अजिंक्य रहाणे रिटायरमेंट,अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास, भावुक वीडियो में छलके आंसू। पढ़ें उनका पूरा करियर, आंकड़े, ऑस्ट्रेलिया जीत और फैंस की प्रतिक्रिया।

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अजिंक्य रहाणे का संन्यास, आंसुओं में लिपटी एक शानदार पारी का अंत
30 जुलाई 2026 का दिन भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए भावुक कर देने वाला साबित हुआ। टीम इंडिया के पूर्व उप-कप्तान और अपने शांत स्वभाव के लिए मशहूर अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। यह ऐलान उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो के जरिए किया, जिसमें वे अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। इस वीडियो ने चंद घंटों में ही सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया, और फैंस से लेकर पूर्व साथी खिलाड़ियों तक, हर कोई रहाणे को भावभीनी विदाई देने में जुट गया।
रहाणे का यह फैसला भले ही अचानक लगे, लेकिन जो लोग उनके पिछले कुछ सालों के करियर ग्राफ पर नजर रखे हुए थे, उनके लिए यह पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं था। फिर भी, जिस भावुक अंदाज़ में उन्होंने यह घोषणा की, उसने पूरे क्रिकेट जगत को भावुक कर दिया।
कैसे हुआ ऐलान
रहाणे ने अपनी रिटायरमेंट की घोषणा इंस्टाग्राम पर एक वीडियो संदेश के जरिए की। इस वीडियो में उन्होंने अपने करियर के सफर को याद किया और बताया कि उनके लिए समय और टाइमिंग हमेशा से बल्लेबाजी में एक अहम भूमिका निभाते रहे हैं, और अब उन्हें लगता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदा लेने का सही समय आ गया है। वीडियो के अंत में जब वे बीसीसीआई, मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए), अपने साथियों, कोचों, आईपीएल फ्रेंचाइजियों, परिवार और फैंस का शुक्रिया अदा कर रहे थे, तब उनकी आवाज़ भर्रा गई और आंखों में आंसू छलक आए।
इस भावुक पल का एक क्लिप जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, फैंस के बीच “प्लीज़ डोंट क्राई जिंक्स” जैसा हैशटैग ट्रेंड करने लगा, जहां लोग उनसे भावुक न होने की गुज़ारिश करते नजर आए। दरअसल रहाणे को क्रिकेट जगत में प्यार से “जिंक्स” के नाम से भी बुलाया जाता है, और इसी नाम के साथ फैंस ने उन्हें अलविदा कहा।
रहाणे ने अपने संदेश में यह भी कहा कि जीवन की सच्चाई यही है कि हर चीज़ की एक शुरुआत होती है और एक अंत भी। इसी भाव के साथ उन्होंने अपने करियर के इस अध्याय को बंद करने का फैसला लिया।

अजिंक्य रहाणे रिटायरमेंट,करियर का सफर: डोंबिवली से टीम इंडिया तक
अजिंक्य रहाणे की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। मुंबई के पास डोंबिवली जैसे छोटे शहर से निकलकर टीम इंडिया की जर्सी पहनने तक का उनका सफर मेहनत, धैर्य और संघर्ष की मिसाल है। शुरुआती दिनों में लंबी यात्रा करके प्रैक्टिस के लिए जाना, घरेलू क्रिकेट में लगातार रन बनाना और फिर धीरे-धीरे राष्ट्रीय टीम में जगह बनाना – यह सब उनके करियर का अहम हिस्सा रहा है।
रहाणे ने अपने टेस्ट करियर की शुरुआत 22 मार्च 2013 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दिल्ली के फिरोज़ शाह कोटला स्टेडियम में की थी। दिलचस्प बात यह है कि उन्हें यह मौका तब मिला जब शिखर धवन, जिन्होंने मोहाली में डेब्यू करते हुए शानदार 187 रन बनाए थे, टीम में पहले से मौजूद थे। इसके बावजूद रहाणे ने अपने आप को साबित किया और धीरे-धीरे टीम के एक अहम स्तंभ बन गए।
अपने 12 साल से भी ज्यादा लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में रहाणे ने भारत के लिए 85 टेस्ट मैच खेले, जिसमें उन्होंने 38.46 की औसत से 5,077 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 12 शतक और 26 अर्धशतक जड़े, और उनका सर्वोच्च स्कोर 188 रन रहा। वे भारत के सबसे भरोसेमंद स्लिप फील्डरों में से एक माने जाते थे और उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 102 कैच लपके।
वनडे क्रिकेट में भी रहाणे का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। उन्होंने 90 वनडे मैचों में 35.26 की औसत से 2,962 रन बनाए, जिसमें तीन शतक शामिल हैं। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन्होंने 20 मैच खेले और 20.83 की औसत तथा 113.29 की स्ट्राइक रेट से 375 रन बनाए। कुल मिलाकर, रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सभी फॉर्मेट मिलाकर 8,000 से ज्यादा रन बनाए, जो उनकी निरंतरता और लंबे करियर का प्रमाण है।
करियर का सबसे यादगार अध्याय: ऑस्ट्रेलिया दौरा 2020-21
अगर रहाणे के करियर के सबसे बड़े लम्हे की बात करें, तो 2020-21 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टीम इंडिया की ऐतिहासिक 2-1 सीरीज़ जीत को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। यह वह दौरा था जब एडिलेड में हुए पहले टेस्ट में भारतीय टीम महज़ 36 रन पर ऑल आउट हो गई थी – जो टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में भारत का सबसे कम स्कोर था। इसके बाद कप्तान विराट कोहली पितृत्व अवकाश पर स्वदेश लौट आए, और टीम की कमान रहाणे के कंधों पर आ गई।
यह वह पल था जब रहाणे ने अपने नेतृत्व कौशल का असली परिचय दिया। मेलबर्न टेस्ट में उन्होंने एक निर्णायक शतक जड़ा, जिसने पूरी टीम का मनोबल वापस लाने का काम किया। इसके बाद टीम इंडिया ने चोटों से जूझते हुए भी, कई युवा और अनुभवहीन खिलाड़ियों के दम पर ऑस्ट्रेलिया की धरती पर वह कारनामा कर दिखाया जिसकी उम्मीद बहुत कम लोगों ने की थी। यह जीत भारतीय क्रिकेट के इतिहास की सबसे यादगार जीतों में गिनी जाती है, और इसका श्रेय रहाणे की कप्तानी और संयमित बल्लेबाजी को जाता है।
एक दिलचस्प आंकड़ा यह भी है कि जितनी भी बार रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट में शतक जड़ा, भारत उस मैच में कभी नहीं हारा। यह आंकड़ा उनकी उपयोगिता और टीम के लिए उनके योगदान को साफ दर्शाता है।
आखिरी अंतरराष्ट्रीय पारी और उसके बाद का दौर
रहाणे का आखिरी टेस्ट मैच जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज़ दौरे पर आया था। उससे पहले उनकी आखिरी बड़ी पारी 2023 में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आई थी, जहां उन्होंने भारत की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाए थे। हालांकि इसके बाद उन्हें सिर्फ दो और टेस्ट मैच खेलने का मौका मिला, और फिर धीरे-धीरे वे राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की योजनाओं से बाहर होते चले गए।
टीम से बाहर होने के बावजूद रहाणे ने घरेलू क्रिकेट में अपनी सक्रियता बनाए रखी। उन्होंने मुंबई टीम की कप्तानी करते हुए 2024-25 सीजन तक टीम का नेतृत्व किया, और घरेलू क्रिकेट में अपने अनुभव और नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाते रहे। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में भी वे सक्रिय रहे, जहां उन्होंने कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) की कप्तानी की। हालांकि पिछले दो सीजन में केकेआर का प्रदर्शन उनकी कप्तानी में उतना प्रभावशाली नहीं रहा – टीम 2026 में सातवें और 2025 में आठवें स्थान पर रही। रहाणे का आईपीएल में आखिरी मैच पिछले सीजन में केकेआर के लिए ही खेला गया था, और अब उनके संन्यास के बाद फ्रेंचाइज़ी को नए कप्तान की तलाश करनी होगी।
संन्यास के पीछे की भावनाएं
रहाणे ने अपने भावुक संदेश में साफ किया कि यह फैसला लेना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन वे मानते हैं कि जीवन में हर चीज़ का एक सही समय होता है। अपनी बल्लेबाज़ी में हमेशा टाइमिंग पर भरोसा करने वाले रहाणे ने इसी टाइमिंग को अपने करियर के फैसले पर भी लागू किया। उन्होंने माना कि उनके करियर में उतार-चढ़ाव आए, लेकिन हर मुश्किल दौर में फैंस और परिवार का साथ उनके लिए सबसे बड़ी ताकत रहा।
अपने वीडियो संदेश में उन्होंने बीसीसीआई, मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन, अपने सभी साथी खिलाड़ियों, कोचों, हर आईपीएल फ्रेंचाइज़ी, अपनी पत्नी राधिका, अपने पूरे परिवार, दोस्तों और उन तमाम फैंस का धन्यवाद किया, जिन्होंने हर उतार-चढ़ाव में उनका साथ दिया। यही वह पल था जब उनकी आवाज़ भर्रा गई और आंखें नम हो गईं।
फैंस और क्रिकेट जगत की प्रतिक्रिया
रहाणे के संन्यास की खबर और उनके भावुक वीडियो ने सोशल मीडिया पर एक अलग ही लहर पैदा कर दी। फैंस ने उन्हें “जिंक्स” कहकर संबोधित करते हुए भावुक संदेश साझा किए, और “प्लीज़ डोंट क्राई जिंक्स” जैसे वाक्यांश ट्रेंड करने लगे। कई फैंस ने उनके शांत स्वभाव, संकट के समय टीम को संभालने की क्षमता और विदेशी पिचों पर उनके शानदार रिकॉर्ड को याद किया।
पूर्व साथी खिलाड़ियों और क्रिकेट विशेषज्ञों ने भी रहाणे के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे शांत और भरोसेमंद बल्लेबाज़ों में से एक बताया गया, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी टीम के लिए मजबूती से खड़े रहने का माद्दा दिखाया। कुल मिलाकर, रहाणे का यह संन्यास किसी दुखद विदाई से ज्यादा उनके शानदार करियर के जश्न के रूप में देखा गया।
रहाणे की बल्लेबाज़ी शैली और खासियतें
अजिंक्य रहाणे को हमेशा से उनकी बेहतरीन तकनीक, संयमित स्वभाव और दबाव में भी शांत रहने की क्षमता के लिए जाना जाता रहा है। विशेष रूप से विदेशी पिचों पर, जहां भारतीय बल्लेबाज़ों को अक्सर संघर्ष करना पड़ता है, रहाणे का रिकॉर्ड शानदार रहा। दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने कई अहम पारियां खेलीं, जो टीम के लिए संकटमोचक साबित हुईं।
स्लिप में फील्डिंग करते हुए भी रहाणे हमेशा टीम के लिए एक भरोसेमंद विकल्प रहे। उनके सुरक्षित हाथों ने कई अहम मौकों पर टीम को महत्वपूर्ण विकेट दिलाए। उनकी यह खूबी उन्हें सिर्फ एक बल्लेबाज़ के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक संपूर्ण क्रिकेटर के तौर पर स्थापित करती है।
कप्तानी का दौर
हालांकि रहाणे कभी भारत के पूर्णकालिक टेस्ट कप्तान नहीं बने, लेकिन उन्होंने कई मौकों पर उप-कप्तान और स्टैंड-इन कप्तान के तौर पर टीम की अगुवाई की। 2020-21 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उनकी कप्तानी को खास तौर पर याद किया जाता है, जहां उन्होंने मुश्किल हालातों में टीम को संभाला और एक ऐतिहासिक जीत दिलाई। इसके अलावा घरेलू क्रिकेट में मुंबई टीम की कप्तानी के दौरान भी उन्होंने अपने नेतृत्व कौशल का प्रदर्शन किया।
आईपीएल में भी उन्हें कप्तानी का अनुभव मिला, जहां उन्होंने राजस्थान रॉयल्स और बाद में कोलकाता नाइट राइडर्स जैसी टीमों का नेतृत्व किया। हालांकि हाल के सीजन में केकेआर का प्रदर्शन उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा, लेकिन एक खिलाड़ी के तौर पर उनकी भूमिका और अनुभव को हमेशा सम्मान की नज़र से देखा गया।
आंकड़ों में अजिंक्य रहाणे का करियर
आइए एक नज़र डालते हैं रहाणे के अंतरराष्ट्रीय करियर के प्रमुख आंकड़ों पर:
टेस्ट क्रिकेट:
- मैच: 85
- रन: 5,077
- औसत: 38.46
- शतक: 12
- अर्धशतक: 26
- सर्वोच्च स्कोर: 188
- कैच: 102
वनडे क्रिकेट:
- मैच: 90
- रन: 2,962
- औसत: 35.26
- शतक: 3
टी20 अंतरराष्ट्रीय:
- मैच: 20
- रन: 375
- औसत: 20.83
- स्ट्राइक रेट: 113.29
इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि रहाणे भले ही सबसे आक्रामक बल्लेबाज़ न रहे हों, लेकिन उनकी निरंतरता, तकनीक और संकट के समय टीम के लिए खड़े होने की क्षमता उन्हें भारतीय क्रिकेट के एक अनमोल रत्न के रूप में स्थापित करती है।
भविष्य की राह
हालांकि रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया है, लेकिन उनके घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में भविष्य को लेकर अभी स्पष्टता नहीं है। मुंबई टीम की कप्तानी में उनके अनुभव को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि वे आने वाले समय में कोचिंग या मेंटरशिप की भूमिका में भी नजर आ सकते हैं। उनके शांत स्वभाव और खेल की गहरी समझ को देखते हुए, क्रिकेट जगत में उनकी अगली भूमिका को लेकर फैंस में उत्सुकता बनी हुई है।
केकेआर के लिए भी यह एक अहम मोड़ है, क्योंकि टीम को अब नए कप्तान की तलाश करनी होगी। रहाणे की कप्तानी में टीम भले ही हाल के सीजन में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाई हो, लेकिन एक अनुभवी खिलाड़ी और नेतृत्वकर्ता के तौर पर उनकी अनुपस्थिति टीम को जरूर खलेगी।
एक युग का अंत
अजिंक्य रहाणे का संन्यास सिर्फ एक खिलाड़ी की विदाई नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के एक अहम अध्याय का समापन है। डोंबिवली की गलियों से निकलकर टीम इंडिया की जर्सी तक का उनका सफर, संघर्ष, मेहनत और धैर्य की एक प्रेरणादायक कहानी है। मेलबर्न में उनका ऐतिहासिक शतक, विदेशी पिचों पर उनकी संयमित पारियां, और संकट के समय टीम के लिए उनकी मौजूदगी – ये सभी पल भारतीय क्रिकेट के इतिहास में हमेशा याद किए जाएंगे।
उनके भावुक संन्यास वीडियो ने यह साबित कर दिया कि रहाणे न सिर्फ मैदान पर, बल्कि मैदान के बाहर भी फैंस के दिलों में एक खास जगह रखते हैं। “जिंक्स” के नाम से मशहूर यह खिलाड़ी भले ही अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नज़र नहीं आएगा, लेकिन उनकी विरासत और योगदान हमेशा भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम इतिहास का हिस्सा बने रहेंगे।
जैसा कि रहाणे ने खुद कहा – जीवन में हर चीज़ की एक शुरुआत और एक अंत होती है। उनके क्रिकेट करियर का यह अंत भले ही भावुक कर देने वाला हो, लेकिन यह निश्चित रूप से एक शानदार और यादगार सफर का जश्न मनाने का पल है। भारतीय क्रिकेट प्रेमी हमेशा उन्हें उनकी शांत उपस्थिति, संकटमोचक पारियों और मैदान पर उनके योगदान के लिए याद रखेंगे।
अलविदा जिंक्स – आपका यह सफर भारतीय क्रिकेट के इतिहास में हमेशा सुनहरे अक्षरों में लिखा रहेगा।
आपकी नज़र में अजिंक्य रहाणे का सबसे यादगार पल कौन सा है? कमेंट में बताएं और इस भावुक विदाई को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें।
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