर और चीफ एग्जीक्यूटिव जसवीर सिंह ने यह भी सवाल उठाया कि प्लेटफ़ॉर्म यूज़र प्राइवेसी और अकाउंटेबिलिटी के बीच बैलेंस कैसे बनाएगा। Paytm के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय शेखर शर्मा ने X पर कहा कि एक जैसे दिखने वाले यूज़रनेम ऑनलाइन धोखाधड़ी और स्कैम का कारण बन सकते हैं।
वहीं KnotDating के सह-संस्थापक और सीईओ जसवीर सिंह ने भी सवाल उठाया कि WhatsApp इस फीचर में यूज़र प्राइवेसी और जवाबदेही (Accountability) के बीच संतुलन कैसे बनाएगा।

सरकार ने क्या संकेत दिए?
टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स ने कहा कि यह फ़ीचर धोखेबाज़ों के लिए भरोसेमंद ब्रांड्स, ऑर्गनाइज़ेशन्स और पब्लिक लोगों की नकल करना आसान बना सकता है सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि Meta का जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो सरकार भारत में इस फीचर के रोलआउट को रोकने के लिए आगे के कदम उठा सकती है।
एक अधिकारी ने कहा कि जब तक कंपनी भरोसेमंद सुरक्षा व्यवस्था का आश्वासन नहीं देती, तब तक इस फीचर को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
WhatsApp का प्रस्तावित Username Feature जहां यूज़र्स की प्राइवेसी बढ़ाने का दावा करता है, वहीं सरकार और साइबर विशेषज्ञ इसकी सुरक्षा और संभावित दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता जता रहे हैं। फिलहाल Meta को सरकार के नोटिस का जवाब देना है। इसके बाद ही यह तय होगा कि भारत में यह फीचर कब और किन शर्तों के साथ लॉन्च किया जा सकेगा।
क्या आपको लगता है कि WhatsApp का Username Feature यूज़र्स की प्राइवेसी बढ़ाएगा या फिर ऑनलाइन स्कैम का नया रास्ता बन सकता है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। टेक्नोलॉजी और डिजिटल दुनिया की ऐसी ही ताज़ा खबरों के लिए Swar India को फॉलो करें और इस खबर को शेयर करना न भूलें।